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676 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों पर ग्रहण

Siddhartha nagar

Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। मल्टीसेक्टोरल डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट प्लान के तहत जिले में 676 आंगनबाड़ी केंद्रों में निर्मित हो चुके 317 भवनों की गुणवत्ता खराब होने के कारण विभाग को हैंडओवर नहीं हो सका। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए तत्कालीन सीडीओ आरबी सिंह ने कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया था। इसी कारण द्वितीय किश्त रोक देने से इन आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण पर ग्रहण लगता दिख रहा है।
वर्ष 2009-10 में मल्टीसेक्टोरल डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट प्लान के द्वितीय फेज में स्वीकृत जिले के 676 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 1994.20 लाख रुपये स्वीकृत किया था। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र के भवन की लागत 2.95 लाख रुपये निर्धारित है। राज्य सरकार ने प्रथम किश्त के तौर पर कार्यदायी संस्था यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड को 997.10 लाख रुपये अवमुक्त भी कर दिया। कार्यदायी संस्था की तरफ से अब तक 317 आंगनबाड़ी केंद्रों का भवन निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है। जबकि 85 केंद्रों का भवन निर्माणाधीन है। पूर्ण हो चुके और निर्माणाधीन भवनों की गुणवत्ता जांच के दौरान 113 आंगनबाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। इस कारण पूर्ण हो चुके सभी भवनों को विभाग को हैंडओवर नहीं कराए गए। इसको देखते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय भारत सरकार से द्वितीय किश्त के तौर पर अवमुक्त हुई धनराशि 997.10 लाख रुपये को कार्यदायी संस्था को नहीं दी गई है। तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी ने कार्यदायी संस्था को गुणवत्ता ठीक कराने के साथ इसके लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया था। जबकि वर्ष 2008-09 में केंद्र सरकार से स्वीकृत 60 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए अवमुक्त हुए 177.00 लाख रुपये में 162.25 लाख खर्च करके कार्यदायी संस्था पैकफेड ने 55 भवन पूर्ण कर लिए है और पांच निर्माणाधीन है। जांच में इनकी गुणवत्ता ठीक पाई गई। इस लिए यह भवन विभाग को हैंडओवर किए जा रहे हैं। इन भवनों के निर्माण का सारा खर्च केंद्र सरकार वहन करती है। राज्य सरकार इस पर कोई धन नहीं खर्च करती। इस बाबत कांग्रेसी सांसद जगदंबिका पाल कहते हैं कि केंद्र सरकार की योजनाओं में भ्रष्टाचार के लिए प्रदेश सरकार के विभागीय अधिकारी जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार के धन का बंदरबांट किया जा रहा है। भवन निर्माण के लिए जिम्मेदार कार्यदायी संस्था का कार्य बेहद खराब है। इसकी जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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