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तीन महीने से डकैती की योजना बना रहे थे बदमाश

Pilibhit

Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। शहर के बीचोबीच घनी आबादी वाले साहूकारा मोहल्ले में हुई पंप स्वामी के घर डकैती की घटना ने जिले में पुलिस व्यवस्था की पोल खोल दी है। वह तीन महीने से डकैती की योजना बना रहे थे। यह बात लूटपाट करते समय बदमाशों ने खुद कही। घटना के बाद से मोहल्ले के लोग खौफजदा हैं। इस घटना से शहरवासी में भी सनसनी है। लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बदमाशों ने जिस अंदाज में घटना को अंजाम दिया उससे कहीं न कहीं किसी नजदीकी के हाथ होने की बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
पेट्रोल पंप कारोबारी आलोक गोयल के मुताबिक ड्राइंग रूम में चार सेफ रखी थीं। बदमाशों ने उसी सेफ को खोला जिसमें ज्वैलरी और नगदी थी। जिस लड्डू गोपाल की मूर्ति को बदमाश ले गए वह पीतल की थी। उसे आलोक गोयल प्रतिदिन कपड़े से ढककर रखते थे। बकौल आलोक गोयल जब बदमाशों ने वह मूर्ति उठाई तो उन्होंने उसे पीतल की बताई, लेकिन बदमाशों ने कहा कि यह सोने की है। इसी की तो तलाश थी। वह तो तीन महीने से उन पर (पंप स्वामी) नजर गड़ाए थे। लैपटॉप तो पहले बदमाशों ने उठाया, लेकिन बेटी की शादी के फोटोग्राफ होने की बात कहने पर उसे वहीं रख दिया। उनकी पत्नी रश्मि गोयल बताती हैं कि जब उन्होंने चांदी के बर्तन भगवान के होने की बात कही तो बदमाशों ने उन्हें वहीं रख दिया। चांदी की मूर्तियां भी नहीं छुईं।
बेडरूम में रखी रायफल और डबल बैरलबंदूक को भी नहीं ले गए। बताया कि बदमाश आपस में एक दूसरे का नाम सलीम और अतहर ले रहे थे। इससे साफ है कि बदमाशों को घर के भीतर की हर जानकारी थी। यहां तक कि कौन सा सामान कहां और किस हालत में रखा है। पुलिस भी किसी नजदीकी के घटना में शामिल होने की बात से इंकार नहीं कर रही है।
...और बदमाशों की गंध पर भागा डॉग
बरेली से आए डॉग को जब एक्सपर्ट ने बदमाशों के मिले जूते सुंघाए तो वह उसकी गंध पर दौड़ पड़ा। बदमाश जिस रास्ते से निचले तल पर स्थित बेडरूम में पहुंचे। डॉग उसी रास्ते से सूंघते हुए घटना स्थल वाले कमरे में जा पहुंचा। इसके बाद वह घर के कई स्थानों पर चक्कर काटने के बाद मेन दरवाजे से बाहर निकल आया। फिर डॉग चौकबाजार की ओर बढ़ते हुए जेपी रोड स्थित इलाहाबाद बैंक शाखा के निकट जाकर चकरा गया। थोड़ी देर इधर-उधर घूमकर वह खड़ा हो गया। इससे पुलिस बदमाशों के इलाहाबाद बैंक तक आने की संभावना जता रही हैं।
फिं गर एक्सपर्ट ने लिए नमूने
फील्ड यूनिट के प्रभारी राधारमण सैनी के नेतृत्व में आई फोरेंसिक टीम सुबह ही घटना स्थल पर पहुंच गई। टीम ने दीवारों, दरवाजों आदि पर आए निशानों के नमूने लिए और फोटोग्राफ्स कराकर नमूने लेने के बाद टीम वापस लौट गई।
....और नहीं उठा 100 नंबर
