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दीपावली की दस्तक, तेल, घी में लगी आग

Pratapgarh

Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
प्रतापगढ़। दीपावली पर घर को दीये की रोशनी से सजाने की योजना पर महंगाई का अंधेरा कब्जा कर सकता है। ग्रामीण इलाकों में होने वाली सरसों दूसरे प्रांतों में भेजे जाने के कारण इस बार तेल की कमी और महंगाई से लोगों को जूझना पड़ सकता है। उधर देशी घी पर भी ज्यादा खपत के चलते महंगाई का असर हावी है।
दीपावली पर ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी के दीये में तेल और घी के दीपक जलाए जाने की प्रथा है। वैसे भी ग्रामीणों की तमाम मान्यताओं के अनुसार घर-घूर, खेत खलिहान के साथ ही जलाशय व देवी देवताओं के सामने मिट्टी की दियाली में ही दीपक जलाकर पूजा की जाती है। एक ही घर में तकरीबन दर्जनों तेल व घी के दीपक जलाए जाते हैं। इसके चलते इस दिन के लिए पहले से ही तेल और देशी घी की खरीदारी कर ली जाती है। संपन्न घरों में घी के दीपक जलते हैं तो अन्य लोग तेल से ही काम चला लेते हैं। दीपावली के कुछ दिन पहले से ही इसकी मांग जोर पकड़ने लगती है। लोगों की मांग को देखते हुए तेल और घी की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। उधर देशी घी की तो बात ही अलग है। गाय के घी की मांग कुछ ज्यादा ही होती है। इसके अलावा भैंस का घी भी कुछ कम महंगा नहीं है। इसकी मुंहमांगी कीमत वसूल की जा रही है।
जिले के गांवों के किसानों से सरसों खरीदकर कोलकाता भेज दी जाती है। वहां से इसे बाहर भेज दिया जाता है। व्यापारियों को यह जानकारी तो नहीं होती कि इस सरसों की पेराई करके तेल एक्सपोर्ट किया जाता है कि सीधे सरसों ही लेकिन इसके यहां से जाने के कारण तेल की महंगाई और बढ़ गई है। दीपावली पर होने वाले तेल की खपत को देखते हुए इसकी शार्टेज बताई जा रही है।
जिले में सरसों का तेल बेचने वाले कोल्हू संचालक हर दिन इसके मूल्य में बढ़ोत्तरी करते जा रहे हैं। 90 रुपये किलो के रेट से मिलने वाला तेल इस समय 110 रुपये में पहुंच गया है। हो सकता है कि कल 115 में मिले। हालांकि परचून की दुकानों पर आने वाला पैकिंग तेल जरूर निर्धारित रेट से पांच रुपये महंगा बिक रहा है।
गाय का घी अब खाने को नहीं मिल रहा है। भैंस का घी भी पूजा पाठ में ही खर्च हो जाता है। गांव में अगर किसी ने भैंस, गाय पाल भी रखी है तो उसके पास इकट्ठा होने वाला घी पहले ही बिका होता है। यदि किसी को तत्काल अनुष्ठान व पूजन हवन के लिए जरूरत पड़ती भी है तो उसे मुंह मांगा दाम देकर इसे लेना पड़ता है।
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