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कमाई का जरिया भी बनते हैं एनजीओ

Pilibhit

Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। जिले में एनजीओ का यूं तो जाल बिछा है, लेकिन कुछ ऐसी भी रहीं जिन्होंने जनता के साथ धोखा भी किया। ऐसी दो संस्थाओं के खिलाफ अतीत में मुकदमा भी हो चुका है। इसके चलते वास्तविक रूप से काम करने वाली संस्थाओं को भी बदनामी झेलनी पड़ती है।
सामाजिक उत्थान को केंद्र में रखकर बनने वाले एनजीओ का पंजीकरण बरेली स्थित सब रजिस्ट्रार कार्यालय से होता है। जिले भर में करीब 1950 एनजीओ पंजीकृत हैं। उद्देश्य सभी का समाज सेवा है, लेकिन इनमें से गिनी चुनी संस्थाएं ही अपने उद्देश्यों की पूर्ति कर रही हैं। अनेक संस्थाएं सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर रही हैं। होता यह है कि विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ से एनजीओ को काम मिल जाता है और वह कागजी कार्रवाई पूरी कर धन का बंदरबांट कर लेती हैं। चूंकि विभागीय अधिकारियों की संलिप्ता रहती है, इसलिए कब कहां किस एनजीओ ने काम कर लिया, इसकी भनक भी नहीं लग पाती।
बाराबंकी की संस्था शहीद अशफाक उल्ला खां समाज कल्याण सेवा समिति और बरेली की प्रभात किरन जन विकास संस्था के कारिंदों ने यहां महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए स्थानीय लोगों की मदद से जाल फैलाया था। महिलाओं को सिलाई कढ़ाई और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण देने के नाम पर दो से चार हजार रुपये आवेदकों से जमा करवाए गए। भरोसा दिलाया गया था कि उन्हें सिलाई मशीनें और ब्यूटीशियन किट उपलब्ध कराई जाएंगी। मुश्किल से एक माह में डेढ़ हजार महिलाएं संस्था से जुड़ गईं। लाखों रुपये इकठ्ठा होते ही एनजीओ संचालक रातोंरात फरार हो गए। ठगी का शिकार हुए लोगों ने एनजीओ के स्थानीय प्रतिनिधियों को घेरा तो एनजीओ संचालकों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत करा दिया गया। हालांकि पीड़ितों को आज तक धनराशि वापस नहीं मिल पाई।
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कुछ लोगों ने क्षेत्र में फैलाई गंदगी
समाज कल्याण विकास अध्ययन केंद्र के प्रबंधक परवेज हनीफ बताते हैं कि एनजीओ चलाना आज के दौर में बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। लोगों को बेवकूफ बनाने वालों ने इस क्षेत्र को गंदा कर दिया है। विभागों में कमीशनखोरी का बोलबाला है जिससे इस क्षेत्र में काम करने की संभावनाएं लगातार घटती जा रही हैं।
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वर्तमान में हमारे विभाग का कोई भी काम किसी एनजीओ के माध्यम से संचालित नहीं हो रहा है। पूर्व की स्थिति मेरे संज्ञान में नहीं है।
उमापति
समाज कल्याण अधिकारी
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