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अव्यवस्था के शिकार हैं परिषदीय विद्यालय

Sant kabir nagar

Updated Sun, 07 Oct 2012 12:00 PM IST
संतकबीरनगर। तमाम परिषदीय विद्यालयों में आज भी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। कहीं शौचालय नहीं तो कहीं जर्जर भवन में छात्र-छात्राओं को पढ़ना पड़ रहा है। कहीं शिक्षकों के अभाव में विद्यालय में ताला बंद है तो कहीं मीनू के तहत मिड डे मील नहीं बन रहा है। शिक्षा का स्तर मानक से बहुत नीचे है। कहीं कंप्यूटर तो मौजूद है लेकिन छात्र-छात्राओं को बैठने के लिए टेबल और डेस्क नहीं। एक ही कक्षा में छठीं, सातवीं और आठवीं के छात्र-छात्राओं को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। कुल मिलाकर कहें तो इन विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल ही नहीं है। अमर उजाला टीम ने कुछ परिषदीय विद्यालयों का जायजा लिया तो उसकी स्थिति कुछ यूं रही------
समय : 10 : 39
स्थान : भैंसा सेहरी स्थित प्राथमिक विद्यालय
कांटे। खंड शिक्षा क्षेत्र सेमरियावां के भैंसा सेहरी स्थित प्राथमिक विद्यालय पर शुक्रवार को शिक्षामित्र सुषमा देवी और जगदीश प्रसाद बच्चों को पढ़ाने में मशगूल थे। पूछने पर बताया कि विद्यालय पर तैनात प्रधानाध्यापक सुरेंद्र चौधरी के पास यहां का चार्ज है। यहां के अलावा उनके पास प्राथमिक विद्यालय चगेरा का भी चार्ज है। इस विद्यालय पर वह कभी नहीं आते हैं। विद्यालय पर कुल 55 बच्चे नामांकित हैं और 42 उपस्थित थे। बच्चों के मिड डे मील के लिए रसोइया तहरी बना रही थी। प्राथमिक और जूनियर विद्यालय के लिए ज्वाइंट शौचालय बना है। जिसमें गंदगी का अंबार लगा था। मौजूद छात्रों ने बताया कि गंदगी के कारण शौचालय का कभी प्रयोग नहीं करते।

समय : 10 : 50
स्थान : पूर्व माध्यमिक विद्यालय, भैंसा सेहरी
प्रधानाध्यापक दयाराम अपने आफिस में बैठक कर कुछ लिख रहे थे। कुछ बच्चे आपस में बातें कर रहे थे तो कुछ बच्चे खेल रहे थे। एक ही कमरे में कक्षा छठीं, सातवीं और आठवीं के छात्र-छात्राएं बैठाए गए थे। शेष कमरों में ताला बंद था। पूछने पर प्रधानाध्यापक ने बताया कि कुल 17 बच्चे नामांकित हैं । जिसमें से 10 बच्चे उपस्थित थे। प्रधानाध्याक ने बताया कि बच्चे कम हैं और विद्यालय पर कोई और शिक्षक नहीं है। इसलिए एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाते हैं।

समय : 11 : 14 बजे
स्थान : पूर्व माध्यमिक विद्यालय, कुर्थिया
विद्यालय के एक ही कमरे में बच्चे बैठे हुए थे। सहायक अध्यापक निरंजन प्रसाद बच्चों को पढ़ा रहे थे। पूछने पर बताए कि विद्यालय पर तैनात महिला शिक्षक शांति वर्मा अवकाश पर हैं। विद्यालय में कुल 24 बच्चे नामांकित हैं। जिसमें से 16 बच्चे उपस्थित थे। यहां भी मिड डे मील देने के लिए तहरी बनाई जा रही थी। विद्यालय के बाउंड्री में पानी भरा था। शौचालय में पानी घुस गया था। जिसके कारण कोई उसका प्रयोग नहीं कर रहा था।

समय : 10 :15
स्थान : कन्या जूनियर हाईस्कूल, मेंहदावल
विद्यालय पर तैनात अध्यापिका सरस्वती, तनेजा, सीमा सिंह तथा रजिया सुल्ताना अपनी-अपनी कक्षाओें में बच्चों को पढ़ा रही थीं। नामांकित छात्रों की संख्या 67 है। मौजूद छात्रों ने बताया कि विद्यालय के छत से अक्सर प्लास्टर टूटकर उनके ऊपर गिरता रहता है। तीन कमरे और एक बरामदे वाले भवन के दीवारों का प्लास्टर भी टूट कर गिरा हुआ था। फर्श टूटी हुई थी। परिसर में प्राथमिक कन्या विद्यालय भी मौजूद है। परिसर में दो हैंडपंप लगे हैं। परंतु पानी पीने योग्य नहीं है। अभिभावकों ने बताया कि पानी बदबूदार निकलता है। अभी तक बच्चों में ड्रेस का वितरण नहीं हुआ है। इंचार्ज ने बजट न मिलने के कारण ड्रेस वितरण न हो पाने की बात बताई। छात्राएं टाट पर बैठकर पढ़ रही थीं। कुर्सी, मेज की व्यवस्था नहीं थी। हालांकि बिजली कनेक्शन लगा है तथा कंप्यूटर की व्यवस्था भी थी।

109 विद्यालयों में लटका है ताला
संतकबीरनगर। शिक्षा सत्र शुरू हुए तीन माह से अधिक का समय गुजर गया लेकिन अभी भी जनपद के 109 विद्यालयों के ताले नहीं खुले हैं। हालात यह है कि 97 प्राथमिक विद्यालय शिक्षामित्रों के सहारे संचालित किए जा रहे हैं। जबकि 114 जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ाई एकल शिक्षक के भरोसे हैं। आंकडे़ बताते हैं कि जनपद में 1,147 प्राथमिक विद्यालय हैं। कुल 1,29,066 छात्र इनमें नामांकित हैं। कुल 2,949 शिक्षक थे। जिसमें से 205 शिक्षक दूसरे जनपद स्थानांतरित होकर चले गए। उसके एवज में सिर्फ 33 शिक्षक ही जिले में आए हैं। 90 विद्यालयों के ताले शिक्षकों की कमी के कारण अब तक नहीं खुल पाए हैं। 97 विद्यालयों में सिर्फ शिक्षामित्र तैनात हैं। 242 विद्यालय एकल शिक्षक के सहारे संचालित हो रहा है। इसी तरह जनपद में 444 जूनियर विद्यालय हैं। कुल 34,809 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। जिनमें कुल 751 शिक्षक हैं। शिक्षकों की कमी के कारण 19 विद्यालय बंद हैं। 114 विद्यालयों में एकल शिक्षक तैनात हैं। अब ऐसे हालात में परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था कैसी है, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

33 शिक्षक दूसरे जनपद से ट्रांसफर होकर आए हैं। उन्हें बंद विद्यालयों पर तैनाती दी जाएगी। विद्यालयों में मौजूद शौचालयों में साफ-सफाई की व्यवस्था कराई जाएगी। शिक्षण व्यवस्था बेहतर बनाने की दिशा में पूरा प्रयास किया जाएगा।
रामसिंह, बीएसए
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