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बिजली संकट को लेकर मचा त्राहिमाम

Shahjahanpur

Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों का बुरा हाल
- कारोबार हुआ चौपट, घरों में हुआ पानी का संकट
- डीजल व्यय हो गया दो गुना, सीएमएस परेशान
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। कटौती से उपजा बिजली संकट शहरी लोगों के लिए कोई नई बात नहीं है, लेकिन चिपचिपाती गर्मी में लगातार दो दिन तक ग्रिड फेल होने से पैदा हुई बिजली किल्लत इससे पहले कभी नहीं झेली। घर हो या बाजार या फिर सरकारी अस्पताल, ऐसा कोई ठिकाना नहीं बचा जहां लोग बिजली को लेकर त्राहि-त्राहि न कर रहे हों।
कुछ घंटे की कटौती के साथ जुड़ी बत्ती आने की उम्मीद लोगों का काफी दर्द सह लेती है, लेकिन ग्रिड फेल होने पर बिजली संकट लंबा खिंचने के आसार बनते देख मायूसी पनपना स्वाभाविक है और वह समाज के सभी वर्गों के चेहरे पर चस्पा नजर आ रही है। जेट पंप और सबमर्सिबल बंद होने से पानी की टंकियां खाली हो गईं। घरों मेें पेयजल संकट गहराने के साथ सार्वजनिक हैंड पंपों पर बाल्टियां-केन उमड़ने लगी हैं। पानी की बरबादी करने वाले लोग भी किफायत से काम चला रहे हैं।
ग्रहणियों की किचन टाइमिंग भी बदल गई है। दिन ढलने से पहले खाना पका लेने की जल्दबाजी है क्योंकि रात में बत्ती आने की गारंटी नहीं और इनवर्टर सारी बैटरी चूसकर दम साधे पड़ा है। बाजारों में भी शाम के बाद पहले जैसी चहल-पहल नहीं है। ग्राहक घटने से कारोबारी भी ज्यादातर फुर्सत के अंदाज में दिख रहे हैं। खलीलशर्की स्थित कन्फैक्शनरी शॉप अग्रवाल ब्रदर्स के संचालक पवन अग्रवाल के अनुसार आइसक्रीम और बेकरी आइटम का काफी नुकसान हो रहा है।
व्यापार मंडल मिश्रा गुट के जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह दुआ कहते हैं: बिजली ही जीवन है क्योंकि आज के जमाने की सचाई भी यही है। ग्रिड फेल होने से व्यापार चौपट हो गया। उधर, जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों और तीमारदारों का बुरा हाल है। वार्डों के पंखे ज्यादातर बंद रहते हैं। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, इमर्जेंसी, आप्रेशन थियेटर आदि आवश्यक सेवाएं 125 केवीए के बड़े जेनरेटर से दी जा रही हैं। ओपीडी बंद होने के बाद 50 केवी के छोटे जेनरेटर का इस्तेमाल हो रहा, लेकिन बिजली के अकाल से डीजल खपत काफी बढ़ गई है।
सीएमएस डॉ. डीके सोनकर के अनुसार आमतौर पर 60-70 हजार रुपये मासिक डीजल पर खर्च होता है, लेकिन बिजली का यही हाल रहा तो आंकड़ा 1.5 लाख को पार कर जाएगा।
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