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बुद्धसेन वर्मा हाथी से साइकिल पर

Pilibhit

Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बुद्धसेन वर्मा हाथी छोड़ साइकिल पर सवार हो गए हैं। उन्हें समाजवादी पार्टी ने पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया है। प्रत्याशी घोषित करने की खबर पर उनके समर्थकों में हर्ष की लहर दौड़ गई।
बसपा सरकार में अपना प्रभुत्व जमाने वाले बुद्धसेन वर्मा को सपा की पहली सूची में लोकसभा का प्रत्याशी घोषित किए जाने से जिले की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। बता दें बसपा सरकार में उन्होंने एक झटके में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर पत्नी अनीता वर्मा को आसीन करा दिया था, मगर सपा सरकार बनते ही अविश्वास प्रस्ताव में उन्हें शिकस्त मिली और पदच्युत होना पड़ा। अविश्वास प्रस्ताव के घटनाक्रम के बाद से वह शांत हो गए थे, लेकिन शुक्रवार की दोपहर बाद बल्लभनगर कॉलोनी स्थित उनके बंगले पर एक बार फिर रौनक लौट आई। वजह थी सत्तासीन दल से उन्हें सांसद प्रत्याशी के रूप में घोषित कर दिया जाना। यह खबर पल भर में पूरे शहर में फैल गई। लोगबाग मिठाई लेकर उन्हें बधाई देने पहुंचे तो उनका सेलफोन भी बिजी बताने लगा। देर रात तक उनके आवास पर मिठाई खाने और खिलाने का दौर चला। उनके कार्यकर्ताओं में भी जोश भर गया।
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पहले भी कर चुके हैं साइकिल की सवारी
बुद्धसेन वर्मा साइकिल की सवारी पहले भी कर चुके हैं। उनका राजनीतिक सफर 1990 में उनके पैतृक गांव गजरौला से शुरू हुआ। वह पहली बार गजरौला सहकारी समिति के अध्यक्ष चुने गए। 1991 में गजरौला क्षेत्र से ही जिला पंचायत के सदस्य चुने गए। उसके बाद से लगातार वह पांचवीं बार जिला पंचायत सदस्य चुने गए। 1995 में वह भाजपा प्रत्याशी के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष बने। वर्ष 2000 में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद महिला आरक्षित होने पर पत्नी अनीता वर्मा को सपा ने प्रत्याशी बनवाकर जीत हासिल की। 2007 में यूपी की सत्ता सपा से बसपा के हाथ में आ जाने के बाद वह बसपा में शामिल हो गए। 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया लेकिन सिंबल दाखिल करने से ठीक एक दिन पहले उनका टिकट काट दिया गया। अपना टिकट कटने के बाद उन्होंने बसपा से नाता नहीं तोड़ा और 2011 में बसपा से अपनी पत्नी को दोबारा जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने में सफल रहे। 2012 में सपा सत्ता में आई तो जिला पंचायत अध्यक्षों के खिलाफ चली अविश्वास प्रस्ताव की आधी में उनकी पत्नी की कुर्सी भी चली गई। उनके जीवन का यह दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका था, लेकिन मजबूत हौंसले से एक बार फिर वह सत्तासीन दल का झंडा थामने में कामयाब हो गए हैं।
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बुद्धसेन वर्मा की प्रोफाइल
पूरा नाम- बुद्धसेन वर्मा
जन्म तिथि - 28-08-1959
शिक्षा - हाईस्कूल
राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत- 1990
पेशा- कृषि
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भानू प्रताप और शम्सी से मिली प्रेरणा
बुद्धसेन वर्मा बताते हैं कि भानू प्रताप सिंह जब सांसद बने थे, तब गजरौला में उनकी खाद की दुकान थी। श्री सिंह भ्रमण पर आते तो उनकी दुकान के आगे ही चौपाल लगती थी। उन्हें लोगों की समस्याएं सुनते और समाधान कराते देख राजनीति को सेवा का माध्यम बनाने की प्रेरणा मिलती थी। शकीलउर्रहमान शम्सी को प्रेरणा स्रोत बताते हुए उन्होंने कहा कि पहली बार जिला पंचायत सदस्य बनने के बाद से श्री शम्सी ने उन्हें अध्यक्ष बनने के लिए प्रेरित किया। उनकी प्रेरणा से न सिर्फ वह स्वयं जिला पंचायत अध्यक्ष बने बल्कि पत्नी को भी अध्यक्ष बनाने में सफल रहे।
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