आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

सेंट मेरी चर्च से बजा था 1857 क्रांति का बिगुल

Shahjahanpur

Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
31 मई को कई अंग्रेज अधिकारियों की हुई थी अंतिम प्रार्थना
- क्रांतिवीरों की तलवारों ने पीया था अंग्रेज अधिकारियों का खून
- आज भी यह चर्च जीएफ कॉलेज के सामने खड़ा है
डॉ. नानक चंद्र मेहरोत्रा
शाहजहांपुर। बात 31 मई, 1857 की है। समय यही कोई सुबह सात-साढे़ सात बजे का रहा होगा, जब कुछ अंग्रेज अधिकारी कैंट क्षेत्र में बने सेंट मेरी चर्च में प्रार्थना के लिए जुटे थे। इसकी जानकारी क्रांतिकारियों को पहले से ही थी। एक प्लानिंग के तहत जवाहर रॉय के नेतृत्व में कुछ क्रांतिवीर या यूं कहें कि विद्रोही सैनिकों ने इस दिन चर्च पर हमला बोल दिया। अचानक हुए हमले से अंग्रेज अधिकारी कुछ समझ ही नहीं पाए और इससे पहले कि वे वहां से भागकर अपनी जान बचा पाते, क्रांतिवीरों के एक जत्थे ने उन पर लाठियों और तलवारों से आक्रमण कर दिया। इसमें कई अंग्रेज अधिकारी हताहत हो गए। शाहजहांपुर में यहीं से क्रांति का बिगुल बजा।
इस कांड को अमलीजामा पहनाने में जवाहर रॉय के साथ गंगा दुबे, महादेव, राम नारायण दुबे, बिंद्रा सिंह, रामाधीन, नारायण पांडेय, ननकू, शिवचरण सिंह समेत लगभग दो दर्जन क्रांतिवीर शामिल थे। इन लोगों के चर्च में प्रवेश करते ही वहां भगदड़ मच गई। महिलाएं बच्चों को लेकर एक कमरे में घुस गईं और उन्होंने कमरा बंद कर लिया। विद्राही कमरे का दरवाजा नहीं तोड़ पाए। सबसे पहले चर्च का चैपलेन बाहर निकला था, जिसे देखकर एक सैनिक ने उस पर तलवार का ऐसा वार किया कि उसका एक हाथ कटकर दूर जा गिरा।
इसके बाद नगराधीश एम रिकेट बेस्ट्री के दरवाजे से बाहर निकले ही थे कि जवाहर रॉय की तलवार उन पर टूट पड़ी और वे वहीं पर ढेर हो गए। इस क्रांति में कमांडिंग ऑफीसर कैप्टन जेम्स, जे मैक्कलम, स्मिथ, सर्जन एचएच बाउलिंग आदि की भी जीवन लीला खत्म हो गई।
जीएफ कॉलेज के सामने बने इस चर्च का निर्माण 1837 में बरेली के चैपलेन ने कराया था। बताया जाता है कि वर्ष 1813-14 में जब शाहजहांपुर को नए जिले की मान्यता मिली तब यहां कोई चर्च नहीं था। यह भी बताया जाता है कि श्याम बेनेगल की फिल्म ‘जुनून’ इसी पृष्ठभूमि पर बनी थी। घटना के बाद यहां प्रार्थना बंद हो गई। इसके बाद 1860 में बिशप काटन के प्रयासों से चर्च में पुन: प्रार्थना शुरू हुई।
(जैसा कि इतिहासकार ने बताया)
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

आईफोन 6 पर मिल रही है 26,000 रुपये की छूट

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

'बहन होगी तेरी' की रिलीज डेट आई सामने

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

'सरकार 3' के लुक पर बोले बिग बी 'मजाक कर रहा हूं'

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

खाने के बाद मीठे की तलब? कहीं बना ना दे आपको बीमार

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

जियो फ्री में दे रहा है 100GB डाटा, करना होगा यह काम

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

Most Read

लालू ने ट्विटर पर निकाली भड़ास, कहा- 'मोदी तुम्हारे फूफा हैं?'

lalu asks sushil modi is rk modi your relative
  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

यूपी डीजीपी का पद छोड़ते वक्त ये ट्वीट कर गए जावीद अहमद, आपने पढ़ा?

javeed ahmed tweets before leaving the post of UP dgp
  • शनिवार, 22 अप्रैल 2017
  • +

3 हजार ईंट लेकर पहुंचे मुस्लिम, बोले- बनाओ राममंदिर

muslims reach ayodhya with 3000 bricks for ram temple construction
  • शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017
  • +

योगी सरकार का गरीबों को एक और तोहफा, अब मई से दोगुना मिलेगा...

The Yogi Government's gift to the poor, now it will double in May ...
  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

कृष्ण के युग में भी थी कैशलेस व्यवस्था, CM योगी ने दिया ‘सुबूत’

cm yogi promotes cashless system
  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

योगी सरकार ने की आजम खां की सुरक्षा में कटौती

 UP govt reviews security of leaders.
  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top