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गन्ना खरीद शुरू पर मुश्किलें भी कम नहीं

Sitapur

Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
सीतापुर। जिले में गन्ना पेराई का काम शुरू हो गया है। महमूदाबाद की सहकारी मिल सहित निजी क्षेत्र की चारों चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई शुरू कर दी है। इन चीनी मिलों को गन्ने का आवंटन कर दिया गया है। इस सत्र में जिले में कम से कम 699.84 लाख कुंतल गन्ना पेरा जाना है। इसके सापेक्ष अब तक 29.28 लाख कुंतल गन्ने की पेराई हो चुकी है। इसी के साथ ही जिले के सभी 213 क्रय केंद्रों पर गन्ने की खरीद भी शुरू हो गई है। लेकिन किसानों की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं, कहीं किसानों को पर्ची नहीं मिली हैं, तो कहीं रिजेक्ट प्रजाति के गन्ने की खरीद नहीं की जा रही है। सर्वे के दौरान गलत फीड हुए डाटा ने उनकी मुश्किलों को और भी बढ़ा दिया है।
जिले की सभी चीनी मिलों में गन्ने की पेराई शुरू तो हो चुकी है लेकिन जिले के तमाम किसान अभी भी ऐसे हैं जिन्हें समय से गन्ने की पर्ची नहीं मिल पा रही है। ऐसे में उन किसानों के आगे अपने गन्ने की तौल कराना एक चुनौती बना हुआ है। करियामऊ गांव के निवासी दिलीप का कहना है कि पेराई सत्र शुरू हुए 15 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन उन्हें अभी तक कोई भी गन्ने की पर्ची नहीं मिली है।
गन्ना किसानों को तौल पर्ची न मिलने की स्थिति में यह व्यवस्था है कि किसान अपने मोबाइल पर मिले एसएमएस को क्रय केंद्र पर दिखाकर गन्ने की तौल करा सकता है। लेकिन यदा-कदा मैसेज न मिल पाने से भी गन्ना किसानों के आगे कई समस्याएं आ रहीं हैं। इसके अलावा जिले के सुदूरवर्ती गांजरी इलाके के सैकड़ों गांव ऐसे हैं जहां के लघु और सीमांत किसान इंटरनेट नहीं जानते हैं। ऐसे में उनके सामने गन्ना सूचना प्रणाली को पूरी तरह से ऑपरेट कर पाना मुश्किल काम है। इससे उन्हें कई बार कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है।

रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना भी रिजेक्ट
हरगांव की अवध शुगर मिल द्वारा रिजेक्ट प्रजाति के गन्ने की खरीद नहीं की जा रही है। लहरपुर क्षेत्र के किसान अपने गन्ने को लेकर मिल तक आते हैं और उन्हें वापस कर दिया जाता है। इन किसानों का कहना है कि सर्वे के दौरान उन्हें यह नहीं बताया गया कि उनका गन्ना रिजेक्ट प्रजाति का है। किसानों का कहना है कि रिजेक्ट प्रजाति के भी गन्ने की खरीद की जानी चाहिये। रिजेक्ट प्रजाति के गन्ने का मूल्य निर्धारित है। उस हिसाब से उनका भुगतान किया जाना चाहिये। जवाहरपुर चीनी मिल क्षेत्र के करियामऊ गांव के दिलीप का कहना है कि उन्होंने अपने खेत में स्वीकृति प्रजाति के ही गन्ने की बोआई की है लेकिन सर्वे के दौरान मिल के रेकार्ड में उनके गन्ने को अस्वीकृति प्रजाति का घोषित कर दिया गया है। इससे उनके सामने चीनी मिल को गन्ना बेचना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

चीनी मिलों को इस आशय के निर्देश दिए गए हैं कि चीनी मिल कम से कम चार दिन पूर्व इंडेंट (पर्ची) जारी करें, जिससे किसान समय से अपना गन्ना तैयार कर चीनी मिल को ला सकें। पर्ची जारी करने के साथ ही किसानों को उनके मोबाइल फोन पर एसएमएस भी भेजे जाय। जिससे उनको घर बैठे ही उनकी पर्ची, तौल और बैंक में गन्ना भुगतान भेजे जाने संबंधी सारी जानकारी उपलब्ध कराई जा सके और किसानों को बार-बार चीनी मिलों व बैंकों के चक्कर भी न लगाने पड़ें।
ओम प्रकाश सिंह, जिला गन्ना अधिकारी’


किस मिल ने कितना गन्ना पेरा
इस पेराई सत्र में हरगांव की दि अवध शुगर मिल्स लिमिटेड को सर्वाधिक 229.22 लाख कुंतल गन्ने का आवंटन किया गया है। इस मिल ने बीती 6 नवंबर से गन्ने की पेराई भी शुरू कर दी है। यहां अब तक 20.15 लाख कुंतल गन्ने की पेरा जा चुका है। महमूदाबाद की दि किसान मिल्स को 64.92 लाख कुंतल गन्ने का आवंटन किया गया है। यहां 28 नवंबर से पेराई शुरू हो गई है। इसके अलावा बिसवां की दि सेकसरिया शुगर फैक्ट्री को 186.27 लाख कुंतल गन्ने का आवंटन किया गया है। 22 नवंबर से यहां पेराई शुरू हुई है और अब तक 4.33 लाख कुंतल गन्ने की पेरा जा चुका है। डालमिया चीनी मिल जवाहरपुर को 112.81 लाख कुंतल गन्ने का आवंटन किया गया है। 6 नवंबर से पेराई भी शुरू करने वाली इस मिल में अब तक 2.54 लाख कुंतल गन्ने की पेरा गया है। इसी ग्रुप की रामगढ़ चीनी मिल को 101.64 लाख कुंतल गन्ने का आवंटन किया गया है। इस मिल ने बीती 26 नवंबर से गन्ने की पेराई शुरू की और अब तक 2.26 लाख कुंतल गन्ने की पेराई कर चुकी है। सीतापुर जिले में करीब 2.20 लाख पंजीकृत गन्ना किसान है। इनमें से करीब 17 हजार किसान इसी साल विभिन्न गन्ना समितियों में अपना पंजीकरण कराया है।

48 क्रय केंद्रों पर लगे इलेक्ट्रॉनिक कांटे
गन्ना तौल के दौरान पारदर्शिता बनी रहे। इसको लेकर सभी मिलों के कम से कम अपने 25 प्रतिशत क्रय केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगवाएं गए हैं। इस क्रम में हरगांव चीनी चीनी मिल को सबसे ज्यादा 20 और रामगढ़ को सबसे कम 6 क्रय केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगवाना है। इसके अलावा जवाहरपुर और बिसवां चीनी मिलों के 11-11 क्रय केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटों से गन्ने की तौल की जा रही है।
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