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कनहर, लौवा नदियों का पानी से छूटा नाता

Sonbhadra

Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
दुद्धी। भीषण गर्मी में नदियों के सूखने का सिलसिला शुरू हो चुका है। क्षेत्र की कनहर और लौवा नदी पूरी तरह सूख गई है। ऐसे में तटवर्ती इलाकों के लोगों के लिए पेयजल का संकट हो गया है, वहीं जानवर भी पानी के लिए इधर-उधर भटकने लगे हैं। तटवर्ती गांव के लोग तो पेयजल के लिए चुआड़ पर भी आश्रित हो गए हैं। यह स्थिति बारिश होने तक बनी रहेगी। ऐसे में क्षेत्र के लोग दिन-रात सिर्फ बारिश होने की ही प्रार्थना कर रहे हैं।
वनों और कंदराओं वाले सोनांचल में नदियों की बहुलता है। आदिवासी बहुल इलाके के लोगों का जीवन नदियों पर पूरी तरह आश्रित है। अति पिछड़े सोनांचल में नदी के तटवर्ती गांवों के लोग पेयजल के लिए नदियों पर आश्रित हैं। दुद्धी नगर में पानी आपूर्ति लौवा नदी से होती है। वहीं छत्तीसगढ़ से निकली कनहर नदी का अधिकांश भाग क्षेत्र से होकर गुजरता है। भीषण गर्मी में प्रतिवर्ष नदियां सूखने लगती हैं। इस वर्ष मानसून आने के कुछ दिन पूर्व ही दोनों नदियां पूरी तरह सूख गई हैं। लौवा नदी के सूखने से जहां कस्बे में जलापूर्ति व्यवस्था सिर्फ ठेमा नदी के भरोसे हो गई है। वहीं क्षेत्र की जीवनरेखा माने जाने वाली तथा कभी बाढ़ कभी सुखाड़ क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध कनहर नदी के सूखने से इसके तटवर्ती पोक्खा, करहिया, पिपरदह, जोरकहू सहित एक दर्जन गांवों में पानी के लिए हाहाकार मच गया है। वैसे तो अत्यंत पिछड़े इलाकों में पेयजल के लिए गांवों में हैंडपंप की स्थापना की गई है, परंतु विभागीय देखभाल के अभाव में अधिकांश गांवों के हैंडपंप खराब हैं। कुओं का अस्तित्व तो समाप्त ही हो चुका है। तालाब भी पूरी तरह सूखे हैं।
पिछले वर्ष अच्छी बारिश से गर्मी की शुरुआत में लग रहा था कि इस बार नदियां नहीं सूखेंगी, लेकिन मौसम के अंतिम चरण में नदियों का पानी से नाता टूट गया। नदी के तटवर्ती गांव के लोग बालू हटाकर चुआड़ बना रहे हैं तथा पानी एकत्र होने पर किसी तरह उसे लेकर प्यास बुझा रहे हैं। लेकिन इस तरह प्रदूषित पानी पीने से क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी बनी है। नदियों के सूखने से सर्वाधिक दिक्कत जानवरों को हो रही है। जंगलों के जानवर नदियों के सहारे ही अपनी प्यास बुझाते रहे हैं, लेकिन अब उनके लिए मुश्किल हो गई है। जंगली जानवर अक्सर पानी की तलाश में नदियों तक पहुंच रहे हैं तथा पानी के लिए बालू खोद रहे हैं लेकिन पानी की एक बूंद नहीं मिल रही है।
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