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नदियों का उफनाना तो थमा पर मुश्किलें नहीं

Sitapur

Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
सीतापुर। गांजरी क्षेत्र के रेउसा विकास खंड के कोनी और महंतपुरवा गांव के बाशिंदों के कलेजे बाढ़ के प्रकोप से कांप उठे हैं। इस साल घाघरा के उफान में रेउसा ब्लाक का महंतपुरवा गांव पूरी तरह से बह गया है। इसके अलावा कोनी गांव के उत्तरी छोर पर बसे 74 कच्चे मकान और झोपड़िया भी इसी नदी में समा गईं हैं। इन दोनों गांवों में रहने वाले करीब दो हजार लोगों को तहसील प्रशासन द्वारा निकटवर्ती ग्राम फौजदारपुरवा और जंगल टपरी के बाहर रहने के लिए भूखंड उपलब्ध कराए गए हैं। कुछ ग्रामीण कोनी बंधा पर खुले आसमान के नीचे बरसाती तानकर जीवन यापन कर रहे हैं।
मालूम हो कि बाढ़ कापानी महमूदाबाद, लहरपुर और बिसवां तहसील के गांवों में दाखिल हो चुका है। शारदा नदी के उफनाने से लहरपुर-भदफर मार्ग पर पानी भर गया है। इससे इस रोड पर आवागमन बाधित हो गया है। लहरपुर इलाके के बेलवा डिगुरा, रमुआपुर, मझरी, खनियापुर, चंदुवा शेखूपुर, पिपरिया, रतौली, तेजवापुर, सोंसरी, मुसियाना, बुढ़नापुर, सेतियापुरवा, खालेपुरवा, मास्टरपुरवा, कहारनपुरवा, टिकौना, गदियाना, कुसैपा समेत तीन दर्जन से अधिक गांव बाढ़ के पानी से घिर गये हैं। तम्बौर इलाके के नन्हुई, बसंतापुर, लोधवा, बरछता, देवपालपुर, दुबई, सेतुही, बमहेला, छतागुर आदि गांव में शारदा नदी का पानी घुस गया है। रेउसा क्षेत्र में बहने वाली घाघरा नदी के तटवर्ती गांव मारूबेहड़, चलहारी, सिपतपुर, जटपुरवा, रंडाकोडर, लालपुर, मुजेहना, गौढ़ी, मिउड़ी, छेलूहा, दलिया, जगदीशपुर, राजापुर, पंडितपुर, शिवपुरी, सेमरा, कुसमौरा, पतौरी, ताहपुर, हरिहरपुर, नटकेला, कासिमपुरवा, मटेली, जतहिया, सिसईयाबाजार, श्याम नगर, नगीनापुरवा, जंगलटेपरी, पसियनपुरवा, गोड़ियनपुरवा, नगीनापुरवा, जेतैइहा, चंद्रभालपुरवा, असईपुर, अंधपुर, कोनिया, बाजारपुरवा, दर्जिनपुरवा, टिब्भा, ठकुरनपुरवा, कबरियनपुरवा आदि गांवों में इस नदी का पानी भरा हुआ है।
इसके अलावा शारदा की तलहटी में बसे काशीपुर, मल्लापुर, बेनीसराय, लखनियापुर, मदनापुर, सलौली, चिलिहा, कल्ली, अम्बाई, धनपुरवा, मंगतपुरवा, मेथनापुर, छेदीलालपुरवा, भदफर आदि दर्जनों गांवों में भी पानी भरा हुआ है। इन गांवों के तमाम लोगों ने स्कूलों की छतों पर अपना आशियाना बना लिया है।

क्या कहते हैं अधिकरी
एडीएम राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि बाढ़ग्रस्त बिसवां तहसील क्षेत्र में 56 और महमूदाबाद तहसील क्षेत्र में 38 नावों की व्यवस्था की गई है। यह नावें बाढ़ में फंसे ग्रामीणों को बाहर निकालने के साथ प्रशासनिक व स्वास्थ्य टीम को लाने-जाने का कार्य करेंगी। साथ ही पीड़ितों भोजन व राशन के साथ ही लंच पैकेटों का भी वितरण कराया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों को दवाओं का वितरण भी कराया जा रहा है।


