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बादलों की घेराबंदी तो रही, लेकिन बरसे नहीं

Shahjahanpur

Updated Wed, 04 Jul 2012 12:00 PM IST
आषाढ़ के अंतिम दिन तक इंद्रदेव ने मोड़ा मुंह
- सोमवार को चली पुरबा हवाओं ने बारिश की बढ़ाई थी उम्मीदें
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। आषाढ़ माह के आखिरी दिन तक लोग बारिश की बाट जोहते रहे लेकिन इंद्रदेव ने आज भी अपना मुंह मोड़े रखा। कल रात से चली पुरबा हवाओं से यह अनुमान लगने लगा था कि बारिश होगी और सुबह से ही आसमान में बादलों का घेरा भी छाया रहा। हवाएं भी ठंडी चलीं, लेकिन आसमान से पानी की एक बूंद नहीं गिरी, जिससे लोगों को खासी मायूसी हुई हालांकि ठंडी हवाओं के चलने से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली।
मंगलवार को पारा भी गिरकर अधिकतम 32.5 पर पहुंच गया, लेकिन रात न्यूनतम पारा बढ़कर 30.0 डिग्री पर पहुंच गया, जिससे दिन के साथ रात भी काफी गर्म रही। आर्द्रता भी बढ़कर दिन में 66 और शाम को 81 फीसदी तक पहुंच गई। देर शाम तक आसमान में बादल छाने से यह उम्मीद बंधी रही कि बारिश होगी लेकिन आषाढ़ के खत्म होने के साथ ही बारिश केआसार भी खत्म हो गए।



पुरबा हवा के चलने से मौसम के रुख में बदलाव तो आया है। इससे बारिश के आसार बने हैं। भले ही बारिश थोड़ा लेट हुई हो लेकिन हवाओं के चलने से भीषण गर्मी से लोगों को राहत जरूर मिली है। जिस तरह से आसमान में बादलों की घेराबंदी हो रही है। उससे बारिश के जल्द आसार भी नजर आ रहे हैं।
- एसपी सिंह, सहायक वैज्ञानिक गन्ना शोध परिषद।



चीटियां बता देती थीं कब होगी बारिश
पुराने समय में आज के जैसी वैज्ञानिक सुविधाएं नहीं थीं। जिससे मौसम का पूर्वानुमान लगाया जा सके। तब लोग जीव जंतुओं, पक्षियों के व्यवहार से बारिश और सूखे का अनुमान लगा लेते थे। यदि चीटियां अंडे लेकर ऊंचे स्थानों की ओर जाती दिखाई देती थीं तो समझा जाता था कि जल्द ही बारिश होने वाली है। जिससे बचने के लिए चीटियां अंडो को सुरक्षित स्थान पर ले जा रही हैं। इसके अलावा मेढकों के शोर से भी बारिश जल्द होने का अनुमान लग जाता था। बारिश होने पर यदि बुलबुले बड़े बनते दिखाई देते थे तो समझा जाता था कि बारिश ज्यादा होगी।
- अजयपाल सिंह, खुटार



घाघ और भड्डरी की कविताएं
भी करती थी पूर्वानुमान में मदद
पुराने समय में पशु पक्षियों से मौसम का पूर्वानुमान तो लगता ही था। पुराने समय के कवियों की कहावतें भी मौसम का अनुमान लगाने में बड़ी मदद करती थीं। जैसे शुक्रवार की बादरी रही शनीचर छाय।
तो यों भाखै भड्डरी बिन बरसे ना जाय।
और सावन पहिले पाख में दसमी रोहिनी होय,
महंग नाज अरू स्वल्प जल, बिरला बिलसै कोय।
अर्थात श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में दसमी तिथि को रोहिणी हो तो समझ लेना चाहिए कि अनाज महंगा होगा और वर्षा बेहद कम होगी। बहुत कम लोग ही सुखी होंगे।
- राजेंद्र प्रसाद त्रिवेदी, मोहनपुर



पुराने समय में टोने
टोटके आते थे काम
पुराने समय में मौसम का पूर्वानुमान लगाने के लिए तमाम कहावतें आदि प्रचलित थीं। मसलन यदि चंद्रमा के चाराें ओर सफेद सा घेरा बेहद नजदीक दिखे तो समझा जाता था कि बारिश जल्द ही होने वाली है। इसके अलावा रात में मौसम ठंडा और दिन में बदली होने से समझा जाता था कि बारिश नहीं होगी। बारिश नहीं होने पर तमाम टोने टोटके भी किए जाते थे। बदली होने पर यदि मौसम ठंडा हो जाता था तो बुजर्ग कहते थे कि बारिश नहीं होगी। इसके विपरीत बादल होने और मौसम गरम होने पर बारिश होने की भविष्यवाणी की जाती थी जो अक्सर सच होती थी।
- सरदार पाल सिंह, भोपतपुर
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