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डाला-बिल्ली में खनन पट्टों का किया सत्यापन

Sonbhadra

Updated Thu, 28 Jun 2012 12:00 PM IST
ओबरा। डाला-बिल्ली खनन क्षेत्र में खनन पट्टों का भौतिक सत्यापन बुधवार को अफसरों ने किया। पूरे दिन अधिकारियों ने खदान को बारीकी से देखा। इससे खनन चालू कराने की उम्मीद बढ़ गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार के लिए गले की हड्डी बन चुका जनपद का खनन व्यवसाय कब और कैसे चालू होगा? इसका निर्णय सरकार भी नहीं ले पा रही है। पीडब्लूडी, सिंचाई विभाग व विद्युत गृहाें की स्थापना में बाधक बन चुका रेत और गिट्टी की आपूर्ति सुनिश्चित कराने की दिशा में सरकार अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई है। लगभग 135 चालू पट्टों के निरस्तीकरण के अफवाह से समूचे व्यवसायियों में खौफ आज भी व्याप्त है। बुधवार को जिला प्रशासन की पूरी टीम डाला-बिल्ली खनन क्षेत्र में पूरे दिन चक्रमण करती रही। बंद खदानों के बार बार भौतिक निरीक्षण, वीडियोग्राफी की कार्रवाई का क्या नतीजा निकलने वाला है, कोई भी अधिकारी इस बाबत साफ साफ बताने में असमर्थता जता रहा है। बुधवार को खनन क्षेत्र में एडीएम मनीलाल, खान अधिकारी एसके सिंह, सर्वेयर अशोक मौर्या व क्षेत्रीय लेखपाल सहित अन्य कर्मचारी व पुलिस बल के साथ डाला-बिल्ली क्षेत्र के रासपहाड़ी, बगमनवा, काशी मोड़, लंगड़ा मोड़ आदि क्षेत्रों में स्थित खदानों का भौतिक निरीक्षण किया। प्रशासनिक अधिकारियों के भारी लाव लश्कर से देख खनन व्यवसायियों में पूरे दिन उत्सुकता बनी रही कि किसी उद्देश्य के तहत अधिकारियों की टीम क्षेत्र का भौतिक निरीक्षण किया। इस बारे में एडीएम मनीलाल यादव ने बताया कि शासन के निर्देश के अनुपालन में खनन पट्टों का भौतिक सत्यापन कर उन्हें पुन: चालू कराने की कवायद की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि भौतिक रूप से सही पाए जाने वाले पट्टों को तत्काल चालू करा दिया जाए। 28 फरवरी से ही तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश के बाद पूरे खनन क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिसके कारण इस क्षेत्र में कार्य करने वाले नक्सल क्षेत्र सोनभद्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड के 50 हजार मजदूरों की रोजी छिनी है।
की रोजी रोटी छिन गई। इतना ही नहीं यह व्यवसाय बंद होने से पूर्वांचल के पूरे विकास कार्य की गति ठप हो गई जो अब तक बरकरार है। जिला प्रशासन के शून्यता के कारण अरबों रुपये के इस उद्योग पर तालाबंदी की नौबत बनती जा रही है।
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