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निमोनिया, दस्त की गिरफ्त में मासूम

Siddhartha nagar

Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
सिद्धार्थनगर। ठंड का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है। बढ़ती ठंड के कारण बच्चे दस्त और निमोनिया से पीड़ित हो रहे हैं। जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक ऐसे बच्चे आ रहे हैं, जो निमोनिया और दस्त से पीड़ित हैं। बच्चों को भर्ती करने के लिए जगह छोटी पड़ती जा रही है। सुबह आठ बजे से 10 बजे के भीतर जिला अस्पताल में चार बच्चे भर्ती किए गए, जिन्हें निमोनिया की शिकायत बतायी जा रही है। जिला अस्पताल में इनके नेबुलाइजेशन सहित अन्य सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। परिजनों को बाहर से सिरिंज सहित अन्य दवाओं की खरीददारी करनी पड़ रही है।
जिला अस्पताल में चिल्हिया से आए 10 माह के बच्चे को दस्त की परेशानी के कारण भर्ती करवाया गया, वहीं तेतरी बाजार के तीन माह, उसका बाजार से आए नौ माह तथा लखनपुर से आए तीन बच्चों को निमोनिया के चलते भर्ती किया गया है। सेमरियांव से आए बच्चे के अभिभावक राधेश्याम ने बताया कि जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर केवल कागजी खानापूरी हो रही है। दवाओं से लेकर सिरिंज ग्लूकोज बाटल सहित अन्य सामान को बाहर से खरीद कर मंगवाया जा रहा है। यहां सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। कटया से आये नौ माह के राजू के परिजनों ने बताया कि सुबह डॉक्टर भर्ती करने को कह कर गए, तबसे देखने नहीं आए। अस्पताल के कंपाउंडर तथा अन्य कर्मचारी ही यहां इलाज कर रहे है। तेतरी बाजार से आए तीन माह के बच्चे के परिजनों ने बताया कि जिला अस्पताल में इलाज की कोई सुविधा नहीं है। मलेरिया में बच्चों को सांस लेने में काफी तकलीफ रहती है। ऐसे में स्टीम भाप की सुविधा होना अस्पताल में जरूरी है, जो यहां नहीं है। उनका कहना है कि दोपहर तक अगर बच्चे की हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे लेकर गोरखपुर जाएंगे। यह स्थिति केवल जिला अस्पताल की ही नहीं है। जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी यह नजारा आम हो चुका है। ठंडक बढ़ने के कारण बच्चों पर दस्त और निमोनिया जैसी बीमारियों ने धावा बोल दिया है। इस संदर्भ में सीएमएस रामचंद्र का कहना है कि अस्पताल में बच्चों के इलाज का समुचित प्रबंध है। बच्चों के परिजन तत्काल राहत चाहते हैं, लेकिन इलाज में कुछ समय तो लगता ही है। जो दवाएं नहीं होती हैं, उन्हें ही बाहर से मंगवाया जाता है।

क्या है लक्षण
जिला संयुक्त चिकित्सालय में तैनात डॉक्टर विवेक मिश्रा का कहना है कि ठंड के मौसम में बच्चों को ठंड से बचाकर रखना ही सबसे बड़ा इलाज है। इस मौसम में बच्चों को निमोनिया और कोल्ड डायरिया का खतरा अधिक रहता है। निमोनिया में बच्चों को बुखार के साथ सांस लेने में भी परेशानी होती है। उनकी पसलियां चलने लगती हैं। वहीं कोल्ड डायरिया में बच्चों को सफेद दस्त होने लगते हैं। ऐसे में परिजनों को चाहिए कि वह तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क करें तथा उनके बताए अनुसार सावधानी बरतते हुए इलाज कराएं। सर्दी के मौसम में बच्चों की विशेष देखभाल आवश्यक है। नवजात बच्चों को गर्म रखने के प्रबंध आवश्यक है। छोटे बच्चों को अधिकतर मां के पास ही रहने देना चाहिए। उन्हें गर्म कपड़ों से लैस रखना आवश्यक है। बच्चे के कमरे का तापमान गर्म रखने का उपाय आवश्यक है। इसके लिए ब्लोवर, हीटर आदि का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन आक्सीजन की उपस्थिति भी आवश्यक है। इसके अलावा अगर इमली के कोयले मिल सके तो उससे पैदा की गई आग भी बेहतर हो सकती है। बच्चों को मां का दूध ही पिलाना चाहिए, इससे बच्चों के शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।
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