आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

आसान नहीं तहसीलों, छोटे नगरों को ज्यादा बिजली

Shahjahanpur

Updated Sat, 01 Sep 2012 12:00 PM IST
नए सब स्टेशन और लाइनें बनाने पर आएगी भारी लागत
- जलालाबाद और तिलहर में बनाने होंगे 132 केवी स्टेशन
- न्याय पंचायतों पर फीडर सृजित करके बढ़ाने होंगे ट्रांसफार्मर
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। तहसीलों और उनसे जुड़े छोटे-छोटे नगरों को ज्यादा बिजली देना उतना आसान नहीं, जितना कि पॉवर कारपोरेशन के नीति नियामक समझते हैं। पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की मौजूदा खामियां और इसके एवज में मिलने वाली अन्य तमाम दुश्वारियां झेल रहे विभागीय अभियंताओं का मानना है कि सूबे के छोटे शहरों का बिजली कोटा बढ़ाने को सरकार ने जो बजट राशि निर्धारित की, वह काम शुरू होने पर ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ साबित होगी।
बात अपने जिले के बिजली नेटवर्क पर करें तो यहां के अधिकांश गांव विभिन्न तहसील मुख्यालयों और उनसे जुड़े छोटे नगरों के फीडरों से जुड़े हैं। इसलिए तहसील मुख्यालयों और उनके कस्बों में रहने वालों की शिकायत रहती है कि सप्लाई को लेकर जिला मुख्यालयों की तुलना में उनसे सौतेला सुलूक होता है। इसमें काफी हद तक सच्चाई है और इसलिए प्रदेश सरकार ने इस विसंगति को दूर करने के लिए 1350 करोड़ रुपये की योजना बनाई है।
इसके तहत 290 तहसीलों और छोटे शहरों के फीडर गांवों से अलग करके 33 केवी के नए सब स्टेशन बनाने प्रस्तावित हैं, लेकिन महकमे के अधिकारी कहते हैं कि मौजूदा नेटवर्क को योजना के सांचे में ढालने को बजट राशि कई गुना बढ़ानी पड़ेगी। बता दें कि विभिन्न मदों में भरपूर राजस्व देने वाली जलालाबाद और तिलहर तहसील मुख्यालयों पर अभी तक 132 केवी सब स्टेशन नहीं बन पाए हैं।
दोनों तहसीलों और उनके सैकड़ों गांवों का बिजली लोड जिला मुख्यालय पर 132 और 220 केवी के पॉवर स्टेशन ढो रहे हैं। हालांकि, 132 केवी के स्टेशन भी भरपूर बिजली देने की गारंटी नहीं रहे, क्योंकि नेटवर्क का मकड़जाल कहीं की बिजली और कहीं फेंक रहा है। पुवायां इसका उदाहरण है जहां के बड़ागांव में कुछ साल पहले 132 केवी स्टेशन बनने के बावजूद तहसील मुख्यालय समेत बंडा, खुटार, सिंधौली जैसे कसबों में बिजली संकट बरकरार है। यह संकट तभी टलेगा जब न्याय पंचायत मुख्यालयों पर गांवों के लिए फीडरों का जाल तैयार करने की कोशिश होगी। फिलहाल, विभाग को इस बावत ऊर्जा मंत्रालय से गाइड लाइन की प्रतीक्षा है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

easy tehsils

स्पॉटलाइट

इसी 'हीरोइन के प्यार में' सलमान का हो गया था 'ऐसा हाल', एक ही फिल्म से रातोंरात बन गई थी स्टार

  • गुरुवार, 22 जून 2017
  • +

पटौदी खानदान की इस बेटी के बारे में नहीं जानते होंगे, संभालती है 2700 करोड़ की विरासत

  • गुरुवार, 22 जून 2017
  • +

पति से भी ज्यादा अमीर हैं बॉबी देओल की पत्नी, फर्नीचर का बिजनेस कर बनी करोड़पति

  • गुरुवार, 22 जून 2017
  • +

ग्रेजुएट्स के लिए Delhi Metro में नौकरी, 50 हजार सैलरी

  • गुरुवार, 22 जून 2017
  • +

किस्मत बिगाड़ देते हैं घर में सजावट के लिए रखे पत्थर, जानें कैसे?

  • गुरुवार, 22 जून 2017
  • +

Most Read

मानवता शर्मसार: ठेले पर मेडिकल कॉलेज भेजे गए दो शव

Dead bodies are again taken on thela
  • शनिवार, 17 जून 2017
  • +

कश्मीर में उपजे तनावपूर्ण हालात, हिंसक प्रदर्शनों की आशंका में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

speculation of voilance in kashmir valley
  • शुक्रवार, 16 जून 2017
  • +

शहर में ट्रैफिक जाम और पार्किंग की कमी से मिलेगी राहत

People feel good in solan soon to get a new parking
  • रविवार, 18 जून 2017
  • +

8वीं बोर्ड का आया परिणाम,गुरुवार को आएगा 10वी बोर्ड का रिजल्ट

rajasthan board declared 8th board result
  • बुधवार, 7 जून 2017
  • +

आज 4 बजे जारी होगा 10वीं का परिणाम, सबसे पहले यहां देखिए अपना रिजल्ट

rajasthan board 10th class result to be declared on june 8
  • गुरुवार, 8 जून 2017
  • +

संदीप दीक्षित ने आर्मी चीफ को कहा 'गुंडा', फिर मांगी माफी

 Congress leader Sandeep Dikshit says army chief general bipin rawat a sadak ka gunda
  • सोमवार, 12 जून 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top