बदमाशों के लूटपाट कर जाने के बाद जब मोहल्ले वालों को घटना की जानकारी हुई तो मोहल्ले के कुछ लोगों ने इसकी सूचना कोतवाली में स्थित सिटी कंट्रोल के 100 नंबर देने के लिए कॉल की, लेकिन यह नंबर नहीं उठा। कंट्रोल रूम का नंबर न लगने पर मोहल्ले के ही डॉ डीके त्यागी कोतवाली पहुंचे और घटना की जानकारी दी। तब जाकर सक्रिय हुई पुलिस की गाड़ियां हूटर बजाते हुए सड़कों पर दौड़ पड़ी।
नहीं मिली लोकेशन
सिटी कंट्रोल रूम हर घंटे पर चौकी प्रभारियों की लोकेशन की जानकारी लेता है। रात करीब तीन बजे सिटी कंट्रोल रूम से चौकी इंचार्जों की लोकेशन के लिए वायरलेस सेट गूंजता रहा, लेकिन किसी चौकी इंचार्ज ने अपनी लोकेशन नहीं बताई। इससे साफ है कि पुलिस ड्यूटी के प्रति कितनी सजग है।
सवालों की घेरे में पिकेट
पीलीभीत। घटना से पिकेट ड्यूटी सवालों में है। साहूकारा मोहल्ले में पंप स्वामी आलोक गोयल का आवास जहां है। उससे करीब चार फर्लांग दूर कोतवाली है। घटनास्थल से करीब ढाई सौ से लेकर तीन सौ मीटर की दूरी पर स्थित चौक बाजार, छिपियान चौराहा, ड्रमंडगंज चौराहा जमुनी चौराहा और जेपी रोड पर इलाहाबाद बैंक के निकट पुलिस पिकेट ड्यूटी लगती है। अगर चौराहों पर पुलिस मौजूद होती तो बदमाश घटना को अंजाम देने का साहस नहीं जुटा पाते। खोजी कुतिया बदमाशों के जाने वाले रास्ते पर जहां पर जाकर रुकी उस इलाहाबाद बैंक वाले स्थान पर पुलिस पिकेट तैनात रहती है। सवाल उठता है कि अगर घटना की रात पिकेट तैनात थी तो वहां तक आने वाले बदमाश कैसे भाग निकले
बारह के बाद चौराहे पर दिखते होमगार्ड
नए पुलिसकर्मी नहीं जानते गश्त सिस्टम
पीलीभीत। जिले में पुलिस का गश्त सिस्टम अंग्रेजों के जमाने का है। इसे चार भागों में बांटा गया था। कस्बा गश्त, बाजार गश्त और मिलान गश्त के लिए पुलिस पार्टी बनाई जाती थीं। शाम ढलने से पहले इन पार्टियों की थाने से रवानगी होती थी। मौसम के हिसाब से इनका समय अलग-अलग होता था। सभी गश्त पार्टियों के लिये कोड निर्धारित होते थे। इन पार्टियों का बाकायदा रूट निर्धारित किया जाता था। निश्चित टाइम पर गश्त पार्टियों को एक दूसरे को पास करना होता था। यदि कोई पार्टी नहीं मिलती थी तो इसकी सूचना मिलान गश्त पार्टी को दी जाती थी। बार्डर गश्त पार्टी दूसरे थाने की टीम से मिलती थी। इनमें बार्डर क गश्त को तो वाहन मिलता था। इसके अलावा कस्बा व मिलान की गश्त साइकिल व बाजार गश्त पैदल होती थी। ये टीमें एक-दूसरे से सूचनाओं का आदान प्रदान करती थी। समय बीतने के साथ ये पूरा गश्त सिस्टम खत्म सा हो गया है। अब गश्त की कवायद बस पुलिसकर्मियों की सड़कों पर दिखने तक सीमित रहती है, लेकिन पिछले कुछ समय यह भी शहर में दिखना बंद हो गया है।
बीटीएस टॉवर बनेंगा खाकी का ब्राहस्त्र
