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गन्ना समिति की पर्चियां चीनी मिलों के हवाले!

Pilibhit

Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। किसानों के हित के लिए गठित की गईं गन्ना विकास समितियां संसाधनों के अभाव में स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही हैं। प्रमाण के तौर पर गन्ना विकास समिति पीलीभीत ही है, जिसमें लाखों रुपये व्यय कर इसलिए कंप्यूटर लगाए गए थे कि किसानों की पर्चियां यहां से जारी होंगी तो कोई घपलेबाजी की संभावना नहीं रहेगी, किंतु यह कंप्यूटर शोपीस बनकर रह गए हैं। वजह है टेंडर प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण कांट्रेक्टर नहीं हो पा रहा है। इधर, समिति अध्यक्ष विनोद गंगवार का मानना है कि गन्ना विभाग के अधिकारी मिलों को फायदा पहुंचाने की मंशा से इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पांच साल बनाया गया था कंप्यूटर विभाग
वर्ष 2007-08 में गन्ना समितियों के फंड से मंडल भर के सोसाइटी दफ्तरों में कंप्यूटर लगवाए गए थे। इनका उपयोग किसानों को गन्ने की पर्ची जारी करने में हो रहा था। अपने जिले की चारों समितियों से जुड़े किसानों को पीलीभीत गन्ना सोसाइटी से गन्ने की पर्चियां जारी कराने के लिए करीब 25 लाख रुपये की लागत से लगाए गए 10 कंप्यूटर, दो बड़े लाइन प्रिंटर, दो छोटे प्रिंटर और एक 15 केवीए का जनरेटर लगवाया गया। इन कंप्यूटर्स पर काम करने के लिए टेंडर्स के आधार पर आपरेटर्स नियुक्त हुए थे। पहले दो साल तक कंप्यूटर ऑपरेटर्स आकाश साफ्टवेयर और बीते वर्ष दिल्ली की एकेएस साफ्टवेयर ने यह कार्य किया। वर्ष 2011 में व्यवस्था को बदलकर किसानों को गन्ने की पर्ची जारी करने का काम चीनी मिलों को सौंप दिया गया। पूर्व की व्यवस्था में कंप्यूटर्स का संचालन ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक, जिला गन्ना अधिकारी और गन्ना सोसाइटी के सचिव के पासवर्ड से होता था। बीते वर्ष पास संबंधी कोई निर्देश न होने से चीनी मिलें अपने हिसाब से काम करती रहीं। इस बार भी यही व्यवस्था चल रही है।

लाखों की चपत का है आशंका
किसान इस व्यवस्था में मिलों पर मनमानी करने की आशंका जताते रहे हैं। बीते साल सोसाइटी डायरेक्टर महेंद्र गंगवार व सतनाम ने जारी होने वाली पर्चियों में गन्ने की प्रजाति बदलकर किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया था। उन्होंने इस बार भी कहा है कि अगैती गन्ना वाले किसानों को सामान्य और सामान्य प्रजाति के गन्ना वालों को अस्वीकृत प्रजाति दर्शाकर लाखों की चपत लगाने की संभावना बनी रहती है।
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नहीं पूरी हो पाती टेंडर प्रक्रिया
सोसाइटियों के कंप्यूटर ऑपरेट करने के लिए गन्ना उपायुक्त ने तीन बार टेंडर प्रक्रिया शुरू की। कई कंपनियों ने टेंडर खरीद भी लिए, लेकिन यह प्रक्रिया हर बार बीच में ही खत्म कर दी गई। वजह कभी एक या दो कंपनियों ने ही टेंडर में भाग लिया तो कभी अन्य शर्तें पूरी नहीं हुईं।
कहते हैं जिम्मेदार

खराब हो रहे हैं कंप्यूटर

लाखों की लागत से लगे कंप्यूटर धूल और नमी से खराब हो रहे हैं। यह चालू होते तो समिति अपने स्तर से पर्चियां जारी करती। अब चीनी मिलों के कंप्यूटर से पर्चिंयां जारी होती हैं, जिसमें गड़बड़ी की संभावना रहती है। मिल के कंप्यूटर में समिति अध्यक्ष का पासवर्ड होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
विनोद गंगवार, अध्यक्ष, गन्ना विकास समिति-पीलीभीत।

गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं

चीनी मिलों से पर्चियां जारी होने में गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं है। वजह है इंडेंट समितियों से जारी होता है, जिसका रिकार्ड भी यहां रहता है। इसके बाद भी यदि कोई परिवर्तन मिल द्वारा किया जाता है तो उसकी जांच की जाएगी और दोषी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
ओमप्रकाश सिंह यादव, जिला गन्ना अधिकारी-पीलीभीत
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