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मुनाफा छोड़िए, राइस मिलर्स के फंसे करोड़ों

Sitapur

Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
सीतापुर। बात हैरत की है, मगर सौ फीसदी सच है। सीतापुर में पांच दर्जन से अधिक राइस मिलर्स दशकों पहले चावल कारोबार में आए थे। उम्मीद थी कि उन्हें मुनाफा होगा। पर उन्हें इस बार घाटे से जूझना पड़ रहा है। कारण, भारतीय खाद्य निगम में टेक्निकल स्टाफ की तैनाती नहीं है। इससे तैयार चावल को एनओसी नहीं मिल पा रही है। बिना गुणवत्ता परखे एफसीआई इस चावल की खरीद नहीं कर रहा है। ऐसे में राइस मिलर्स के करीब 25 करोड़ रुपये फंस गये हैं। वहीं क्रय केंद्र एजेंसियों का भी करीब पांच करोड़ रुपये का भुगतान लटक गया है। राइस मिलर्स को कारोबार मद में बैंकों से लिए गए कर्ज के एवज में करीब पंद्रह फीसदी ब्याज भी चुकाना पड़ रहा है।
शासन के फरमान पर पहली अक्तूबर से क्रय एजेंसियों व राइस मिलर्स ने धान खरीद शुरू की। करीब 50 दिन बीत जाने के बाद क्रय एजेंसियां 39 हजार कुंतल से अधिक धान खरीद चुकी हैं। जिले में संचालित 65 राइर्स मिलर्स करीब एक लाख 94 हजार कुंतल धान खरीद चुके हैं। राइस मिलर्स व क्रय एजेंसियों ने अब तक करीब 30 करोड़ रुपये की लागत लगाकर धान खरीद की है। मिलर्स के एक अधिकारी ने बताया कि धान कोे राइस मिलर्स चावल में तब्दील कर भारतीय खाद्य निगम को सौंपते हैं। एफसीआई से लेवी व सीएमआर चावल का भुगतान मिलने पर आगे की धान खरीद शुरू की जाती है। एफसीआई के सिटी स्टेशन, रामकोट व मिश्रिख के गोदामों पर लेवी व सीएमआर का चावल उतरना है, लेकिन अब तक एफसीआई द्वारा यहां टेक्निकल स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है। गुणवत्ता परखे बिना चावल खरीद नहीं हो पा रही है। इससे भुगतान भी लटक गया है। राइस मिलर्स के गोदामों में भारी मात्रा में चावल लगा हुआ है। अब राइस मिलर्स ने भी धान खरीद पर रोक लगा दी है। राइस मिलर्स को अब तक खरीद गये धान के बदले में प्रतिदिन बैंकों को भारी ब्याज देना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर डीएम पंकज कुमार ने खाद्य आयुक्त को पत्र भी लिखा था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।

सरकार को देना पड़ रहा होल्डिंग चार्ज
राइस मिलर्स के लिये इस वर्ष क्रय एजेंसियों से धान लेकर उसका चावल बनाना काफी महंगा पड़ रहा है। सरकारी फरमान है कि क्रय एजेंसियों का चावल 20 दिन से अधिक रोकने पर राइस मिलर्स को रोजाना प्रति कुंतल के हिसाब से एक रुपया सरकार को अदा करना होता है। राइस मिलर्स के पास क्रय एजेंसियों से मिले करीब 39 हजार कुंतल धान से करीब 23 हजार कुंतल चावल तैयार हुआ। ऐसे में हर दिन राइस मिलर्स 23 हजार रुपये सरकार को हर्जाने के रूप में अदा कर रहे हैं।

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