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पहली बारिश धान की रोपाई को अपर्याप्त

Shahjahanpur

Updated Sat, 07 Jul 2012 12:00 PM IST
खेतों ने सोख लिया गुरुवार की रात हुई बारिश का पानी
0 रोपाई का काम पिछड़ने से पौध खराब होने की आशंका
0 झमाझम बारिश का इंतजार, खाली पड़े हैं 95 फीसदी खेत
अनूप वाजपेयी
शाहजहांपुर। लंबे इंतजार के बाद अंतत: मानसूनी मेघ जिले पर बरस ही गए, लेकिन सीजन की पहली बारिश धान की रोपाई को अपर्याप्त साबित हुई। दरअसल, गुरुवार रात हुई बरसात का सारा पानी गेहूं कटने के बाद से प्यासे खेतों ने सोख लिया। अगर बरसात ने जल्द रफ्तार नहीं पकड़ी तो रोपाई का काम पिछड़ जाएगा और ऐसी दशा में बुवाई को खेतों में तैयार पौध भी खराब हो सकती है।
बता दें कि जिले में इस वर्ष 1.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल लेने का लक्ष्य तय किया गया है। यह काम मानसून की चाल सामान्य होने की दशा में बहुधा जून के अंतिम सप्ताह से शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार बारिश के तरसाने से रोपाई पिछड़ रही है। हाल यह है कि अभी तक सिर्फ दस हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान रोपा जा सका जो कुल रकबा का 5.18 फीसदी है। बाकी खेत झमाझम बारिश के इंतजार में खाली पड़े हैं।
रोपाई का काम लेट हो जाने से उन सभी किसानों की जान सांसत में पड़ गई है जिन्होंने रोपाई के लिए बेड़ (पौध) एक से डेढ़ माह पहले डाल दी थी। इन दिनों तैयार पौध का एक सप्ताह के अंदर रोपण नहीं होने की दशा में वह रोपाई लायक नहीं रहेगी। वर्षा टलने की दशा में किसानों के सामने खेतों में लगाने को पौध का संकट भी गहरा सकता है।


‘मानसून आ चुका है और पहले चरण की बारिश के बीच एक-दो दिन का अंतराल संभव है। फिलहाल, किसानों के सामने कोई चिंताजनक स्थिति नहीं है। अगर 15 जुलाई तक ट्रांस प्लांटिंग शुरू हो जाती है तो भी काम समय से शुरू समझें। व्यापक वर्षा जल्द होने के आसार हैं।’
-अखिलानंद पांडेय, जिला कृषि अधिकारी

‘किसानोें को चरणबद्घ तरीके से आठ-दस दिन का गैप देते हुए कई बार पौध तैयार करनी चाहिए। एक माह और इससे पहले की पौध इस्तेमाल करने से उत्पादन प्रभावित होगा। इसलिए आने वाले दिनों मेें बाद वाली पौध इस्तेमाल हो तो बेहतर रहेगा।’
-डॉ. केएम सिंह, शस्य वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र


बारिश से लोगों के चेहरे
खिले, 18 मिमी. रिकार्ड
शाहजहांपुर। ग्रीष्म ऋतु की गुरुवार की रात हुई पहली बारिश से लोगों के चेहरे खिले उठे। इससे लोगों को जहां गर्मी से राहत मिली वहीं फसलों केलिए भी यह बारिश खासी लाभकारी है। गन्ना शोध परिषद के सहायक वैज्ञानिक एसपी सिंह ने बताया कि पिछले चौबीस घंटों के दौरान 18 मिमी. बारिश रिकार्ड की गई है। उन्होंने इस बारिश को सभी फसलों के लिए काफी लाभदायक बताया है।
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