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सफाई, पेयजल की व्यवस्था फेल

Siddhartha nagar

Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। जिले को इंसेफेलाइटिस से बचाने की कवायद फेल है। सफाई और शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने से लोग परेशान हैं। बीमारी से अब तक कई बच्चों की मौत हो चुकी है। कई स्थायी विकलांगता के शिकार हो चुके हैं।
इंसेफेलाइटिस फैलने की वजह ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई और शुद्ध पेयजल व्यवस्था का अभाव है। ग्रामीण क्षेत्रों में न तो जल निकासी का मुकम्मल व्यवस्था है और न ही फागिंग की। सफाई और आवश्यक दवाओं के छिड़काव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले की 999 ग्राम सभाओं में ग्राम स्वच्छता समिति का गठन किया। दस-दस हजार रुपये प्रधान और एएनएम के संयुक्त खातों में भेजा गया। इस रकम का उपयोग कहां किया गया यह जांच का विषय है। इस समय ग्राम सभा निधि में पैसे होने के बावजूद भी गांवों में सफाई व्यवस्था न के बराबर है। स्थिति को अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी तक जितने भी मरीज इंसेफेलाइटिस के मिले हैं वे गांव के ही हैं। इंसेफेलाइटिस क ा दूसरा वाहक एंट्रो वायरस जो कि दूषित जल के प्रयोग से पांव पसारता है। ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने का दावा फेल है। त्वरित ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रम 2012 की प्रगति की रिपोर्ट के अनुसार अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 539 नये हैंडपंप 142.23 लाख खर्च कर लग चुके हैं। जहां नल लगे हैं या तो खराब हो चुके हैं अथवा उनसे गंदा पानी निकल रहा है। इस संबंध में प्रभारी सीएमओ डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि ग्राम सभाओं में जो पैसे ग्राम स्वास्थ्य निधि के अंतर्गत दिए गए थे उसी के सहारे गांव में फागिंग और छिड़काव का निर्देश दिया गया है। साथ ही उन्होंने बताया कि इस धन से गरीब महिलाओं का इलाज भी कराया जाता है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. फणीश सिंह का कहना है कि हर क्षेत्रों में पशु धन प्रसार अधिकारियों की तैनाती है। अब तक जिले में 162 सुअरबाड़े पंजीकृ त है, जहां छिड़काव आदि की व्यवस्था ग्राम प्रधानों और एएनएम के सहयोग से कराने का निर्देश दिया गया है।
इनसेट
अब तक जा चुकी हैं कई जानें
इंसेफेलाइटिस से पांच माह के दौरान 17 लोगों की मौत हो चुकी है। 72 से ज्यादा मरीज गोरखपुर मेडिकल कालेज के लिए रेफर किए जा चुके हैं।
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