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या अब्बास या सकीना की सदाएं गूंजीं

Siddhartha nagar

Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
डुमरियागंज। हल्लौर में शुक्रवार को मोहर्रम की आठवीं के जुलूस में गांव की दोनों कदीमी अंजुमन अपने-अपने अलम और दस्ते के साथ पूरे गांव में गश्त करते हुए मुख्य मार्ग बस्ती-डुमरियागंज पहुंचे। वहां दोनों अंजुमनों ने नौहा ख्वानी कर सीनाजनी की। इस दौरान सुबह से ही गांव और क्षेत्र में या अब्बास या सकीना की सदाएं बुलंद होने लगीं। रात करीब आठ बजे हजरत अब्बास अलमदार की दरगाह में मर्सिया भी पढ़ी गई। वहीं दरगाह के बाहर अकीदतमंदों ने जंजीरी मातम किया, जिसे सुनने और देखने वालों की आंखों से आंसू बह निकले।
शुक्रवार को हल्लौर में सुबह से ही ‘या हुसैन या अली’ और ‘या अब्बास या सकीना’ की सदाएं बुलंद होती रहीं। सुबह करीब सात बजे गांव की अंजुमन फरोग मातम और अंजुमन गुलदस्ता मातम के मातमी दस्ते अपने साथ हजरत अब्बास के अलम को लेकर नौहा ख्वानी करते हुए पूरे गांव में घूमे और बस्ती-डुमरियागंज मुख्य मार्ग पर पहुंचे। वहां पर मातमी दस्ते के अकीदतमंदों ने करीब दो घंटे तक मातम किया। मातमी जुलूस में ठंड की परवाह न करते हुए नंगे पैर बच्चों ने भी पूरे जोश खरोश के साथ सीनाजनी की। उसके बाद दोनों अंजुमन देर शाम दरगाह हजरत अब्बास में पहुंचे। वहां करीब आठ बजे जाकिरे अहलेबैत इकबाल रजा ने मीर अनीस की मर्सिया पढ़ी, जिसे सुनकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। मजलिस के बाद एकबार फिर ‘या हुसैन या अली’ और ‘या अब्बास या सकीना’ की सदाओं के साथ जंजीरी और कमा का मातम हुआ। मोहर्रम की आठवीं पर हजरत अब्बास अलमदार के दरगाह पर मातमी दस्तों के साथ ही वहां आए अकीदतमंदों के लिए अंजुमन हैदरी लखनऊ तथा एसए ग्रुप की तरफ से चाय तथा सबील का इंतजाम किया गया था।

नौवीं मोहर्रम पर घर-घर रखे जाएंगे ताजिये
डुमरियागंज। इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजिया मोहर्रम की नौवीं पर हल्लैार तथा भटगंवा गांव में घर-घर रखे जाएंगे। ताजिया रखने के साथ ही अकीदतमंद पूरी रात जागकर इबादत करेंगे। दसवीं मोहर्रम को इन ताजियों को कर्बला पर ले जाकर दफन किया जाएगा।

मुफ्त में दी जायेगी अकीदतमंदों को ताजिया
डुमरियागंज। त्याग और बलिदान के त्योहार मोहर्रम पर हल्लौर स्थित मुख्य मार्ग बस्ती-डुमरियागंज चौराहे पर गांव के लोगों की तरफ से क्षेत्र के अकीदतमंदों में नि:शुल्क ताजिया वितरित किए जाएंगे। गांव के मोहम्मद हैदर फूलदार ने बताया कि ताजिया देने की परंपरा गांव में सदियों से चली आ रही है।

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