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अब पूर्व अध्यक्ष के नाम पर कालिख!

Pilibhit

Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष अनीता वर्मा के नाम पर कालिख पोत दी गई है। इसकी जिले भर में चर्चा है। बुद्धिजीवियों ने इसे राजनीतिक ड्रामा करार दिया है।
जिला पंचायत पर बुद्धसेन वर्मा का तीन बार कब्जा रहा। पहली बार बुद्धसेन वर्ष 2006 में भाजपा से जिला पंचायत अध्यक्ष बने। दूसरी बार उन्होंने 2005 में सपा से पत्नी अनीता वर्मा को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन कराया। तीसरी बार उन्होंने फिर खेमा बदला और बसपा से पत्नी अनीता को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवा दिया। अपने रसूख के बलबूते उन्होंने सबसे व्यस्ततम स्थान टनकपुर रोड पर कांशीराम बारात घर का लोकार्पण 26 मार्च 2010 को कराया। बारात घर पर संस्थापक के रूप में अनीता वर्मा अध्यक्ष जिला पंचायत का नाम लिखा था। प्रदेश की सत्ता का निजाम बदला और विधायक तथा राज्य मंत्री रियाज अहमद ने 26 जून 2012 को बेटी रुकैय्याबी के पक्ष में अनीता वर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करा दिया। इसके बाद 08 जुलाई 12 को त्रिसदस्यीय अध्यक्षीय अधिकार समिति बनी, जिसकी बागडोर रुकैय्याबी के हाथों में है।
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आहत हुए बुद्धिजीवी-राजनेता
1
नाम पर कालिख देखकर आहत हुआ मन
राजनीति में कालिख पोतने का फैशन चल गया है। कांशीराम बारातघर पर पूर्व अध्यक्ष के नाम पर कालिख पोता जाना उचित नहीं कहा जा सकता। राजनीति का यह विकृत स्वरूप है। नाम पर कालिख देखने मात्र से मन आहत हो जाता है।
एमएल शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता/कवि।
2
राजनीति का मखौल बना रहे नेता
1990 के दशक में जिला पंचायत के अध्यक्ष रहे 80 वर्षीय पोथीराम गंगवार का कहना है कि आज के नेता राजनीति का मखौल बना रहे हैं। वह विकास की नहीं दूसरे को नीचा दिखाने की राजनीति कर रहे हैं। यह घोर निंदनीय है।
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सत्ता का जमकर हो रहा दुरुपयोग
पूर्व अध्यक्ष अनीता वर्मा ने कहा कि कालिख पोतने का काम सत्ता का खुला दुरुपयोग है। बदले की भावना से कार्रवाई हो रही है। बोर्ड की बैठक में नाम पर कालिख पोतने का कोई भी प्रस्ताव पास नहीं हुआ है। सही मौके पर सभी हरकतों का जवाब दिया जाएगा।
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वर्जन
जिला पंचायत की त्रिस्तरीय अध्यक्षीय अधिकार समिति की अध्यक्षता में हुई बोर्ड की बैठक में पूर्व अध्यक्ष द्वारा भवनों और शिलापटों पर लिखवाए गए अनाधिकृत नाम हटवाने का निर्णय लिया गया था। कांशीराम बारातघर जिला पंचायत का है, उस पर संस्थापक के तौर पर पूर्व अध्यक्ष का नाम उचित नहीं है। बोर्ड के निर्णय पर नाम न दिखे, इसलिए फिलहाल काले रंग से पोता गया है।
प्रदीप गुप्ता, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत।
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