गोमती समेत गांजरी नदियों के पानी में गिरावट
सीतापुर। बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के बाद भी गांजरी क्षेत्र कहर ढाने वाली चौक, घाघरा और गोमती नदी के जल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत सरायन नदी के जलस्तर में दस सेमी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान जिले में बारिश नहीं हुई है। बैराजों के जल स्तर में भी गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को शारदा और गिरिजा बैराज के जलस्तर में कमी दर्ज की गई। बनवसा बैराज के जलस्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
गांजरी क्षेत्र में चौका और घाघरा नदियों के जलस्तर में क्रमश: 15 व 5 सेमी की कमी आने से इन इलाके के ग्रामीणों को राहत मिली है। शुक्रवार को चौका का जलस्तर 119.20 एवं घाघरा नदी का जलस्तर 119.10 मीटर जलस्तर रिकार्ड किया गया। चौका नदी पर बने महमूदाबाद बांध के जलस्तर में बीते 24 घंटों के दौरान 40 सेमी की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इसका जलस्तर 117 मीटर पर पहुंच गया है। शुक्रवार को गोमती नदी का जल स्तर 119 मीटर पर पहुंच गया। इसके अलावा सरायन नदी के जलस्तर में 10 सेमी की बढ़ोतरी होने के बाद इसका जलस्तर 128 मीटर रिकार्ड किया गया। पिछले चौबीस घंटे के दौरान शारदा और गिरिजा बैराज के जल स्तर में पांच-पांच सेमी की गिरावट के बाद इन बैराजों का जलस्तर क्रमश: 135.10 मीटर और 135.90 मीटर रिकार्ड किया गया। गिरिजा बैराज का जलस्तर 134.95 मीटर दर्ज किया गया। वनबसा बैराज के जलस्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसके अलावा विभिन्न बैराजों से जिले की नदियों में कुल तीन लाख 56 हजार 269 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।


बाढ़ के साथ ही भेड़ियों का आतंक
सीतापुर। जिले का गांजरी इलाका इन दिनों बाढ़ के पानी के साथ ही साथ हिंसक जानवरों के आतंक की भी चपेट में है। सबसे ज्यादा वह गरीब परिवार हैं, जो बिना दरवाजे वाले घरों, झोपड़ियों अथवा बरसाती तान कर सड़कों के किनारे जीवन यापन कर रहें हैं। सामाजिक वानिकी वन प्रभाग के प्रभारी प्रभागीय निदेशक एबीएस सिंगरौरा ने बताया कि गांजरी इलाके में बाढ़ आने से नदियों के किनारे की झाड़ियों, बागों एवं खेतों में पानी भर जाने से यह जंगली जानवर अपने बचाव और भोजन की तलाश में आबादी की ओर आ गये हैं। उन्होंने बताया कि गांजर का इलाका विस्तृत भूभाग है और यहां पर हजारों एकड़ गन्ने के खेत है। उन्होंने बताया कि वारदातों के बाद घटना स्थल पर पाये गये पग चिन्हों और ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में भेड़िये का आतंक है। ग्रामीणों को वन विभाग की टीम द्वारा इससे बचाव के उपाय बताये जा रहे हैं। क्षेत्र के रेउसा, थानगांव, पहला इलाके में जंगली जानवरों का आतंक मचा हुआ है। लोग सूर्यास्त से पहले ही बच्चों को घरों में कैद कर किवाड़ बंद कर लेतें हैं। ऊंचे स्थानों पर शरणार्थी बनकर दरवाजा विहीन झोपड़ियों में आदमखोर भेड़िया दबे पांव आता है और मां-बाप के बगल सो रहे दुधमुंहे शिशुओं को अपने मुंह में दबाकर उठा ले जाता है। यह सिलसिला बीत डेढ़ माह से जारी है। बाढ़ पीड़ित चहलारी गांव के बांशिदें इस कदर खौफजदा हैं कि उन्होनें लाठी लेकर पूरी रात जागकर पहरा देने का निर्णय लिया है। पीड़ितों का कहना है कि गांजर के मासूमों को बचाने की फिक्र न तो वन विभाग को है और न ही प्रशासनिक अमले के पास इस ओर देखने की फुर्सत है। इसी के चलते इस आदमखोर जानवर को अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है।

इन नम्बरों पर दें सूचना
गांजरी इलाके में किसी जंगली हिंसक जानवर को देखने पर निमभन मोबाइल नम्बरों पर सूचना दें
प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी वन प्रभाग- 9415689627
क्षेत्रीय वनाधिकारी, बिसवां- 9450628070
अथवा क्षेत्रीय वनाधिकारी, लहरपुर- 9415005390


क्या करें क्या न करें
घर के सामने आग जलाएं अथवा जलता चिराग रखें।
छोटे बच्चों को किसी भी दशा में बाहर न सोने दें।
मकान में दरवाजा या बांस की टटिया अवश्य लगाएं व अन्दर से बन्द रखें।
घरों के आस-पास सफाई रखें, खाने-पीने की चीजें इधर-उधर न फेकें।
गांव के लोगों की एक टीम बनाकर रात्रि में संवेदनशील मार्गों पर गश्त करें।
आवश्यकतानुसार वन विभाग के कर्मचारियों का सहयोग अवश्य ले।
बिना जानवर को देखे झूठी अफवाह न फैलाएं।
बाहर निकलते समय आत्मरक्षार्थ हाथ में कुल्हाड़ी, लाठी-डंडा आदि अवश्य रखें।
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