आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

साहित्यिक पुस्तकों की कमी से सिसक रहा पुस्तकालय

Pratapgarh

Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
प्रतापगढ़। बेल्हा में साहित्यकारों की कमी नहीं है। यहां के कवियों ने देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी रचनाओं से धाक जमाई है। यही नहीं साहित्य के कद्रदान भी यहां कम नहीं हैं। साहित्यिक गोष्ठियों, कवि सम्मेलन, मुशायरों पर नजर डाली जाए तो हर हफ्ते एक साहित्यिक कार्यक्रम होता है। बावजूद इसके शहर के राजकीय पुस्तकालय की हालत कुछ ठीक नहीं है। वहां साहित्यिक पुस्तकों का पूरी तरह से टोटा है। स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा भी समाज को साहित्य की संजीवनी उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
किसी भी शहर को विकसित करने में वहां रहने वाले लोगों की अहम भूमिका होती है। इस भावना को प्रेरित करने के लिए अध्ययन की जरूरत होती है। स्वाध्याय से लोगों की बुद्धि विवेक में इजाफा तो होता ही है तमाम जानकारियां भी उन्हें होती हैं। इसके लिए मजबूत और स्वस्थ पुस्तकालयों की जरूरत पड़ती है जो नई और पुरानी पीढ़ी का मार्गदर्शन करती हैं। बेल्हा में पुस्तकालय तो है लेकिन इसमें रखा साहित्य कमजोर है। जिस साहित्य की जरूरत बेल्हावासियों को है उसकी पूर्ति पुस्तकालय के माध्यम से नहीं हो पा रही है। इसके चलते मौजूदा समय में महज 150 सदस्य हैं। नई और चर्चित पुस्तकें तो यहां मिलती ही नहीं। साहित्यिक पुस्तकों की खरीद यहां के लोगों को ध्यान में रखकर नहीं की जाती। दिल्ली के पुस्तक मेले में पूरे प्रदेश के लिए पुस्तकों की खरीद कर ली जाती है। इसके चलते न तो इस पुस्तकालय में सदस्यों की संख्या में इजाफा हो रहा है और न ही साहित्य में।
राजकीय पुस्तकालय में किताबों के चयन के लिए बनी समिति भी इसमें रुचि नहीं ले रही है। साहित्य के लिए दावे तो तमाम किए जाते हैं लेकिन कोई प्रयास नहीं किया जाता। समिति में डीएम के साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक भी शामिल हैं। बावजूद इसके इस पुस्तकालय की दशा में परिवर्तन नहीं आ रहा है। बेल्हा के छात्रों को भी इस पुस्तकालय से कोई लाभ नहीं मिलता। चर्चित पुस्तकों को पढ़ने की उनकी इच्छा मन में ही दबी रह जाती है। बेल्हा में लोगों को साहित्य की संजीवनी से दूर ही रहना पड़ रहा है। समिति की बैठक भी काफी समय से नहीं हो सकी है।
जिले में अच्छे साहित्य को लोगों तक पहुंचाने का दावा करने वाली स्वयं सेवी संस्थाएं भी इसमें नाकाम हैं। ग्रामीणों को साहित्य पढ़ाने का दावा करने में तो वे आगे रहती हैं लेकिन लोगों तक किताबें पहुंच नहीं पातीं। हर साल उनकी डिमांड जिले के राजकीय पुस्तकालय में पहुंच जाती है। बावजूद इसके जमीनी हकीकत में किताबें किसी को भी उपलब्ध नहीं कराई जातीं बल्कि यह कहा जाए कि लोगों को इस तरह के पुस्तकालय के बारे में पता ही नहीं है तो ज्यादा ठीक होगा।
पुस्तकालयाध्यक्ष अनुराग पांडेय का कहना है कि चयन समिति द्वारा डिमांड भेजने के बाद भी उस पर ध्यान नहीं दिया जाता। पुस्तकों की खेप ऊपर के लोग अपने मन से ही भेजते हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं की पुस्तकों के लिए यहां से सिर्फ डिमांड भेजवा दी जाती है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

matted library

स्पॉटलाइट

'अनुष्का शर्मा' की दिलकश अदाओं और परफेक्ट फिगर का ये है राज

  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017
  • +

India Couture Week 2017: शर्मीली दिशा पाटनी का शो स्टॉपर अंदाज

  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017
  • +

लाल आंखें, शरीर पर बाघ जैसे निशान, लोगों ने पूछा 'कहीं यह एलियन तो नहीं'?

  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017
  • +

रफ्तार में दौड़ती ट्रेन की छत पर चला रहा था साइकिल, तभी बिगड़ा बैलेंस और...

  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017
  • +

19 साल की लड़की ने एक हफ्ते में इतनी बार जीती लॉटरी कि करोड़ों में पहुंचा बैंक बैलेंस

  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017
  • +

Most Read

नीतीश के इस्तीफे पर अखिलेश का तंज, ट्वीट किया ये गाना

akhilesh yadav tweets about bihar matter
  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017
  • +

ये है बिहार का राजनीतिक गणित, जानिए किसके साथ बन सकती है सरकार

What will be bihar's new political equations after nitish kumar's resignation
  • बुधवार, 26 जुलाई 2017
  • +

ऑनलाइन भर्ती परीक्षा से पीछे हटा पुलिस विभाग, शासन को भेजा प्रस्ताव

police department will not conduct online  test for constable recruitment
  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017
  • +

कभी 30 रुपये देकर इसी किराये के मकान में रहते थे कोविंद, अब यहां जश्न

some important facts about ramnath kovind
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

बिहार सीएम पद से इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार के बयान की 20 बड़ी बातें

Bihar Chief Minister Nitish Kumar's statement after resignations
  • बुधवार, 26 जुलाई 2017
  • +

समायोजन रद्द होने पर यूपी के शिक्षामित्रों में उबाल, कई जगह प्रदर्शन

Shiksha Mitra Upon cancellation of the adjustment of UP education, stir in many places
  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!