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नौनिहालों की सेहत से बेफिक्र स्वास्थ्य महकमा

Sitapur

Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
सीतापुर। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहालों की सेहत के प्रति स्वास्थ्य महकमा संजीदा नजर नहीं आ रहा है। हर वर्ष स्कूलों में मेडिकल चेकअप के दौरान कुछ बच्चों की आंख की रोशनी कम पाई जाती है। ऐसे बच्चों को अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत मुफ्त में चश्मा उपलब्ध कराया जाना चाहिए, लेकिन अब तक बच्चों को चश्मा उपलब्ध नहीं कराए जा सके ।
एनआरएचएम के तहत संचालित राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत शासन ने ग्रामीण क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की दृष्टि कमजोर होने पर उन्हें चश्मा देने की योजना चला रखी है। स्कूल में ही बच्चों की आंखों की जांच से लेकर चश्मा देने तक का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। विभाग ने आबादी के हिसाब से कमजोर दृष्टि वाले बच्चों को चश्मा देने का लक्ष्य भी निर्धारित कर रखा है। पांच लाख बच्चों में यह लक्ष्य मौजूदा समय में 1525 बच्चों के लिए निर्धारित है। यह लक्ष्य सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों का है। शहरी क्षेत्र के स्कूल इस योजना में शामिल नहीं किए गए हैं। यह चश्मा गरीब परिवार का बच्चा हो या संपन्न परिवार का सभी के लिये लागू की गई है।
योजना के प्रति विभागीय अधिकारी कितने सक्रिय हैं, इसका अंदाजा किए गए कार्य से ही लग रहा है। वर्ष 2011-12 में 396 बच्चों को चश्मे दिए गए। विभाग लक्ष्य के एक चौथाई तक भी नहीं पहुंच सका। वर्ष 2010-11 में 997, वर्ष 2009-10 में लगभग 1300 बच्चों की आंखों का परीक्षण कर चश्मे दिए गए थे। कभी भी विभाग निर्धारित लक्ष्य को पूरा नहीं कर सका। विभाग अगर अब स्कूलों में टीम भेज कर बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराना शुरू भी कर दे तो कम से कम दो माह का समय बच्चों की जांच करने में ही लग जायेगा, क्योंकि ब्लॉक स्तर पर एक ही नेत्र सहायक की तैनाती है। उसे सैकड़ों स्कूलों का दौरा करना होगा।

ऐसे होती है जांच की प्रक्रिया
ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों की आंखों का परीक्षण सीएचसी, पीएचसी पर तैनात नेत्र सहायक करने जाते हैं। जिन बच्चों की नेत्र ज्योति कम पाई जाती है, उनको सूचीबद्ध कर विभाग को रिपोर्ट सौंप दी जाती है। विभाग द्वारा उन बच्चों को उनके नंबरों के हिसाब से चश्मे बनवाकर स्कूल तक भिजवाया जाता है।

अंधता निवारण के तहत बच्चों की आंखों की जांच कराकर चश्मे दिए जाते हैं। विभाग द्वारा दो बार चश्मे के लिये टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई लेकिन नियमानुसार टेंडर सही नहीं मिल सके। विभाग इसको लेकर मंथन कर रहा है, शीघ्र ही जांच प्रक्रिया शुरू कराकर चश्मा वितरण करवा दिया जायेगा।
-डॉ. एसके चौहान, एसीएमओ
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