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कांशीराम शहरी आवास के लागों की सांसत

Siddhartha nagar

Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का ड्रीम प्रोजेक्ट कांशीराम शहरी आवास अब दुर्दशा का शिकार हो गया है। यहां न तो साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था है और न ही बिजली, पानी की। मुख्यालय के कांशीराम शहरी आवास में रह रहे लगभग पांच हजार लोगों की जिंदगी अव्यवस्था में गुजर रही है। कई बार जनप्रतिनिधियों से भी लोगों ने शिकायत की, लेकिन मामला सिफर रहा।
पानी के लिए तरस रहे हैं लोग
आवास में रहने वाले वाले सुनील कुमार का कहना है यहां के लोग साफ पेयजल के लिए तरस रहे हैं। अधिकतर इंडिया मार्क टू हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं और एक मंजिल से दूसरे मंजिल पर वाटर सप्लाई का पानी नहीं चढ़ता। पेयजल की समस्या यहां लंबे समय से बनी हुई है। आवास में जाने वाली पाइप लाइन पूर्णत: क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे लोगों को शुद्ध पानी मयस्सर नहीं होता। उन्हें आस-पास के क्षेत्रों में पानी के लिए भटकना पड़ता है।

बिन बिजली सब सून
मो. नबी का कहना है कि आवास में विद्युत व्यवस्था काफी लचर है। बिजली के तार जर्जर हो चुके हैं, जिससे आए दिन यहां के लोगों को लोकल फाल्ट से जूझना पड़ता है। बिजली के खंभे पर सोडियम लाइट लगाई गई हैं, लेकिन अधिकतर लाइटें खराब हैं। इस कारण बिजली रहने पर भी सड़कों पर अंधेरा फैला रहता है और लोगों को परेशानियां उठानी पड़ती हैं। यहां का ट्रांसफार्मर भी कम दक्षता वाला है। इस लिए अक्सर जलता रहता है।
0:- साफ सफाई ध्वस्त
विमला का कहना है कि आवास में साफ सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिससे यहां के लोगों को नारकीय जीवन बिताना पड़ रहा है। नालियों के ढक्कन टूट चुके हैं और शौचालय की टंकी से भी ढक्कन गायब हो गए हैं। ऐसे में हमेशा यहां दुर्गंध फैली रहती है, जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है। नालियों की साफ-सफाई नियमित रूप से नहीं होती, जिससे मच्छरों से यहां के लोग मलेरिया जैसी बीमारियों से जूझते रहते हैं।

कूड़ा निस्तारण नहीं
शांति देवी का कहना है कि आवास में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं है और न ही कूड़ादान रखे गए हैं। ऐसे में सारी गंदगी सड़कों पर फैली रहती है और आने-जाने वाले लोगों को परेशानी कास सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि सड़कों पर गंदगी के कारण लोगों आवास में दिन रात छुट्टा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है।
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