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दूसरे दिन भी नहीं चलीं स्कूल वैन

Shahjahanpur

Updated Sat, 28 Jul 2012 12:00 PM IST
स्कूलों में छोटे बच्चों की कर दी गई अनिश्चितकालीन छुट्टी
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। एक तो चोरी और ऊपर से सीना जोरी। यह कहावत तो सभी ने सुनी होगी। विभिन्न स्कूलों में बच्चों को लाने और उन्हें वापस घर पहुंचाने का काम करने वाले वैन संचालकों की स्थिति आजकल यही हो रही है। उनको सह देने का काम कर रहे हैं प्राइवेट स्कूल संचालक। दोनों को न तो बच्चों से कोई सरोकार है और न ही अभिभावकों की परेशानी से। यही कारण रहा कि शुक्रवार को भी वैन संचालकों ने छोटे बच्चों को स्कूल लाने की जहमत नहीं उठाई। जब अभिभावक वैन के नियत स्थान पर खड़े-खड़े थक गए तो वे स्वयं बच्चों को लेकर स्कूल पहुंच गए। वहां उन्हें पता चला कि स्कूल में इन बच्चों की छुट्टी कर दी गई है।
उल्लेखनीय है कि वैन संचालक जर्जर वाहनों में अंधाधुंध बच्चों को भर लेते हैं। इनके पास स्कूल वाहन का परमिट भी नहीं है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एआरटीओ ने अभियान चलाकर जब चेकिंग शुरू की तो वाहन चालकों के पास न तो गाड़ी के कागज निकले और न ही कोई मानक पूरे कर रहा था। इस पर कुछ गाड़ियों के चालान काट दिए गए। चालान होने से वाहन संचालकों ने हड़ताल कर दी। कल 26 जुलाई को हड़ताल के कारण स्कूलों मेें अभिभावकों का तांता लग गया और रोड जाम हो गई। इसका खामियाजा आम नागरिकों को भी भुगतना पड़ा।
स्कूल संचालकों ने एआरटीओ से वार्ता कर कुछ मोहलत मांगी। एआरटीओ ने एक सप्ताह का समय देकर मानक पूरे करने के निर्देश दिए। यह निर्देश भी वाहन संचालकों को रास नहीं आए और उन्होंने आज दूसरे दिन भी छोटे बच्चों को स्कूल नहीं पहुंचाया। खास बात यह रही कि बच्चों की छुट्टी की सूचना स्कूलों की ओर से अभिभावकों को नहीं दी गई। उन्हें छुट्टी की जानकारी स्कूल पहुंचने पर हुई। वहां नोटिस बोर्ड पर यह सूचना अंकित थी।


‘स्कूल संचालक फीस के लिए तो मैसेज भेजकर सूचना दे देते हैं, लेकिन छुट्टी की सूचना नहीं देते, जबकि उनके पास मोबाइल नंबर पहले से ही होेते हैं। गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी वैन बच्चों को लेने नहीं आई। यह व्यवस्था बहुत खराब है। हम पैसा देते भरपूर देते हैं, फिर वैन को आना ही चाहिए। छुट्टी कोई समस्या का समाधान नहीं है।’
- डॉ. रेशू अग्रवाल, अभिभावक


‘हड़ताल नहीं की। एआरटीओ ने मानक पूरे करने को कहा और गाड़ी का चालान कर दिया। उस समय गाड़ी के कागज घर पर थे। मानक पूरे करने में खर्चा बहुत अधिक है। हम लोग छोटी पूंजी से गुजारा कर रहे हैं। कैसे खर्च उठा सकते हैं। स्कूल संचालक को पूरी बात बता दी थी। उन्होंने एआरटीओ से बात भी की थी। अब बच्चों का किराया बढ़ाना पड़ेगा, तभी परमिट का खर्च उठाया जा सकता है।’
- राजेंद्र, वैन संचालक
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