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पेड़ काटने के बाद नहीं लगता दूसरा पौधा

Siddhartha nagar

Updated Thu, 05 Jul 2012 12:00 PM IST
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र में लकड़ी के ठेकेदारों की मनमानी नहीं थम रही है। विभाग की मिलीभगत से वे पेड़ों की कटान का परमिट बनाकर उन पर खुलेआम आरी चलवाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इतना ही नहीं, परमिट जारी करते समय काटने वाले पेड़ के बदले दूसरा पौधा लगाने का निर्देश को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। ठेकेदारों से विभाग द्वारा पेड़ों के लगाने के एवज में जमानत राशि भी जमा करवाई जाती है। मगर विभाग के लचीले कार्यप्रणाली के कारण कोई भी ठेकेदार पौधे लगवाने की जहमत नहीं उठाता है।
पूरे प्रदेश में चार से लेकर 10 जुलाई तक वन विभाग की ओर से वन महोत्सव सप्ताह चलाकर वन संरक्षण और उसके संवर्धन के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसमें मुख्यमंत्री भी जनता से अपील कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण करके प्रदेश को हराभरा बनाया जाए। वहीं डुमरियागंज में हरियाली को ही मिटाने का अभियान चल पड़ा है। तहसील क्षेत्र में वन विभाग के लोग हरे पेड़ों का ही लाइसेंस जारी कर उसे कटवाने में लकड़ी के ठेकेदारों के मनोबल को बढ़ावा देने में लगे हैं। जब विभाग के जिम्मेदारों से पेड़ों की कटान के बारे में पूछा जाता है उनकी दलील होती है कि वह पेड़ बिना फलदार था।
विभाग की ओर से जारी परमिट पर भी कटान वाले पेड़ के बदले दूसरा पौधा लगाने के लिए ठेकेदारों को निर्देश दिए जाते हैं। इसके बदले ठेकेदारों से बाकायदा जमानत राशि भी जमा करवाई जाती है। मगर कहीं भी कटान के एवज में पेड़ मालिक या ठेकेदार पौधा नहीं लगवाते हैं। वहीं पौधरोपण के मामले में विभाग भी इन पर ज्यादा निगरानी नहीं रख पाता है। इससे पेड़ों के बदले पौधे बहुत कम ही लगाए जाते हैं।

अगर नियम का हो पालन तो हर तरफ रहेगी हरियाली
डुमरियागंज। वन विभाग की ओर से एक पेड़ को काटने के बदले एक पौधा लगाने के लिए हिदायत देता है। इसके बदले प्रति पेड़ 200 रुपये जमानत राशि भी विभाग जमा करवाता है। पौधों को भी लगाने के लिए विभाग ठेकेदारों को जी खोलकर समय देता है। यह समय एक-दो माह नहीं, बल्कि पांच साल तक का होता है। इस दौरान ठेकेदार कहीं भी कटान वाले पेड़ की एवज में दो पौधे विभाग को दिखाकर अपनी जमानत राशि वापस ले लेते हैं। इसके बाद विभाग भी अपने कागजी कोरम को पूरा कर पेड़ों की निगरानी की तरफ से ध्यान हटा लेते हैं। हालांकि जो स्थिति है, उसे देखकर सवाल उठता है कि अगर एक पेड़ के बदले एक पौधा लगाया जाता है तो आखिर हरियाली क्यों नही दिखाई देती। अगर विभाग परमिट बनाते समय ठेकेदारों से कड़ाई से नियम का पालन करवाएं तो शायद हर तरफ हरियाली ही हरियाली दिखे।

क्या कहते हैं विभाग के जिम्मेदार
डुमरियागंज। इस संबंध में जिले के डीएफओ रजत चंद्रा ने बताया कि पेड़ों के लगाने के एवज में पेड़ मालिक से 200 रुपये जमा करवाए जाते हैं। पांच साल के भीतर ठेकेदार पौधे लगाकर अपने क्षेत्र के वन क्षेत्राधिकारी से इसकी पुष्टि करवाता है। उसके बाद विभागीय कोरम पूरा कर उसे जमानत राशि वापस लौटा दी जाती है। अगर वे लोग पौधे नहीं लगाते हैं तो उनकी जमानत राशि जब्त कर ली जाती है।
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