आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

...अब भी ताजा हैं यादें

Sant kabir nagar

Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
संतकबीरनगर। शिक्षक दिवस रस्म अदायगी बनता जा रहा है। अब स्कूलों में इस अवसर पर उछल-कूद तो जमकर होती है लेकिन शायद ही शिक्षकों के प्रति आंखों में वह प्रेम और आदर दिखता हो जो कुछ साल पहले तक दिखता था। शिक्षक भी छात्रों के प्रति उदासीन हो चुके हैं लेकिन अब भी ऐसे लोग हैं, जिनकी जिंदगी में शिक्षक का अहम योगदान रहा है और वह आज सफल हैं।
गैरहाजिर बच्चों से पूछते थे कारण
एचआरपीजी कालेज के शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डा. पूर्णेश नारायण ने अपने गुरु देवरिया के इंदुपुर के इंटर कालेज में इंटरमीडिएट में गणित पढ़ाने वाले चंद्रभूषण चौबे के बारे में बताया कि वह बच्चों को नि:शुल्क भोर में 5 बजे अपने घर पर पढ़ाते थे। स्कूल में पढ़ाते समय कक्षा में अनुपस्थित रहने वाले बच्चे से जरूर पूछते थे कि कल क्यों नहीं आए? हर बच्चे के घर परिवार के बारे में भी वे पूरी तरह वाकिफ होते थे।

अब भी याद है वह थप्पड़
खलीलाबाद कसबे में सफल बाल चिकित्सक डा. केसी पांडेय ने कहा कि मेरी सफलता का श्रेय मेरे पिताके बड़े भाई डा. एनडी पांडेय को जाता है। जिन्होंने गलती करने पर डांटा और बड़ों का आदर करने की प्रेरणा दी। उनसे मैने निष्ठा, ईमानदारी, सेवाभाव और ईश्वर के प्रति आस्था सीखी। वैसे कक्षा 8 में पढ़ाने वाले शिक्षक भूपति चौधरी का थप्पड़ मुझे नहीं भूलता। कक्षा में शैतानी करने पर उन्होंने मारी थी। तबसे वैसी गलती, मैने कभी नहीं की।

कमियां मिलने पर डांटते थे.. स्नेेह भी जताते थेे
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सैय्यद गुलाम रब्बानी ने कहा कि मै जीवन भर शिक्षक रहा पर शिक्षक दिवस पर मुझे अपने गुरु तिवारी जी याद आते हैं, जो पढ़ाते समय कमियां मिलने पर डांटते थे पर उतना ही स्नेेह भी करते थे। अध्यापक का व्यवहार कैसा हो, उनसे हमने सीखा।

घर आकर कराई परीक्षा की तैयारी
रिटायर्ड बैंक अधिकारी एवं साहित्यकार अवधेश पांडेय ने कहा कि मेरे प्रेरणाश्रोत मेरे आचार्य डा. रामनारायण पांडेय रहे। एमए फाइनल की परीक्षा दे रहा था तो बीच में बैंक के काम से कानपुर जाना पड़ा। लौटकर आया तो अगले दिन चतुर्थ प्रश्नपत्र की परीक्षा थी। मैं किसी तरह तैयारी में लगा था। इसी बीच अचानक दोपहर में डा. पांडेय घर आ गए। उन्होंने कहा परेशान न हो। चार घंटे तक लगातार हिंदी साहित्य का इतिहास पढ़ाया। जिसमें मैने 60 फीसदी अंक पाए। ऐसे गुरु के चरणों में मैं बार-बार प्रणाम करता हूं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

क्या ये गाने आपको पुराने दौर में ले जाते हैं, सुनकर कीजिए तय

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

उपन्यासकार वेद प्रकाश शर्मा की ये कहानी आपके दिल को छू जाएगी

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

हर उभरती हीरोइन को कंगना से सीखनी चाहिए ये 6 बातें, सफलता चूमेगी कदम

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

WhatsApp लाया अब तक का सबसे शानदार फीचर, आपने आजमाया क्या ?

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

बेसमेंट के वास्तु दोष को ऐसे करें दूर

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

Most Read

काशी की महिला ज्योतिषियों ने बताया यूपी चुनाव का परिणाम

femal astrologers from kashi tell about result of up electionp
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

पांच दिन बंद रहेंगे बैंक

Banks closed five days
  • गुरुवार, 16 फरवरी 2017
  • +

यूपी चुनाव 2017 : एक गांव में एक वोट पड़ा दूसरे में एक भी नहीं, कारण जानकर रह जाएंगे हैरान

vilagers  voting boycott in kanpur
  • रविवार, 19 फरवरी 2017
  • +

भितरघात की चिंगारी से झुलसती सपा

spark of sabotage scorched SP
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

खुशखबरी : 15 अप्रैल से यहां हाेगी सेना रैली भर्ती, 13 जिलाें के अभ्यर्थी अभी करें अावेदन

sena bharti rally in kanpur
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

IPL-10 में धूम मचाने को तैयार यूपी के ये 10 खिलाड़ी

ten players from up select in ipl
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top