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1.63 लाख पौधे गुम

Pratapgarh

Updated Tue, 03 Jul 2012 12:00 PM IST
प्रतापगढ़। वन विभाग जुलाई के पहले सप्ताह में वन महोत्सव मना रहा है। यह आयोजन सिर्फ कागज में है। हकीकत तो यह है कि 2007-08 में 131.29 लाख रुपये खर्च कर रोपे गए 1,63,744 पौधाें का नामोनिशान मिट गया है। कुछ जगहाें पर पौधे सिर्फ कागज में लगवाने की बात सामने आ रही है। विभागीय अधिकारी पांच साल बाद इस मुद्दे पर बोलने से कतरा रहे हैं। बेल्हा की धरती को हराभरा करने के लिए 2007-08 में पौधरोपण की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई थी। पूरे जिले में सड़काें, नहराें के किनारे और ग्रामसभाओं की सरकारी जमीन पर हजारों की संख्या में पौधरोपण कराया गया था। आज पांच साल बाद जब इन पौधाें को छाया देते हुए वायुमंडल में आक्सीजन पैदा करनी था तो यह ढूंढे ही नहीं मिल रहे हैं। 2007-08 में फतनपुर थाना क्षेत्र के बांसी गांव में 6 लाख की लागत से 6600, सुरवा मिश्रपुर में 4 लाख की लागत से 4400 पौधे लगाए गए। आज इनमें से एक भी पौधे ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। कुछ इसी तरह से लालगंज कोतवाली के भटनी गांव में 8 लाख रुपये की लागत से 8800, जेंवई में 5 लाख की लागत से 5500 पौधे लगाए गए थे। आसपुर देवसरा के ढेढुआ गांव में 6 लाख की लागत से 6600 पौधे लगाए थे। ढेकाही ग्रामसभा में भी 5 लाख की लागत से 5500 पौधे, संसारपुर स्कूल भूमि में 4400 पौधे, सरसीखाम गांवसभा में 5500 पौधे लगाए गए थे। आज इन गांवों में ये पौधे गुम हैं। इसके अलावा नहराें और सड़कों पर पौधरोपण में भारी धनराशि खर्च की गई है। लखनऊ-वाराणसी सिर्फ 2800 पौधों पर 10.12 लाख, उतरौला इलाहाबाद मार्ग पर 4500 पौधों के लिए 16.28 लाख और आममऊ-मझिलहा मार्ग पर 1700 पौधाें के लिए 6.10 लाख रुपये खर्च किए गए। पांच साल बाद कहीं भी एक पौधा सुरक्षित नहीं दिख रहा है। डेढुआ गांव के तत्कालीन प्रधान पति चंद्रभान सिंह ने बताया कि पौधे लगाए गए थे लेकिन अब वे जिंदा नहीं हैं। मनी का पूरा मिश्रपुर के प्रधानपति कृपा शंकर तिवारी ने बताया कि पौधे लगे थे ,उखड़ गए। भटनी के वर्तमान प्रधान राम नरेश यादव ने बताया कि 8800 पौधे लगने की जानकारी उन्हें नहीं है। इसी प्रकार बांसी गांव में भी कोई पौधा नहीं बचा है। डीएफओ प्रतापगढ़ मनोज सोनकर के मुताबिक वन विभाग ने ग्रामीण इलाके में पौधे लगाने के बाद ग्रामसभाआें को हैंडओवर कर दिया था। हो सकता है कि वर्तमान प्रधान को पौधे लगने के स्थान की जानकारी न हो। हम अपने कर्मचारियाें से इसकी तहकीकात कराएंगे।
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