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धान बेचने के लिए मारे-मारे फिर रहे किसान

Siddhartha nagar

Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
सिद्धार्थनगर। जनपद में धान क्रय केंद्रों का बुरा हाल है। स्थिति यह है कि किसान अपने धान को लेकर क्रय केंद्रों से वापस लौट रहे हैं। विभाग की तरफ से किसानों की हितों के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस वजह से किसानों को धान को बिचौलियों के हाथ बेचना पड़ रहा है।
धान खरीद को लेकर जब जनपद के किसानाें ने बताया कि विभाग की मनमानी और उदासीन रवैये के कारण हमें धान को इधर-उधर बेचने के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। बावजूद इसके विभाग की तरफ से हम किसानों के ऊपर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अगर यही स्थिति रही तो हम गरीब किसान आखिर अपना धान लेकर कहा जाएंगे। जबकि इस वर्ष विभाग को 53 हजार मिट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य मिला था और विभाग ने मात्र तीन हजार मिट्रिक टन धान की खरीददारी अब तक की है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी कम खरीद विभाग ने क्यो की? जबकि किसान अपना धान क्रय केंद्रों से वापस लेकर लौट रहे हैं। इस संबंध में एडीएम राम मनोहर मिश्रा का कहना है कि एफसीआई और मिलरों के बीच विवाद होने के कारण बीच में धान क्रय केंद्रों को कुछ दिनों तक बंद कर दिया गया था। इसके लिए आज ही सभी क्रय प्रभारियों से वार्ता की जा रही है।


विभाग का रवैया उदासीन
किसान नरदेश्वर का कहना है कि विभाग हम किसानों के लिए कुछ भी नहीं कर रहा है। अगर करता तो हमें इधर-उधर धान को बेचना नहीं पड़ता है। यही वजह है कि विभाग ने अब तक इतना कम धान खरीदा है। जबकि हमारी पैदावार भी इस वर्ष ठीक हुई है। उन्हाेंने बताया कि विभाग इस मामले में अभी भी चुप्पी साधे हुए है। अगर यही हालात रहे तो हम किसानों को भूखे रहना पड़ेगा।

लक्ष्य की तुलना में नहीं हुई खरीद
किसान रामकेश का कहना है कि हमने इतनी मेहनत और लगन से अनाज को बोया था। जब हमारी उपज की खरीददारी करने की बारी आई तो विभाग इस पर कोई पहल नहीं कर रहा है। जबकि विभाग को जितने लक्ष्य मिले थे, उसका आधा भी वह नहीं खरीद पाया। आखिर विभाग हमारे धान को क्यों नहीं खरीद रहा है, यह समझ में नहीं आता। उन्होंने इस मामले में विभाग के उच्चाधिकारियों से जांच की मांग भी की है।

विभाग की मनमानी से खरीद प्रभावित
किसान रामकिशुन वर्मा का कहना है कि विभाग की मनमानी के कारण हमें आर्थिक रूप से काफी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने बताया कि हमारी रोजी-रोटी का जरिया केवल खेती है। ऐसे में समय से पैदावार होने के बाद रुपये के लिए धान को बेचना हमारी मजबूरी है, लेकिन विभाग की तरफ से हमें कोई भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बिचौलियों के हाथों बेचना मजबूरी
किसान लखी का कहना है कि विभाग की तरफ से हमारे धान की खरीददारी न होने से हमें उसको बिचौलियाें के हाथ बेचना पड़ रहा है। धान के सीजन के तत्काल बाद ही गेहूं की बुआई का सीजन शुरू हो जाता है। इसके लिए हमें पैसे की अत्यधिक आवश्यकता होती है। ऐेसे में विभाग हमारे धान को समय से नहीं खरीदता है, जिसकी वजह से बिचौलियों को हम अपना धान बेचते हैं।

उच्चाधिकारियाें से की जांच की मांग
किसान हनुमान का कहना है कि जनपद के उच्चधिकारियों के संज्ञान में होने के बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि धान क्रय केंद्रों पर जाने के बाद हम किसानाें को बार-बार यह कह कर लौटा दिया जाता है कि बोरे नहीं हैं। जबकि बिचौलियों के माध्यम से हमें उसी धान क्रय केंद्र पर बोरा उपलब्ध हो जाता है। उन्होंने लक्ष्य के सापेक्ष कम हुई खरीददारी की जांच की मांग प्रशासन के उच्चाधिकारियों से की है।
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