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खनन रुका तो निर्माण कार्य भी बंद

Sonbhadra

Updated Mon, 28 May 2012 12:00 PM IST
कोन। चोपन ब्लाक के नक्सल प्रभावित कोन क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों पर इन दिनों महंगाई भारी पड़ती हुई नजर आ रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से इन दिनों क्षेत्र में तमाम प्रकार के विकास कार्य प्रगति पर हैं, परंतु बालू व गिट्टी के खनन पर रोक लगने से विकास कार्यों पर ग्रहण लग गया है। सबसे बुरी स्थिति प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के उन शिक्षकोें की है, जिन्हें भवन प्रभारी नियुक्त कर विद्यालयों के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
निर्माणाधीन विद्यालयों में जुलाई 2012 से शिक्षण कार्य शुरू हो जाता है। ऐसे में भवन निर्माण विभाग द्वारा शिक्षकों पर निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा है। विद्यालयों के निर्माण हेतु धन का आवंटन वर्ष 2009 के प्राक्कलित लागत के अनुसार हुआ है। आज जहां सामान्य कीमतों पर भी भवनों का निर्माण शिक्षकों द्वारा जैसे-तैसे ही पूर्ण किया जा सकता था, वहीं खनन बंद हो जाने से बालू, गिट्टी के दामों में जबरदस्त बढ़ोत्तरी के चलते विद्यालयों का निर्माण कैसे पूरा किया जा सकेगा। ऐसी स्थिति मेें शिक्षक किंकर्तव्य विमूढ वाली स्थिति में आ गए हैं। यदि शिक्षक समय से कार्य पूरा नहीं करते हैं, तो उन्हें विभागीय कार्रवाई का दंश झेलना पड़ सकता है।
कुछ इसी प्रकार की स्थिति से गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले इंदिरा आवास के लाभार्थियों को भी रूबरू होना पड़ रहा है। लाभार्थियाें को 38 हजार की धनराशि दो किस्तों मेें जारी की जाती है। ऐसे में भवन निर्माण सामग्रियों में बढ़ोत्तरी होने के चलते प्रथम किस्त से डोर लेवल तक का कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। अब प्रशभन ये उठता है कि जैसे-तैसे अपना पेट पालने वाले बीपीएल परिवार आवास निर्माण हेतु अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था कहां से करेंगे ? इसके साथ ही साथ गांव की पुल-पुलियों, सीसी रोड आदि के निर्माण में समस्याएं खड़ी होती दिखाई दे रही हैं। कार्य कराने वाले ठेकेदार भी निर्माण सामग्रियों में अत्यधिक वृद्धि होने का हवाला देते हुए नजर आ रहे हैं। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगना लाजिमी है। क्षेत्र के हर तबका से बालू व गिट्टी के वैध खदानों को शीघ्रातिशीघ्र चालू कराने की मांग उठने लगी है, जिससे कि स्थानीय स्तर पर भूखमरी के कगार पर पहुंच चुके मजदूरों को रोजगार मिलने के साथ ही साथ आधे अधूरे पड़े विकास कार्यों को पटरी पर लाया जा सके।
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