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75 साल पहले युग प्रवर्तक ने रची नारी रक्षा की कहानी

Raebareli

Updated Fri, 21 Dec 2012 05:30 AM IST
रायबरेली। हिन्दी को नया आयाम देने के साथ ही युग प्रवर्तक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की सोच भी देवत्व अनुभूति वाली थी। नारी के सम्मान व रक्षा के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहने के साथ ही समाज के विरोध के बाद भी उन्हें अपनी पत्नी में देवत्व की अनुभूति थी। यही कारण था कि रायबरेली जिले के छोटे से गांव दौलतपुर की धरती पर इतिहास रच उन्होंने पत्नी की याद में एक मंदिर बनवाया था। इस मंदिर में मां लक्ष्मी व मां सरस्वती की मूर्तियों के साथ अपनी पत्नी की मूर्ति भी स्थापित करवाई थी। वह नारी सम्मान के लिए हमेशा संघर्षशील रहे। गलत सोच रखने वालों को उन्होंने करारा झटका दिया था। इसके बदले में उन्हें निंदा व विरोध का सामना करना पड़ा था। आज लोग आचार्य के विचारों को भूलते जा रहे हैं। जल्द ही आचार्य की सोच को जागृत न किया गया तो न जाने आधी आबादी की क्या दशा होगी।
आज जमाना बदल गया है। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की हिन्दी उपेक्षा का शिकार है। लोग अंग्रेजी की ओर बढ़ रहे हैं। दिल्ली में चलती बस में युवती की आबरू लूट ली जा रही है। घरों में दहेेज के लिए माताओं-बहनों को जिंदा जलाया जा रहा है। घरों की ड्योढ़ियों तक ही आधी आबादी की सिसकियां सिमट कर रह जा रही हैं। आचार्य जी ने 75 साल पहले जिस समाज की सोच रखी थी आज वह बिखर सी गई है। वही जड़ सोच वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। युग प्रवर्तक ने महिला सशक्तीकरण की जो सोच समाज में फैलाने की कोशिश की थी, वह भी समाज में विलुप्त हो गई है। नारी शिक्षा और सम्मान के लिए सपना देखा था। उन्होंने नारियों में जहां रम्भा, कुमुद सुंदरी, महाश्वेता व इंदिरा का गुणगान किया वहीं महिला परिषद के भी गुणगान व बखान उन्हें प्रोत्साहित किए। भारत मित्र में प्रकाशित बाल विधवा विलाप-कान्यकुब्ज अबला के माध्यम से उन्होंने नारी पीड़ा को समझने के लिए हमें विवश किया। हिन्दी की उपेक्षा और नारी समाज के साथ अत्याचार को मिटाने के लिए अब समय आ गया है कि हम 75 साल पहले आचार्य द्विवेदी ने जैसे समाज की सोच स्थापित करने का प्रयास किया था, उसे अपनाएं। जब तक नारी का सम्मान नहीं करेंगे तब तक समाज देश के विकास के बारे में सोचना दिवा स्वप्न के समान है। 21 दिसंबर को आचार्य की पुण्यतिथि पर एक बार हिन्दी प्रेमी, समाज प्रेमी आचार्य के विचारों को आम समाज तक पहुंचाने के लिए प्रयास करेंगे।
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