पीलीभीत। डाके की घटना को खोलने के लिए बीटीएस (बेस टर्मिनल सिस्टम) की भी मदद ली जा रही है, लेकिन यहां की पुलिस को यह किसी मकड़जाल से कम नहीं होगा। वारदात के समय के बीच प्राइवेट कंपनियों और सरकारी कंपनियों के लगे बीटीसी टॉवरों में घटना के समय का कॉल रिकार्ड क्लेक्ट किया जा रहा है। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश अपने साथ दोनों मोबाइल लेकर गए हैं।
पीड़ित स्वामी के घर के आसपास कई निजी और सरकारी संचार कंपनियों के टॉवर लगे हुए हैं। पीड़ित स्वामी के अनुसार घटना का समय रात ढाई से सुबह के साढ़े तीन बजे का है। उस दौरान क्षेत्र में स्थित एक घंटे में बीटीएस टॉवरों ने किन-किन उपभोक्ताओं को रेंज उपलब्ध कराकर कॉल सेवा उपलब्ध कराई है। अगर वारदात के समय बदमाशों ने अपने साथियों से बातचीत की है तो पुलिस को देर सबेर इस कार्य में अवश्य ही सफलता मिलने की उम्मीद लगाई जा रही है। कारण साफ है कि किस कंपनी के सिम ने कौन सा बीटीएस सिगनल को पकड़ा है। विशेषज्ञों की मानें यह प्रक्रिया काफी लेंथी है, अगर इस पर तकनीकी तरह से कार्य किया गया है, तो घटना का पर्दाफाश जल्द होगा।
हैलो सलीम भाई ! काम हो गया
पीलीभीत। नाकाबपोश बदमाशों की उम्र 18 से 20 साल। हाथ में लोहे की राड और देशी तमंचा। वारदात के समय अजय गोयल के सिर पर रॉड मारने के बाद एक बदमाश के मोबाइल पर फोन आया बोला सलीम भाई .... काम हो गया है। मात्र आठ से दस सेकेंड की वार्ता ने पुलिस को मुश्किलों में डाल दिया है।आखिर यह सलीम कौन है उसे श्री गोयल के घर की इतनी जानकारी कैसे है। घटना के समय सलीम नाम आने से वर्कआउट में एक नया मोड़ आ गया है।
कभी सोचा भी न था
पड़ोस में रहने वाले डॉ डीके त्यागी ने कहा कि इतने सेफ मुहल्ले में इस तरह की वारदात उनके समय में कभी नहीं हुई। क्राइम कंट्रोल सिस्टम जिले में लगभग फेल सा हो चुका है।
हर्षवर्द्घन पांडेय ने कहा कि इस तरह की वारदात से मन में खौफ बैठा गया है। घटना का वर्कआउट जल्द होना चाहिए। बदमाशों ने माल लूटने के बाद प्रहार कर घायल करने की वारदात से मुहल्लेवासियों के मन में खौफ पैदा कर दिया।
पश्चिमी उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष अश्विनी अग्रवाल ने कहा कि अगर मामले में कोई भी ढील बरती गई तो समाज के लोग एकजुट होकर इसका पुलिस व्यवस्था का विरोध करेंगे।
राकेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि यह मुहल्ला शहर के सबसे सेफ मुहल्लों में से एक था। इस पर बदमाशों ने वारदात को अंजाम दे दिया। घटना के बाद से आमआदमी से लेकर उच्च वर्ग की सुरक्षा पर भी संदेह हो गया।
सर्राफा एसोसिएशन के मंत्री शैली अग्रवाल ने कहा कि अगर वर्कआउट जल्दी नहीं हुआ तो समाज के सभी लोग एकजुट हो जाएंगे। व्यापारी वर्ग पर इस तरह का हमला तो निदंनीय है।
सभासद पुष्पा उपाध्याय ने कहा कि इस तरह की घटना पहली बार यहां हुई है। पुलिस गश्त तो कभी लगती नहीं है। पिकेट ड्यूटी को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
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