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चेक के फेर में पिस रहीं जच्चा, रेल अस्पताल में डाक्टर नहीं

Pratapgarh

Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
प्रतापगढ़। जिला महिला अस्पताल में जननी सुरक्षा का चेक लेने के लिए हर दिन महिलाओं की भीड़ लगी रहती है। नवजातों को गोद में लिए महिलाओं का पूरा दिन चेक के चक्कर में बैठे-बैठे बीत जाता है। इस दौरान उनके लल्ला का गला सूखता रहता है। उनका गला तो सींचा जाता है, लेकिन धूप और धूल उन्हें नुकसान पहुंचाती रहती है। ऐसे में नवजातों को कितनी दिक्कत होती है, यह उनकी मां भी शायद नहीं समझ पाती हैं। वहीं जिला मुख्यालय का रेलवे अस्पताल दो माह से चिकित्सक विहीन चल रहा है। नियमों के अनुसार यहां दिन-रात डाक्टर की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि किसी भी ट्रेन यात्री की हालत बिगड़ने पर त्वरित चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सके। मगर यहां ऐसा नहीं हो पा रहा है। ट्रेन यात्रियों के साथ ही यहां रेलवे कर्मचारी के परिवारों का भी इलाज करने वाला कोई नहीं है।
जिला महिला अस्पताल में जननी सुरक्षा का नाम बदनाम हो गया है। पात्र महिलाओं का नंबर आने में घंटों लग जाता है जबकि सेवा पानी करने वाले लोग जल्द ही चेक लेकर निकल जाते हैं। उधर दूर-दराज से आई महिलाएं चेक के इंतजार में अपने लल्ला को गोद में बार-बार गेट का चक्कर लगाकर लौट जाती हैं। चेक बांटने में सौतेलापन होने के चलते इन माओं को अपने बच्चों को धूल और धूप के साथ खुले वातावरण में लेकर रहना होता है। इसका इन नवजातों पर गलत असर पड़ता है। खुले में होने के चलते इन नवजातों को यह धूल, मिट्टी कितना नुकसान पहुंचाती यह तो सिर्फ चिकित्सक ही जान सकते हैं। इस तरफ उन महिलाओं का भी ध्यान नहीं जाता जो 1400 के चेक का इंतजार करती परिसर में बैठी रहती हैं।
वहीं जिला मुख्यालय स्थित रेलवे अस्पताल में बिना किसी डाक्टर की स्थाई तैनाती से पहले ही यहां मौजूद चिकित्सक को रिलीव कर दिया गया। ऐसे में यहां इलाज की व्यवस्था रामभरोसे हो गई। ट्रेन में किसी की तबियत खराब होने पर उसे रायबरेली से पहले इलाज मिलना मुश्किल है। रेलवे कर्मियों के परिवार वालों को रेलवे अस्पताल में इलाज मिल जाता था लेकिन अब यह लोग भी फार्मासिस्ट से ही दवा लेकर लौट रहे हैं। यहां सर्वाधिक समस्या रात में होती है। अगर किसी ट्रेन यात्री की तबियत खराब होती है तो उसे ट्रेन में इलाज मिल पाना संभव नहीं है। उसे प्रतापगढ़ से या तो ट्रेन छोड़नी होगी या फिर बीमारी हालत में ही आगे जाना होगा। दो माह से अधिक समय से स्थाई डाक्टर न आने से रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारीजनों में रोष है। स्टेशन अधीक्षक एनके शर्मा ने कहा कि अभी यहां स्थाई चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई है। सप्ताह में तीन दिन रायबरेली से डाक्टर आते हैं। स्थाई डाक्टर न होने से समस्या तो है ही।
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