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तत्काल टिकट दिलाने में अब दलाल फेल

Shahjahanpur

Updated Fri, 13 Jul 2012 12:00 PM IST
रिजर्वेशन सेक्शन के अफसरों ने लागू कर रखा है टोकन सिस्टम
- दो काउंटरों से सिर्फ 37 मिनट में जारी हो गए सभी टिकट
अनूप वाजपेयी
समय: पूर्वांह 9:55 बजे।
स्थान: उत्तर रेलवे का कंप्यूटरीकृत आरक्षण कार्यालय।
सुबह के दस बजने वाले हैं यानी रेलवे के तत्काल टिकटों की बुकिंग का समय। काउंटर नंबर 724 पर बुकिंग क्लर्क एसके शुक्ला और 725 पर श्रीमती अनुराग भारद्वाज कंप्यूटरों पर तत्काल सेवा के कन्फर्म टिकटों का कोटा चेक करती हैं। आफिस के बाहरी हिस्से में दोनों काउंटरों पर लाइन लगाए यात्रियों में खिड़कियां खुलने को लेकर बेताबी बढ़ रही है।
इसी बीच, वहां पहुंचे वाणिज्य निरीक्षक डीएन सिंह और आरक्षण पर्यवेक्षक जेके आर्य धक्का-मुक्की कर रहे यात्रियों को टिकट मिलने का भरोसा देने के साथ उनकी आईडी चेक करके यह सुनिश्चित करते हैं कि लाइन में कोई अवांछित व्यक्ति न खड़ा हो। इसके लिए दोनों अधिकारी कतारबद्घ लोगों को नंबर एलाट कर देते हैं जिससे कि लाइन में लगे लोगों के बीच कोई अन्य व्यक्ति अनधिकृत तरीके से घुसपैठ न कर सके।
दस बजते ही दोनों बुकिंग क्लर्क खिड़कियां खोलकर टिकट जारी करने का काम शुरू करते हैं। दोनों काउंटरों की लाइनों में बमुश्किल पचास यात्री लगे हैं, लेकिन खिड़कियों की ओर सरकने के साथ उनकी टिकट पाने की उत्कंठा बढ़ती जा रही है। रिजर्वेशन सुपरवाइजर श्री आर्य घड़ी की ओर इशारा करते हुए यह कहकर संयम बनाए रखने का अनुरोध करते हैं कि अभी बहुत समय है।
अचानक एक साहब लाइन को कंधे से धकियाते हुए काउंटर की ओर बढ़ते हैं। सुपरवाइजर श्री आर्य उन्हें टोकते हैं: अरे! आप आगे कहां घुसे जा रहे हैं। जवाब मिला: आठ नंबर दिया गया, लेकिन बीच में एक काम आ जाने से टिकट लिए बगैर लाइन से हटना पड़ा। टोकन नंबर से इस बात की तस्दीक करने के बाद रेल अधिकारी खिड़की पर जा पहुंचे व्यक्ति को टिकट लेने की अनुमति देते हैं।
लाइन में पीछे खडे़ एक साहब बुकिंग की धीमी रफ्तार पर सवाल करते हैं। कामर्शियल इंस्पेक्टर श्री सिंह सभी को सुनाने की गरज से थोड़ा तेज स्वर में कहते हैं: आईडी प्रूफ चेक करने और इंटरनेट पर ट्रेनों के रिजर्वेशन का ब्यौरा लेने में थोड़ा वक्त तो लगता ही है। तसल्ली रखिए, सभी को टिकट मिलेगा। फिर हमारी ओर मुखातिब होकर फुसफुसाए: आज सर्वर भी थोड़ा डाउन चल रहा है, लेकिन डेढ़ घंटा बाकी है।
इसी दौरान जनरल रिजर्वेशन कराने वाले कुछ लोग लाइन में पीछे आ जाते हैं। उन्हें यह कहकर पीछे हटने का निर्देश दिया जाता है कि तत्काल बुकिंग बंद होने के बाद ही सामान्य आरक्षण होंगे। पीछे वालों की बेताबी बढ़ती देख श्री आर्य को फिर समझाना पड़ा। बोले: दोनों लिपिक अपने मोबाइल बाहर रखकर सिर्फ आप लोगों के काम में जुटे हैं। ठीक 10.37 बजे बुकिंग क्लर्क श्री शुक्ला तत्काल टिकटों का कोटा खत्म होने की जानकारी देकर जनरल रिजर्वेशन शुरू कर देते हैं। दो-चार लोगों को निराशा हाथ लगती है। उन्हें कल आने की सलाह देकर रेल अधिकारी अपने आफिस की ओर कूच कर जाते हैं।



‘पहले दलालों के लाइन में लगने से तत्काल टिकट आसानी से नहीं मिलते थे। अब ऐसी कोई समस्या नहीं क्योंकि देवरिया का टिकट आसानी से मिल गया।’
-दुष्यंत कुमार, मालगोदाम रोड



‘तत्काल सेवा का समय बदला जाना नौकरीपेशा लोगों के लिए सुविधाजनक नहीं। अब दस बजे खिड़की खुलने से छुट्टी लेकर टिकट बुक कराना पड़ा।’
-अवधेश कुमार सक्सेना, चिलौआ, अल्हागंज


‘तत्काल सेवा की टाइमिंग चेंज हो जाने से सामान्य आरक्षण कराने वाले मुझ जैसे लोगों को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। लाइन में पहले भी लगना पड़ता था।’
-मोहम्मद फईम, बाबूजई

‘अभी लोगों को तत्काल सेवा के समय में बदलाव की जानकारी नहीं हो पाई है। मुझे पता होता तो जनरल रिजर्वेशन कराने के लिए आधा घंटा देर से आता।’
-अंकित गुप्ता, सदर बाजार



चूहों ने ठप कर दी
रेलवे की डिस्प्ले स्क्रीन
शाहजहांपुर। केवल घरों में ही नहीं, रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाओं पर भी चूहों का आतंक हावी हो चला है। इसी वजह से आरक्षण कार्यालय के बाहर गाड़ियों की अद्यतन जानकारी देने को लगाई गई डिस्प्ले स्क्रीन बुधवार रात से ठप हो गई।
रिजर्वेशन आफिस के बाहर बुकिंग काउंटरों के ठीक ऊपर कुछ माह पहले ही डिस्प्ले स्क्रीन लगाकर उसे इनक्वॉयरी सेक्शन से कनेक्ट किया गया था। इसे लगाने का मकसद यह रहा कि यात्री अप और डाउन श्रेणी की ट्रेनोें के लेट होने की विजुअल इनक्वायरी कर सकें और पूछताछ खिड़की पर पैसेंजर का दबाव घटे। इसका यात्रियों को लाभ भी मिला, लेकिन बीती शाम चूहों ने उसकी वायरिंग कुतर डाली। नतीजे में स्क्रीन पर ट्रेनों की जानकारी मिलनी बंद हो गई। रिजर्वेशन सुपरवाइजर जेके आर्य के अनुसार स्क्रीन चालू करने के लिए मुरादाबाद से तकनीशियन बुलाए गए हैं।
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