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कमजोर हो रहा पुलिस महकमे की मुखबिरी तंत्र

Sitapur

Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
सीतापुर। पुलिस महकमे में सरकारी तंत्र एलआईयू और चौकीदारों के अलावा एक और ऐसा गुप्त तंत्र होता है जो पुलिस को सटीक सूचनाएं देकर उसकी तमाम मुश्किलें दूर करने का काम करता है। खबरी, मुखबिर, सूत्र या सोर्स जैसे विभिन्न नामों से जाना जाने वाला पुलिस का यह तंत्र अब बेहद बेहद कमजोर हो रहा है। कभी पुलिस के इस खबरी तंत्र के सदस्य जान जोखिम में डाल कर पुलिस की मदद करते थे। इसके चलते बड़ी-बड़ी वारदातों का चंद दिनों में ही खुलासा हो जाता था, लेकिन इधर कुछ वर्षों से पुलिस का मुखबिरों से संपर्क टूट गया है या फिर मुखबिरों ने पुलिस से नाता तोड़ लिया। नतीजतन कई अपराधों का खुलासा ही ही नहीं हो पाता। मुखबिरों की मानें तो पुलिस ने स्वयं उनका भरोसा खो दिया है। इमलिया सुल्तानपुर इलाके के एक मुखबिर खास ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब पुलिस से उसका भरोसा उठ गया है। जब वह पुलिस के लिए काम करता था तो अपराधियों से जान का खतरा बना रहता था और जब पुलिस की मुखबिरी से दूर होने की कोशिश करता था तो उसके सामने फर्जी मामलों में जेल जाने की नौबत आ जाती थी। ऐसी स्थिति में उसे दो पाटों के बीच पिसना पड़ता था। आखिर उसने पुलिस मुखबिरी से मुंह मोड़ लिया। सकरन थाना क्षेत्र के एक मुखबिर ने नाम न बताने की शर्त पर यहां तक कह डाला कि पुलिस के लिए उसने कई वर्षों तक काम किया। कई बड़ी घटनाओं का खुलासा कराया, लेकिन इसके बाद भी पुलिस उसके लिए बेरहम साबित हुई। नतीजतन गलत मामलों में उसको ही जेल भेज दिया गया। यही नहीं तमाम ऐसे मुखबिर हैं जो पुलिस मुखबिरी करने से दूर होते जा रहे हैं। शायद पुलिस के खबरी तंत्र की कमजोरी का ही नतीजा है कि पुलिस को वारदातों का खुलासा करने में पसीने छूट रहे हैं।
केस एक-
विश्वविख्यात धार्मिक नगरी नैमिषारण्य के हनुमान गढ़ी मंदिर पर 29 अप्रैल 12 को चोरों ने धावा बोल कर वहां से चांदी की गदा, चांदी के कई छत्तर समेत 25 लाख रुपए का माल चोरी कर लिया था। वारदात के बाद फिंगर प्रिंट, डॉग स्क्वॉयड, पुलिस व एसओजी टीमों ने सघन जांच-पड़ताल की, लेकिन घटना का आज तक खुलासा नहीं हो पाया।

केस दो-
19 अगस्त 12 को शहर कोतवाली इलाके के नैपालापुर गांव निवासी रिटायर्ड शिक्षक पुत्तन लाल शुक्ला के घर डकैतों ने जमकर लूटपाट की। जानकारी होते ही इंस्पेक्टर कोतवाली पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और कांबिंग की, लेकिन डकैत डेढ़ लाख रुपए का माल लूट कर गायब हो गए। इस वारदात का भी खुलासा अभी तक नहीं हो सका है।

केस तीन-
21 अगस्त 12 की रात वर्दीधारी डकैत मछरेहटा क्षेत्र के सढ़िला गांव निवासी बिहारी त्रिपाठी के घर फिल्मी अंदाज में लूटपाट की। इस दौरान डकैत करीब 50 हजार रुपए से अधिक माल भी लूट ले गए थे। डकैतों की जुर्रत यह कि विरोध करने की हिम्मत जुटाने वाले एक व्यक्ति छोटल्ले को गोली मार कर जख्मी कर दिया। डकैती की यह वारदात भी खुलासे का इंतजार कर रही है।

केस चार-
23 अगस्त 12 को सदरपुर इलाके के जहांगीराबाद कस्बे में चोरों ने सऊदी अरब में काम कर रहे नफीस अहमद के घर पर धावा बोल दिया। इस दौरान चोरों ने नकदी, गहने आदि लगभग दस लाख रुपए का माल पार कर दिया। खाली बक्से व ब्रिफकेस आदि बरामद किए गए। चोरी की इस वारदात को आधा माह से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन पुलिस घटना का खुलासा नहीं कर पाई है।
क्या कहते हैं रिटायर्ड एडीजी
सीतापुर पुलिस ट्रेनिंग से बतौर एडीजी पद से सेवानिवृत्त हुए एक्स एडीजी होशियार सिंह बलवारिया कहते हैं कि पुलिस की मदद के लिए मुखबिरों का मजबूत तंत्र हुआ करता था, जो घटनाओं के खुलासे में पूरी मदद करता था। वह कहते हैं कि पुराने लोग अब मुखबिरी जैसे झंझट से दूर हो गए हैं। इससे मुखबिर कम हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुखबिर तैयार करने की जिम्मेदारी जिले के कप्तान, सीओ व थानेदारों की होती है। मुखबिर बनाने के लिए पुलिस के पास समय होना चाहिए। पुलिस के पास अब समय का अभाव है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी लॉ इन आर्डर दुरुस्त रखने की है। इसी के साथ पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की तबादला नीति भी मुखबिर तंत्र के कमजोर होने का कारण मानी जा सकती है। वह बताते हैं कि अभी तक थाने पर थानेदार तीन-तीन साल तक तैनात रहते थे। इस बीच वह अपने मुखबिर तैयार कर लेते थे, लेकिन अब चाहे जिले के कप्तान हों या फिर निचले स्तर के अधिकारी, उनके तबादले कम अंतराल में ही हो जाते हैं। इस वजह से उन्हें मुखबिर तैयार कर पाने का मौका नहीं मिल पाता।
फांसी पर झूलता मिला था पुलिस का मुखबिर
27 अगस्त 12 को लहरपुर कोतवाली इलाके के रिछौना गांव निवासी रामनरेश पुत्र गोकुल का शव संदिग्ध अवस्था में फांसी पर झूलता मिला था। इस घटना को लेकर मृतक के परिजनों ने बताया था कि रामनरेश हरगांव और लहरपुर पुलिस के लिए मुखबिरी करता था। मौत से पहले वह लहरपुर कोतवाली में ही बना रहता था। घर वालों का दावा था कि पुलिस की मुखबिरी करने के कारण ही कुछ लोग उससे रंजिश मानते थे। परिजनों ने उसकी हत्या कर फांसी पर लटकाए जाने की आशंका व्यक्त की थी।
‘मुखबिर तंत्र किसी खास गैंग व क्षेत्र के लिए हुआ करते थे। जब नए अपराधी आ जाते हैं तो उनके बारे में पता लगाने में दिक्कत आती हैं। वैसे घटनाओं के खुलासों को लेकर काम जारी है।
जगदीप सिंह एएसपी दक्षिणी’
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