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खाद न मिलने पर उतरेंगे सड़क पर

Siddhartha nagar

Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा भुगतना किसानों की विवशता बन गई है। गेहूं की खेती की तैयारी में जुटे किसान अब डीएपी खाद की कालाबाजारी को लेकर आंदोलन का मूड बनाने लगे हैं। समितियों पर पसरा सन्नाटा, ऊंचे दामों पर डीएपी की खरीद आदि को लेकर अब किसानों का गुस्सा कभी भी सड़कों पर फूट सकता है।
ग्राम सभा अमहट के किसान जगरनाथ चौबे का कहना है कि साहब डीएपी की कमी के कारण कहीं हमारी खेती न प्रभावित हो जाए, इसकी चिंता सता रही है। यह कोई एक वर्ष की समस्या नहीं है बल्कि हर साल हमें इन परेशानियों से दो चार होना पड़ता है। खखरा बुजुर्ग के किसान सुनील त्रिपाठी का कहना है कि सुबह से शाम तक लाइन लगाकर समितियों के बाहर उर्वरक वितरण की प्रतिक्षा करना हमारी मजबूरी बन गई है। पंद्रह नवंबर तक रबी की बुआई के लिए अंतिम समय माना जाता है। डीएपी खाद न मिलने से संकट खड़ा हो गया है। एनपीके का निर्धारित मूल्य 856 रुपये है, जबकि यह ब्लैक में 1125 रुपये प्रति बोरी बिक रही है। डीएपी का निर्धारित मूल्य 908 है, लेकिन ब्लैक में यह 1250 रुपये में बिक रही है। इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन स्थिति जस की तस है। शंभूनाथ चौबे, तीजू वर्मा, उपेंद्र प्रताप, मुनिराज यादव, बैजनाथ, मोल्हऊ यादव आदि किसानों ने कहा कि यदि शीघ्र खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो हम लोगों को धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस बाबत अपर कृषि अधिकारी बीपी पाठक का कहना है कि किसानों की समस्याओं पर हमारी पैनी नजर है। इसमें लापरवाही बरतने वाले लोगों पर जांच करने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
इनसेट
8691 एमटी डीएपी जिले में उपलब्ध
कृषि विभाग के अनुसार इस बार जिले में एक लाख 57 हजार सात सौ पचास हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुआई का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष नौ हजार पांच सौ एमटी डीएपी वितरण का लक्ष्य तय है। आठ हजार छह सौ 91 एमटी डीएपी जिले में उपलब्ध है, लेकिन वह केवल कागजों तक सिमट कर रह गई है। किसान इसके लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। किसानों की समस्या को लेकर साहन सहकारी समितियां सुस्त दिख रही हैं। इसका भरपूर फायदा प्राइवेट दुकानदार उठा रहे हैं।
खाद तस्करी भी राह में रोड़ा
पुलिस महकमा भी मानता है कि खाद की तस्करी चरम पर है। खुनुवां, करहियां, परसौना, पकडिहवां, कोटिया, धनौरा, हरदौना, भदवा परसौना, सोतवा नाला आदि क्षेत्र खाद तस्करी के लिए पुलिस आंकडे़ में मौजूद हैं। खाद तो बरामद करने में पुलिस हर बार सफल रहती है, लेकिन खाद तस्करी में लिप्त लोग आखिर पुलिस की पकड़ से क्यों बाहर रहते हैं। यह तो जांच का विषय है।
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