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जलजमाव से जूझ रही है 50,000 की आबादी

Siddhartha nagar

Updated Mon, 30 Jul 2012 12:00 PM IST
बांसी। बाढ़ आए या न आए फजिहतवा नाले के इर्द गिर्द बसे दो दर्जन से अधिक गांवों की 50 हजार की आबादी बरसात के बाद जलजमाव से हलकान है। निजात पाने के लिए तीन दशक से ग्रामीण अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से फरियाद कर रहे हैं, पर इनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। धान की फसल बर्बाद होने से चार महीने तक गरीब परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट बरकरार रहता है। पशुओं के चारे का भी अकाल पड़ जाता है।
तहसील क्षेत्र में बूढी़ राप्ती और राप्ती नदी के बीच में फजिहतवा नाला बहता है। बरसात में जब नदी का जलस्तर बढ़ता है तो दोनों नदियों के तटबंधों में लगे रेग्युलेटर बंद कर दिए जाते हैं। बरसात में फजिहतवा नाले में आने वाला पानी चंवरताल से लेकर राप्ती और बूढ़ी राप्ती संगम स्थल तक लगभग 20 किमी दूरी में जलजमाव पैदा करता है। इससे सोनखर, बभनी, करही, कम्हरिया, सूपा बख्शी, नियाजोत, हयातनगर, तारा गुजरौलिया, कदमहवां, भंवारी, भुजराई, गुल्हरिया राजा, हाटा, पकड़डीहा, टड़वल घाट, फूलपुर दंतरंगवा, बफुआव, सूपा राजा, पिपरहवा, पटखौली सहित दो दर्जन से अधिक गांवों की फसल जलमग्न हो जाती है। जलजमाव चार महीने तक बना रहता है। लगभग आधा दर्जन गांव जलजमाव के कारण टापू में तब्दील हो जाते हैं। लोगों को भारी तबाही का सामना करना पड़ता है। खरीफ की फसल बर्बाद हो जाती है। दर्जनों कच्चे मकान गिर जाते हैं। क्षेत्र को संक्रामक बीमारियां फैल जाती हैं। चारों तरफ तबाही का मंजर दिखाई देता है। लोग दाने-दाने को मोहताज हो जाते हैं। ग्रामीण बृजलाल, रामधनी, रामवृक्ष, राममिलन, रामदास, पुरुषोत्तम का कहना है कि बरसात के दिनों में फजिहतवा नाले से होने वाले जलजमाव से निजात मिल जाए तो यहां के लोगों के दुर्दिन खुशहाली में बदल जाए। पूर्व जिला पंचायत सदस्य और सपा नेता कृष्णमुरारी यादव का कहना है कि कई बार समस्या को संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के समक्ष रखा गया, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला। कृष्णमुरारी यादव का कहना है कि यदि फजिहतवा नाले के जलनिकासी की व्यवस्था हो जाए तो इस क्षेत्र की लगभग 50 हजार की आबादी भीषण तबाही से छुटकारा पा सकती है।
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