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आसान नहीं तहसीलों, छोटे नगरों को ज्यादा बिजली

Shahjahanpur

Updated Sat, 01 Sep 2012 12:00 PM IST
नए सब स्टेशन और लाइनें बनाने पर आएगी भारी लागत
- जलालाबाद और तिलहर में बनाने होंगे 132 केवी स्टेशन
- न्याय पंचायतों पर फीडर सृजित करके बढ़ाने होंगे ट्रांसफार्मर
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। तहसीलों और उनसे जुड़े छोटे-छोटे नगरों को ज्यादा बिजली देना उतना आसान नहीं, जितना कि पॉवर कारपोरेशन के नीति नियामक समझते हैं। पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की मौजूदा खामियां और इसके एवज में मिलने वाली अन्य तमाम दुश्वारियां झेल रहे विभागीय अभियंताओं का मानना है कि सूबे के छोटे शहरों का बिजली कोटा बढ़ाने को सरकार ने जो बजट राशि निर्धारित की, वह काम शुरू होने पर ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ साबित होगी।
बात अपने जिले के बिजली नेटवर्क पर करें तो यहां के अधिकांश गांव विभिन्न तहसील मुख्यालयों और उनसे जुड़े छोटे नगरों के फीडरों से जुड़े हैं। इसलिए तहसील मुख्यालयों और उनके कस्बों में रहने वालों की शिकायत रहती है कि सप्लाई को लेकर जिला मुख्यालयों की तुलना में उनसे सौतेला सुलूक होता है। इसमें काफी हद तक सच्चाई है और इसलिए प्रदेश सरकार ने इस विसंगति को दूर करने के लिए 1350 करोड़ रुपये की योजना बनाई है।
इसके तहत 290 तहसीलों और छोटे शहरों के फीडर गांवों से अलग करके 33 केवी के नए सब स्टेशन बनाने प्रस्तावित हैं, लेकिन महकमे के अधिकारी कहते हैं कि मौजूदा नेटवर्क को योजना के सांचे में ढालने को बजट राशि कई गुना बढ़ानी पड़ेगी। बता दें कि विभिन्न मदों में भरपूर राजस्व देने वाली जलालाबाद और तिलहर तहसील मुख्यालयों पर अभी तक 132 केवी सब स्टेशन नहीं बन पाए हैं।
दोनों तहसीलों और उनके सैकड़ों गांवों का बिजली लोड जिला मुख्यालय पर 132 और 220 केवी के पॉवर स्टेशन ढो रहे हैं। हालांकि, 132 केवी के स्टेशन भी भरपूर बिजली देने की गारंटी नहीं रहे, क्योंकि नेटवर्क का मकड़जाल कहीं की बिजली और कहीं फेंक रहा है। पुवायां इसका उदाहरण है जहां के बड़ागांव में कुछ साल पहले 132 केवी स्टेशन बनने के बावजूद तहसील मुख्यालय समेत बंडा, खुटार, सिंधौली जैसे कसबों में बिजली संकट बरकरार है। यह संकट तभी टलेगा जब न्याय पंचायत मुख्यालयों पर गांवों के लिए फीडरों का जाल तैयार करने की कोशिश होगी। फिलहाल, विभाग को इस बावत ऊर्जा मंत्रालय से गाइड लाइन की प्रतीक्षा है।
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