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इलेक्ट्रिक ट्रेनों की राह में डिरेलमेंट बाधक

Shahjahanpur

Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
दस माह में 11 बार बेपटरी हुईं बोगियां और वैगन
- हरदोई-रोजा के बीच सितंबर में मिल चुकी है फिटनेस
- रोजा-रामपुर के बीच बिजलीकरण पूरा, फिटनेस बाकी
- अफसर बता रहे हैं बिजलीकरण में देरी को मुख्य कारण
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। उत्तर रेलवे के उच्चाधिकारी लखनऊ-दिल्ली रूट पर बिजली की ट्रेनें चलाने को बेताब हैं। इसके लिए गत फरवरी में मुख्य संरक्षा अधिकारी एके कर्दम रोजा से लखनऊ तक स्पेशल ट्रेन से यात्रा करके इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाने को हरी झंडी भी दिखा चुके हैं। बावजूद इसके सेक्शन में बीते दस माह में हुईं डिरेलमेंट की 11 घटनाओं ने ट्रैक की सुदृढ़ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, रेल अफसर नहीं मानते कि इस रूट पर बार-बार ट्रेनें बेपटरी होने के कारण इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन पिछड़ रहा है।
बता दें कि उत्तर रेलवे मुख्यालय लखनऊ-दिल्ली रूट पर सहारनपुर से मुगलसराय तक बिजली के इंजनों से ट्रेनें और मालगाड़ियां जल्द से जल्द चलाने को प्रयासशील हैं, लेकिन कई जगह ट्रैकों के विद्युतीकरण का काम पूरा नहीं हो सका है। इस कारण इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन की डेटलाइन बार-बार आगे बढ़ रही है। गत फरवरी में दौरे पर आए तत्कालीन महाप्रबंधक एसके बुढ़लाकोटी ने अक्तूबर से इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाने का संकेत दिया था।
इसके एक माह बाद ही रेल संरक्षा आयुक्त एके कर्दम ने रोजा से लखनऊ तक स्पेशल ट्रेन के जरिए विद्युतीकरण का काम जांचा। यही नहीं, बीते सितंबर में सीआरएस ने हरदोई-लखनऊ और हरदोई-रोजा के बीच इलेक्ट्रिक ट्रेनों के लिए रूट फिटनेस दे दी। रोजा-बरेली और बरेली-रामपुर के बीच बिजलीकरण का काम भले ही पूरा हो चुका हो, पर अभी फिटनेस नहीं मिली है। अगर मिल भी जाती है तो भी ट्रैक इस लायक नहीं कि उस पर 140 किमी की रफ्तार से बिजली की ट्रेन दौड़ाई जा सके।
रेल सूत्रों अनुसार इसका मुख्य कारण मेन लाइन पर कटरा से लेकर ऐगवां तक और सीतापुर ब्रांच लाइन पर रोजा से महोली तक एक दर्जन डिरेलमेंट हो चुके हैं, जबकि सभी स्थानों पर बोगियां और वैगन उस वक्त बेपटरी हुए जब इंजन की रफ्तार बेहद सीमित थी। इन घटनाओं के बाद भी रेलवे ट्रैकों के रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। हालांकि, रेल अफसरों का कहना है कि अभी कई जगह इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा नहीं होने से बिजली के इंजन चल नहीं पा रहे।
अधिकारियों के अनुसार रिलायंस तापीय परियोजना की सात किमी लंबी साइडिंग का पं. रामप्रसाद बिस्मिल नगर स्टेशन तक विद्युतीकरण का काम गत 13 अक्तूबर से शुरू हो पाया। इसके अलावा रामपुर के आगे मूढ़ा पांडे, दलपतपुर और कटघर में यह काम जारी है। चूंकि, यह काम अगले वर्ष 31 मार्च तक पूरे होने हैं। इसलिए उससे पहले इलेक्ट्रिक ट्रेनें चल पाने की कोई संभावना नहीं है।


‘डिरेलमेंट तात्कालिक खामियों का नतीजा होते हैं। ट्रेनें बेपटरी होने का इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन से कोई सरोकार नहीं। रोजा से लखनऊ तक इलेक्ट्रिक इंजन को 120 किमी की स्पीड से दौड़ाकर ट्रैक जांचा जा चुका है। जब तक तापीय परियोजना की साइडिंग और मुरादाबाद के समीपवर्ती स्टेशनों पर इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा नहीं होता, बिजली की ट्रेनें चलना संभव नहीं।’
-ओमशिव अवस्थी, स्टेशन अधीक्षक, पं. रामप्रसाद बिस्मिल नगर
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