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यूरिया किल्लत समाप्त होगी

Sant kabir nagar

Updated Sun, 09 Dec 2012 05:30 AM IST
संतकबीरनगर। जनपद की 83 समितियों में से सिर्फ 52 समितियाें को ही बैंक के जरिए वित्तपोषित किया गया। जबकि 15 समितियां वित्तपोषित न होने से बंद हो गई हैं। 16 समितियों के सचिव किसानों से सहयोग लेकर खाद-बीज का उठान कर रहे हैं। फिर भी हालात यह है कि मौजूदा समय में किसी भी समिति के पास यूरिया नहीं है। हालांकि, कृषि निदेशालय से 2,000 एमटी (मीट्रिक टन) यूरिया का अतिरिक्त आवंटन दो दिन पूर्व हुआ है। जिससे किल्लत समाप्त होगी।
जनपद में कुल 83 समितियां हैं। मगर सभी समितियां वित्तपोषित नहीं हो पाईं हैं। इसके पीछे जिला सहकारी बैंक की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह बताई जा रही है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत जनपद की 52 समितियों को दो-दो लाख रुपये का अनुदान दिया गया। शेष समितियां अनुदानित नहीं हो पाईं। नंदौर, छपिया, बाघनगर, परसाशेख, शनिचरा, किशुनपुर, औराडांड़, एकमा, सिकरी, बसडीला भिटिया कला समेत 15 समितियां अनुदानित न होने की वजह से निष्क्रिय हो गईं हैं। जबकि बेलहर कला, लोहरौली खास, बिसौवा, गगनईराव, डीघा, महुई, चकदही, देवरिया गंगा, परसहर, छपरा मगर्वी भैंसाखूट, हैंसर और रजनौली सहित 16 समितियों के सचिव किसानों से चंदा एकत्र कर खाद-बीज का उठान कर समितियों को चला रहे हैं। पिछले 15 दिनों से जिले की सक्रिय समितियों पर भी यूरिया खाद नहीं है। डीएओ विनोद कुमार का कहना है कि कृषि निदेशालय से 2,000 एमटी यूरिया का अतिरिक्त आवंटन दो दिन पूर्व हुआ है। जिसके पहुंचने के बाद यूरिया की किल्लत समाप्त हो जाएगी।


अब नहीं मिलेगा गेहूं का बीज
कृषि विभाग के आंकड़े गवाह हैं कि जनपद में 21,000 एमटी यूरिया की जरूरत के सापेक्ष अब तक सिर्फ 8,000 एमटी यूरिया ही मिल पाई है। जबकि 16,500 क्विंटल गेहूं के बीज के लक्ष्य के सापेक्ष 20,800 क्विंटल जिले को उपलब्ध हुआ और किसानों में वितरण भी हो गया। गेहूं के बीज की डिमांड अभी भी किसान कर रहे हैं। गेहूं बीज लक्ष्य से अधिक उपलब्ध होने के बावजूद मांग बरकरार रहने के पीछे कारण यह है कि अनुदान पर 620 से 700 रुपये बोरी तक गेहूं का बीज किसानों को दिया जा रहा था। जिससे सभी यही खरीदना चाह रहे हैं। विभाग के अनुसार अब गेहूं का बीज नहीं मंगवाया जाएगा।
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