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...अब भी ताजा हैं यादें

Sant kabir nagar

Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
संतकबीरनगर। शिक्षक दिवस रस्म अदायगी बनता जा रहा है। अब स्कूलों में इस अवसर पर उछल-कूद तो जमकर होती है लेकिन शायद ही शिक्षकों के प्रति आंखों में वह प्रेम और आदर दिखता हो जो कुछ साल पहले तक दिखता था। शिक्षक भी छात्रों के प्रति उदासीन हो चुके हैं लेकिन अब भी ऐसे लोग हैं, जिनकी जिंदगी में शिक्षक का अहम योगदान रहा है और वह आज सफल हैं।
गैरहाजिर बच्चों से पूछते थे कारण
एचआरपीजी कालेज के शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डा. पूर्णेश नारायण ने अपने गुरु देवरिया के इंदुपुर के इंटर कालेज में इंटरमीडिएट में गणित पढ़ाने वाले चंद्रभूषण चौबे के बारे में बताया कि वह बच्चों को नि:शुल्क भोर में 5 बजे अपने घर पर पढ़ाते थे। स्कूल में पढ़ाते समय कक्षा में अनुपस्थित रहने वाले बच्चे से जरूर पूछते थे कि कल क्यों नहीं आए? हर बच्चे के घर परिवार के बारे में भी वे पूरी तरह वाकिफ होते थे।

अब भी याद है वह थप्पड़
खलीलाबाद कसबे में सफल बाल चिकित्सक डा. केसी पांडेय ने कहा कि मेरी सफलता का श्रेय मेरे पिताके बड़े भाई डा. एनडी पांडेय को जाता है। जिन्होंने गलती करने पर डांटा और बड़ों का आदर करने की प्रेरणा दी। उनसे मैने निष्ठा, ईमानदारी, सेवाभाव और ईश्वर के प्रति आस्था सीखी। वैसे कक्षा 8 में पढ़ाने वाले शिक्षक भूपति चौधरी का थप्पड़ मुझे नहीं भूलता। कक्षा में शैतानी करने पर उन्होंने मारी थी। तबसे वैसी गलती, मैने कभी नहीं की।

कमियां मिलने पर डांटते थे.. स्नेेह भी जताते थेे
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सैय्यद गुलाम रब्बानी ने कहा कि मै जीवन भर शिक्षक रहा पर शिक्षक दिवस पर मुझे अपने गुरु तिवारी जी याद आते हैं, जो पढ़ाते समय कमियां मिलने पर डांटते थे पर उतना ही स्नेेह भी करते थे। अध्यापक का व्यवहार कैसा हो, उनसे हमने सीखा।

घर आकर कराई परीक्षा की तैयारी
रिटायर्ड बैंक अधिकारी एवं साहित्यकार अवधेश पांडेय ने कहा कि मेरे प्रेरणाश्रोत मेरे आचार्य डा. रामनारायण पांडेय रहे। एमए फाइनल की परीक्षा दे रहा था तो बीच में बैंक के काम से कानपुर जाना पड़ा। लौटकर आया तो अगले दिन चतुर्थ प्रश्नपत्र की परीक्षा थी। मैं किसी तरह तैयारी में लगा था। इसी बीच अचानक दोपहर में डा. पांडेय घर आ गए। उन्होंने कहा परेशान न हो। चार घंटे तक लगातार हिंदी साहित्य का इतिहास पढ़ाया। जिसमें मैने 60 फीसदी अंक पाए। ऐसे गुरु के चरणों में मैं बार-बार प्रणाम करता हूं।
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