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बैंकों में ठप रहा कामकाज, एटीएम भी फेल

Raebareli

Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
रायबरेली। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर जिले की सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों में दूसरे दिन गुरुवार को भी ताले लटकते रहे। पहले बैंक शाखाओं में, फिर सुपर मार्केट में जुटे कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की। खंडेलवाल कमेटी की सिफारिशों, बैंकिंग संशोधन बिल, बैंकों के निजीकरण का पुरजोर विरोध किया। इस हड़ताल के चलते जहां 80 करोड़ से अधिक का लेनदेन ठप रहा, वहीं ज्यादातर एटीएम के शटर भी बंद रहे। इससे धन निकासी के लिए लोगों को भटकना पड़ा, लेकिन उनकी जरूरत पूरी नहीं हो सकी। कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने से एटीएम में कैश की रिफलिंग नहीं हो सकी।
दो दिनी हड़ताल के दूसरे दिन भी जिलेभर की बैंक शाखाओं में सुबह से ही ताले लटकते रहे। कर्मचारी अपनी-अपनी शाखाओं में जुटे और मांगों के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। इसके बाद जुलूस की शक्ल में निकले और सुपर मार्केट में एकजुट हुए। एसबीआई ब्रांच के नीचे जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के विरोध में नारे लगाए। इस अवसर पर अयाज अहमद, यूके सिंह, अशोक सोनकर, रामराज पांडेय, रमेश आश्रित, अनिल सिंह, लालता प्रसाद, मनोज, आरबी सिंह, विवेक, अनिल पांडेय, राजीव कपूर, शिशिर श्रीवास्तव मौजूद रहे।
लगातार हड़ताल के कारण बैंकों के पास कैश की कमी हो गई। यही वजह रही कि ज्यादातर एटीएम गुरुवार को सुबह कुछ देर तक चले, लेकिन उसके बाद उनके शटर गिरने लगे। दोपहर बाद ज्यादातर एटीएम ने कैश उगलना बंद कर दिया। ऐसे में एटीएम के भरोसे बैठे खाताधारकों को परेशानी उठानी पड़ी। बैंक बंद होने और एटीएम में कैश खत्म हो जाने के कारण वे लोग अपनी जरूरत पूरा नहीं कर सके। अब शुक्रवार को बैंक खुलने पर ही व्यवसायिक लेनदेन और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए धन मिल सकेगा। इससे बैंकों और एटीएम में ग्राहकों का लोड भी अधिक पड़ेगा। शिवगढ़ प्रतिनिधि के मुताबिक, बैंक कर्मियों की हड़ताल से खाताधारकों को पूरे दिन भटकना पड़ा। बैंक आफ बड़ौदा की बेड़ारू शाखा में लगभग छह हजार खाताधारक हैं, जबकि लगभग दो हजार सरकारी खाते संचालित होते हैं। खाताधारक राजाराम, सहदेव, रामविलास, रामविशाल, हौसला आदि ने कहा कि बैंक बंद होने से काफी काम रुक गए हैं। दूसरी तरफ शाखा प्रबंधक मो. आलम ने कहा कि हड़ताल के कारण कामकाज नहीं हो रहा। डलमऊ प्रतिनिधि के मुताबिक, क्षेत्र के सभी बैंकों में ताले लटकते रहे, जिससे ग्राहकों को दिक्कत हुई।
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