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धान की फसल में खरपतवार मुसीबत

Shahjahanpur

Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
उपचार के अभाव में उत्पादकता घटने की आशंका
- गीले खेतों में निराई करने से खराब हो सकती है पौध
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। मानसून की अपर्याप्त बारिश से परेशान किसानोें को देर-सवेर धान की पौध रोपने के बाद अब खेतों में तेजी से बढ़वार ले रहे खरपतवारों की नई मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। फसल के साथ पनप रही अवांछित वनस्पतियों की रोकथाम नहीं होने पर औसत उत्पादकता पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। किसानों की मुश्किल यह है कि पानी भरे रहने के कारण गीले खेतों में निराई कैसे हो, क्योंकि ऐसी दशा में पौध खराब होने का डर है।
जिले में करीब सात लाख किसान हैं, जिनमें से कम जोत वाले अधिसंख्य छोटे किसान सीमित संसाधनों वाले होने के कारण सिंचाई के लिए मानसूनी बारिश पर निर्भर करते हैं। यही नहीं, खेती में नई फसलों के प्रयोग से जुड़े खतरों का सामना करने के बजाय रबी सीजन में गेहूं, चना, मटर और खरीफ में धान, गन्ना की पारंपरिक उपजें लेने में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं। फसल तैयार होने के दौरान कीटनाशकोें पर होने वाला खर्च बचाने के लिए खरपतवार नियंत्रण को पांरपरिक निराई पद्घति इस्तेमाल करना उनकी मजबूरी है।
इस बार मानसून की भरपूर बारिश नहीं होने से तमाम किसानों को धान पौध रोपने में एक से दो हफ्ते की देरी हो गई। अब वायुमंडल में बढ़ी आर्द्रता से खरपतवार भी तेजी से पनप रहे हैं। खेतों में घुसकर निराई करना इसलिए संभव नहीं हो पा रहा क्योंकि उनमें लंबे समय तक पानी भरा रहने मिट्टी चिपचिपी और दलदली है। ऐसे में निराई करने पर बोई गई पौध नष्ट होने का खतरा है। इसीलिए कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को विभिन्न रसायनोें के छिड़काव की सलाह दे रहे हैं।



‘इन दिनों धान के खेतों में निराई व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। मामूली घास रोकने के लिए प्रति एकड़ एक लीटर ब्यूटाक्लोर, 500 मिली प्रटोलाक्योर, 400 मिली एनीलोफॉस अथवा विवाइरोविक सोडियम का निश्चित समयावधि के अंदर छिड़काव करना उचित होगा। चौड़ी पत्ती के खरपतवार नष्ट करने को आठ ग्राम मेट सल्फ्यूरॉन मिथाइल अथवा 300 मिली 2-4 डी रसायन इस्तेमाल किया जा सकता है। चिपचिपे खेत में स्प्रे के24 घंटे बाद पानी भर देने से अवांछित घास का सफाया हो जाएगा।’
-डॉ. केएम सिंह, शस्य वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
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