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बिजली महंगी होने पर गरजे व्यापारी

Shahjahanpur

Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
आज दोबारा प्रदर्शन करके डीएम को सौंपेंगे ज्ञापन
- धरने के दौरान रात की कटौती बंद कराने की दोहराई मांग
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। बिजली की बढ़ी हुई दरों और त्योहारों के दौरान रात में होने वाली कटौती पर रोक नहीं लगाए जाने के विरोध में सोमवार को उद्योग व्यापार मंडल मिश्रा गुट के पदाधिकारियों ने कलक्ट्रेट गेट पर दो दिनी धरना शुरू कर दिया। इस मौके पर प्रदर्शन करके व्यापारी केंद्र सरकार पर गरजे, वहीं रात की कटौती के लिए शासन-प्रशासन को आड़े हाथों लिया।
धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह दुआ ने कहा: महंगाई वैसे ही चरम पर है। व्यापारी टैक्सों के बोझ से दबे हैं। ऊपर से औद्योगिक और वाणिज्यिक बिजली दरें बढ़ाए जाने से उत्पादकता लागत बढ़ेगी, जिससे महंगाई में और इजाफा होगा। दूसरी ओर 12 घंटे सप्लाई के नाम पर बिजली बमुश्किल तीन-चार घंटे देकर 24 घंटे के हिसाब से मिनिमम चार्ज लिया जा रहा है।
नगर अध्यक्ष अनिल गुप्ता ने कहा: प्रदेश में बिजली विभाग का जंगल राज व्यापारियों की सहन सीमा से बढ़ चुका है। जिला महामंत्री नाजिम खां ने कहा कि बिजली की दरें बढ़ाने से पहले विभाग अपने खोखले और सड़े सिस्टम में बदलाव लाए। नगर महामंत्री धर्मपाल रैना ने कहा: सरकार उद्योगों की बेहतरी के लिए बिजली उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दे। युवा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष ललित खुराना ने रात में कटौती बंद किए जाने का प्रस्ताव पारित कराया।
धरना-प्रदर्शन में राजीव गुप्ता, वेदप्रकाश रावत, मो. रफी, जुबैर खां, मनोज सक्सेना, जवाहर रस्तोगी, चंद्र प्रकाश गुलाटी, रवि खुराना, गोविंद गुप्ता, रमेश गुप्ता, सुशील गुप्ता, अमृत लाल, निरंकार सिंह, सुनील गुप्ता, अम्बुज सक्सेना, मो. आशिक, मोहीन खां, महेंद्र कुमार, इदरीस हसन, जितेंद्र कुमार, मुनव्वर अली आदि उपस्थित रहे।


आईआईए ने भी मिलाया सुर में सुर
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने भी औद्योगिक बिजली की दरें बढ़ाए जाने का कड़ा विरोध करते हुए सरकार के इस फैसले को सर्वथा अनुचित ठहराया है। आईआईए के अध्यक्ष रवि गोयल ने कहा: प्रतिस्पर्धा के इस युग में उद्योगों को बढ़ी हुई बिजली दरों केअपने उत्पाद बेचना मुश्किल हो जाएगा। लघु और मध्यम दर्जे के उद्योगों को पहले से ही आर्थिक संकटों से जूझना पड़ रहा है। बिजली की किल्लत से उद्योगों की पतली हालत भी किसी से छिपी नहीं है। ऐसा लगता है कि सरकार बिजली की दरें बढ़ाकर उद्योगों को बढ़ावा नहीं देना चाहती।
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