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रैन बसेरों के लिए अभी और ठंड का इंतजार

Pratapgarh

Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST
प्रतापगढ़। ठंड की शुरुआत हो चुकी है। कोहरा भी अब ठंडी हवा के साथ अपनी चादर फैलाने लगा है। शहर में खुले आसमान के नीचे रहने वाले लोगों की रात अब सर्द होने से नींद हराम है। मगर इनके लिए बनने वाले रैन बसेरों की तैयारी अभी शुरू नहीं हो सकी है।
मौसम के बदलाव के साथ ही जिले की आबोहवा बदल रही है। ठंड के दूसरे चरण की शुरुआत हो चुकी है। नवंबर माह के बाद दिसंबर भी आधा बीतने को है। बादलों ने आसमान से आने वाली सूरज की तपिश रोकने को डेरा जमाना शुरू कर दिया। बुधवार को कोहरे ने भी अपनी चादर तानकर ठंड का अहसास लोगों को करा दिया। हालांकि इसके पहले भी ठंड ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। बावजूद इसके अभी शासन और नगर पालिका की ओर से कोई तैयारी नहीं की गई है। रैन बसेरों के माध्यम से खुली छत के नीचे व बड़ी-बड़ी होर्डिंगों के नीचे रहने वालों के लिए आफत का समय आ गया है। इसके अलावा झुग्गियों के नाम पर बांस पर पन्नी तानकर रहने वाले भी इस समस्या से दो चार होने लगे हैं। नगर पालिका इन लोगों को ठंड से बचने के लिए जगह-जगह रैन बसेरे बनाकर छत दिलाती है। इससे यह पाला, कोहरा और ठंडी हवा से बचे रहते हैं। इसमें बाहर से आने वाले वे लोग भी शामिल होते हैं जो यहां सिर्फ मजदूरी करने आते हैं और सड़क के किनारे ही सो जाते हैं। इस बार नगर पालिका ने अभी तक इसकी तैयारी शुरू नहीं की है।
ठंड में बनने वाले इन रैन बसेरों में मजदूरों के साथ अन्य लोग भी शरण लेते हैं। इसके साथ ही यात्रा के दौरान ट्रेन छूट जाने व बसों के न मिलने पर भी यात्री इसमें शरण लेते हैं। एक तरह से यह कहें कि इनके जरिए लोगों के लिए अस्थाई छत का निर्माण हो जाता है तो गलत नहीं होगा। अधिक ठंड लगने के बाद भी लोग हवा और कोहरे से बचने के लिए इसमें शरण ले लेते हैं।
शहर में हजारों परिवार ऐसे हैं जिनके पास छत नहीं है। आवास विकास, कांशीराम कालोनी के साथ ही तमाम अन्य योजनाओं के बावजूद उनके लिए हवा और कोहरे से बचने के लिए छत नहीं उपलब्ध हो सकी है। इनमें से अधिकतर मजूदर परिवार हैं जो दिन भर मजदूरी करने के साथ ही मैदानों में अपनी रातें बिता लेते हैं। इनकी पन्नी की बनी छतें भी फटी हुई हैं। ठंडी में यह रैन बसेरों में ही अपनी रातें गुजारते हैं। अभी इनके न बनने से इनको ठंड लगने का डर बना हुआ है।
नगरपालिका अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह का कहना है कि शीत लहरी और कड़ाके की ठंड में रैन बसरे तैयार किए जाते हैं। अभी उस तरह की ठंड नहीं है फिर भी इसे जल्द ही तैयार करवाया जाएगा।
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