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सुविधाएं मिलें तो बढ़ जाएगी पर्यटकों की तादाद

Siddhartha nagar

Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। होटल है, पर सुविधाएं नदारद। आसपास कोई रेस्तरां नहीं, बल्कि फूस की झोपड़ियों में चाय की दुकान है। म्यूजियम है, पर बुद्ध से जुड़ी चीजें नहीं, न ही गाइड जो इतिहास बता सके। यह हालत है कपिलवस्तु की। यह वही जगह है, जिसके बारे में मान्यता है कि गौतम बुद्ध के पिता राजा शुद्धोधन की राजधानी रही और गौतम बुद्ध के जीवन के 29 बरस इन्हीं क्षेत्रों में बीता था। विश्व प्रसिद्ध स्तूप यहां है, पर सुविधाएं नहीं हैं। बावजूद इसके पर्यटकों का मोह इस क्षेत्र में खत्म नहीं हुआ है। बीते ग्यारह सालों में यहां दो लाख पर्यटक आ चुके हैं। बीते साल आंकड़ा तीस हजार तक पहुंच गया। लोग कहते हैं कि यदि सुविधा मिले तो आने वाले पर्यटकों की तादाद और बढ़ेगी।
कपिलवस्तु ऐतिहासिक स्थल है। इस स्थल पर देश ही नहीं विदेशों से भी हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। पर यहां न रुकने की व्यवस्था है और ना ही खाने का बेहतर इंतजाम। इसके बावजूद यहां पर्यटकों की संख्या सालाना पचीस से तीस हजार रहती है। दस साल में वर्ष 2010 में 28705, जबकि 2011 में 30205 विदेशी पर्यटक यहां आए। वर्ष 2003 ऐसा साल रहा, जिसमें केवल 14194 विदेशी पर्यटक यहां आढ। यह सबसे कम आंकड़ा रहा। बाकी के वर्षों में इनके आने का आंकड़ा औसतन 14 से 15 हजार तक सिमट कर रह गया। पर बीते दो साल में यहां एकाएक बढ़ी संख्या ने इस स्थल को और मजबूती दी है।

देखरेख के अभाव में होटल जर्जर
सिद्धार्थनगर। कपिलवस्तु स्तूप के पास पर्यटक होटल शाक्य पूर्व में बना था, लेकिन देखरेख के अभाव में यह जर्जर हो गया है। इसकी बदहाली का आंकलन इसी बात से किया जा सकता है कि यहां विदेशी पर्यटक कदम रखना भी मुनासिब नहीं समझते हैं।

सुविधाएं रहें तो और पर्यटक आएंगे
सिद्धार्थनगर। जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद कुमार कहते हैं कि यहां कपिलवस्तु में एक स्तूप है। यहां घूमने की जगह है, लेकिन कोई रुकना नहीं चाहता है। फिर भी यहां अन्य सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि पर्यटकों की संख्या में और बढ़ोत्तरी हो सके।

वर्ष पर्यटक
2001 16104
2002 15255
2003 14194
2004 19908
2005 18895
2006 18419
2007 18392
2008 18483
2009 19011
2010 28705
2011 30205
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