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अपने बच्चे को खुद पढ़ाने पर मिलेंगे 4,200 रुपये

Sant kabir nagar

Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
संतकबीरनगर। शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों को शिक्षित करने के लिए राज्य परियोजना कार्यालय ने अनोखी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत अक्षम बच्चों के अभिभावकाें को अपने बच्चों को पढ़ाने पर पारिश्रमिक दिया जाएगा। इसके लिए बकायदा अभिभावकों को ट्रेनिंग दी जाएगी। अभिभावकाें को 42 सौ रुपया प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। परियोजना कार्यालय की इस पहल से बच्चे जहां शिक्षा की मुख्यधारा से जुडे़ंगे, वहीं उनके अभिभावक आर्थिक रूप से मजबूत भी होंगे।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के उपरांत शारीरिक रूप से विकलांग बच्चों (जो विद्यालय आने में असमर्थ हैं) को प्राथमिक स्तर की शिक्षा को पूर्ण कराने के उद्देश्य से शासन ने समेकित शिक्षा के अंतर्गत गृह आधारित शिक्षा कार्यक्रम संचालित करने का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विकलांग बच्चों की ग्राम सभावार पहचान इंटीनरेंट शिक्षकों द्वारा की जाएगी। जिसकी सूची जिला समन्वयक समेकित शिक्षा को उपलब्ध कराई जाएगी। उसी सूची से विकलांग बच्चों के अभिभावकों की भी पहचान की जाएगी। चयन के लिए अभिभावक की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल पास होना है। आठ बच्चाें की यूनिट पर एक अभिभावक होगा। अभिभावकों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें यह बताया जाएगा कि अक्षम बच्चाें को गृह आधारित शिक्षा कैसे दी जाए। इसके लिए अभिभावकाें को 42 सौ रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। गृह आधारित शिक्षा देने के पीछे शासन की सोच है कि अभिभावक बच्चों के ज्यादा करीब होता है। इसलिए अभिभावकों को पारिश्रमिक देकर बच्चों को ज्यादा से ज्यादा लाभ दिया जा सकता है। सप्ताह में दो दिन अभिभावकों द्वारा किए गए कार्यों का मूल्यांकन इंटीनरेंट शिक्षकाें द्वारा किया जाएगा। अभिभावकों को जो भी समस्या होगी, उनका तत्काल निराकरण भी किया जाएगा।


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सभी इंटीनरेंट शिक्षकाें को जिम्मेदारी दे दी गई है कि वे अपने अपने विद्यालय के अंतर्गत अक्षम बच्चों का पता लगाकर उसकी सूची सौंप दें। जिसके बाद योग्य अभिभावकाें की पहचान की जा सके। जल्द ही इस योजना को मूर्त रूप दे दिया जाएगा।
जिला समन्वयक, समेकित शिक्षा, रजनीश वैद्यनाथ
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