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गुलाम अली, जगजीत ने गाई हैं साबिर की गजलें

Shahjahanpur

Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
गीतकार साबिर जलालाबाद से बातचीत
- बॉलीवुड में आज भी तलाशे जाते हैं साबिर जलालाबादी के गीत
अशोक द्विवेदी
जलालाबाद। बॉलीवुड को क्रांतिकारियों की नगरी शाहजहांपुर बहुत रास आ रही है। माया नगरी के हर क्षेत्र में अब यहां की प्रतिभाएं अपना परचम फहरा रही हैं। पटकथा से लेकर निर्माता-निर्देशक, बाल कलाकार अपनी प्रतिभा से जनपद का झंडा बुलंद किए हुए हैं। इसमें गीतकार के रूप में कसबा निवासी साबिर जलालाबादी भी शामिल हैं। साबिर जलालाबादी के गीत फिल्मों में तो छाए हुए ही हैं, साथ उनकी गजलों को गजल सम्राट गुलाम अली, जगजीत सिंह, मुन्नी बेगम, अनूप जलोटा आदि भी आवाज दे चुके हैं।
अपने गीताें और गजलों से देश-विदेश में शोहरत हासिल करने वाले साबिर कस्बा के मोहल्ला यूसुफजई के बाशिंदे हैं। साबिर को यह हुनर अपने पिता अली खां से विरासत में मिला है। अमर उजाला से खास बातचीत में साबिर जलालाबादी कहते हैं कि जब-तक शायर का दम न घुटे तब तक शायरी को सांस नहीं मिलती। परिवार की हालत खस्ता होने के बावजूद उन्होंने अपनी कला को मरने नहीं दिया। वह गीतों और गजलों के अलावा पेंटिंग का भी शौक रखते हैं।
साबिर आधुनिक विचाराें के तरक्की पसंद शायर हैं, इसलिए उनके गीत आज भी फिल्मों में पसंद किए जा रहे हैं। फिल्म साजन का गीत ‘बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम’ भला कौन भूल सकता है। मशहूर शायर इकबाल और साहिर लुधियानवी को अपना आदर्श मानने वाले साबिर की गजलों में आम आदमी का दर्द दिखाई देता है। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि गहरी से गहरी बात को भी बड़ी सहजता और सादगी से कह डालते हैं। लगभग 65 वर्ष की आयु से गुजर रहे साबिर आज भी पूरे जोश में दिखाई देते हैं। वह एक चित्रकार के रूप में पहचान बनाए हुए हैं।
साबिर जलालाबादी के गीत फिल्म ये मेरी जान, यह अग्नि में भी सुनाई पड़ेंगे। वह छह सौ से अधिक अलबम के लिए गीत लिख चुके हैं। उनकी गजल ‘मैं टूट जाऊंगा इस तरह मत उछाल मुझे, तेरे खयाल का आइना हूं जरा संभाल मुझे’ को गजल सम्राट गुलाम अली तथा ‘हम उनकी याद से दामन कभी बचा न सके, हजार भूलना चाहा, मर भुला न सके’ को जगजीत सिंह अपनी आवाज दे चुके हैं। इसके अलावा मुन्नी बेगम, रूप कुमार राठौर, अनूप जलोटा, शोभा जोशी आदि कलाकार भी उनके गीत और गजलें गा चुके हैं।
यह शेर भी साबिर का कद नापने को काफी है-
कभी तो पढ़ मुझे इस तरह छोड़ता क्यों है,
तेरी किताब का ही पन्ना हूं मोड़ता क्यों है।
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