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उच्च शिक्षा से दूर हैं बार्डर क्षेत्र के लोग

Siddhartha nagar

Updated Fri, 21 Dec 2012 05:30 AM IST
सिद्धार्थनगर। जिले में उच्च शिक्षा के अभाव के कारण छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्राप्त करने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। बढ़नी, इटवा और शोहरतगढ़ के मध्य का क्षेत्र इंटर और डिग्री कॉलेज विहीन बना हुआ है। यहां के छात्रों को काफी दूर पढ़ाई करने के लिए जाना पड़ता है। शोहरतगढ़ से बढ़नी की दूरी 27 किमी तथा बढ़नी से इटवा की दूरी 25 किमी है। इस बीच एक भी इंटर और डिग्री कालेज नहीं है, जिससे तुलसियापुर, ढेबरूआ, परसा, गणेशपुर, कठेला आदि क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है। यहां से जो छात्र उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें 10 से 15 किमी का सफर तय करना पड़ता है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कई बार इंटर कालेज खुलवाने की मांग की गई, लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
तालकुंडा के पूर्व प्रधान रामानंद चौहान का कहना है कि यह क्षेत्र के लोगों का दुर्भाग्य है कि अब तक यहां एक भी इंटर कॉलेज या डिग्री कॉलेज नहीं खोला गया। यहां उच्च शिक्षा का सपना चकनाचूर हो रहा है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता छात्रों के हौसले को कुंद कर रही है।

छात्रनेता रमेश शुक्ला का कहना है कि अबसे चार वर्ष पूर्व क्षेत्रीय सांसद जगदंबिका पाल ने परसा में सूर्या महाविद्यालय का शिलान्यास कराया था। तब छात्र छात्राओं में यह उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें उच्च शिक्षा के लिए जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी, लेकिन चार वर्ष बीतने के बाद भी इस महाविद्यालय में प्रवेश शुरू नहीं हुआ, जिससे लोग मायूस हैं।

व्यवसायी विनोद पांडेय का कहना है कि लोगों का विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक वे शिक्षित न हों। मौजूदा परिवेश में उच्च शिक्षा का अपना अलग महत्व है। बिना उच्च शिक्षा हासिल किए कोई भी व्यक्ति सफल नहीं हो सकता। क्षेत्र में उच्च शिक्षा का कोई प्रबंध नहीं है, जिसके कारण यहां के गरीब बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित हैं। यहां के जनप्रतिनिधियों ने भी अब तक कोरे आश्वासन के अलावा और कुछ नहीं दिया।

डॉ. दिनेश कुमार पांडेय का कहना है कि सीमा क्षेत्र पर बसे होने के कारण यहां के लोगों को शिक्षा की अधिक आवश्यकता है। उच्च शिक्षण संस्थानों के न होने से क्षेत्र के युवाओं की पढ़ाई हाईस्कूल के बाद समाप्त हो जाती है। सबसे अधिक परेशानी लड़कियों को हो रही है, क्योंकि शिक्षा के लिए उन्हें काफी दूर जाना पड़ता है।

शिक्षक मोहम्मद फारूक का कहना है कि बिना तालीम के मनुष्य की जिंदगी अधूरी मानी जाती है। तालीम हासिल करना सबका अधिकार है, लेकिन क्षेत्र में एक भी महाविद्यालय नहीं है, जिससे यहां के बच्चों को तालीम के लिए जिला मुख्यालय अथवा शोहरतगढ़ कसबे में जाना पड़ता है। तुलसियापुर अथवा परसा में एक महाविद्यालय खुलना जरूरी है, जिससे बच्चों को शिक्षा हासिल करने में दिक्कत न हो।
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