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बाघ को आदमखोर घोषित करो, माले का प्रदर्शन

Pilibhit

Updated Sat, 08 Sep 2012 12:00 PM IST
पूरनपुर। भाकपा (माले) कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों ने बाघ को आदमखोर घोषित करने, बाघ द्वारा मारे गए लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख, घायलों को एक-एक लाख और पशुओं की मौत पर उनका मुआवजा देने की मांग को लेकर हरीपुर रेंज कार्यालय गेट पर धरना- प्रदर्शन किया। डीएम को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। इसी बीच मां-बेटी पर बाघ के हमले की सूचना पर जाम लगाया। सीओ के नेतृत्व में पुलिस टीम ने डंडा फटकार कर उनको खदेड़ तो सीओ के साथ प्रदर्शनकारियों की नोकझोंक भी हुई।
भाकपा माले नेताओं के नेतृत्व में बिलहरी, जटपुरा, गजरौला, लाह, रुदपुर, नौगवां, शेरपुर के कई लोग धरना-प्रदर्शन को एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने धरना देकर सभा की। डीएम को संबोधित ज्ञापन एसडीएम रामप्रकाश को सौपा। इस दौरान बाघ के हमले की सूचना पर प्रदर्शनकारियों ने जाम लगाकर प्रदर्शन किया। मौके पर पहुंचे सीओ इकपाल सिंह के नेतृत्व मेें पुलिस टीम ने जाम खुलवाने को प्रदर्शनकारियों पर डंडे फटकारे। इससे प्रदर्शनकारियों में भगदड़ मच गई। भाकपा नेता सीओ से भिड़ गए।
ज्ञापन में बाघ को आदमखोर घोषित करने, बाघ के हमले से मारे गए लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख मुआवजा देने, मारे गए पशुओं को किसानों को मुआवजा देने आदि की मांग की गई। सभा में भाकपा नेता अलाउद्दीन शास्त्री, अफरोज आलम, देवीदयाल, विकास सरकार, देवाशीष राय, अर्जुन सिंह, घनश्याम, बाबा रामदेव के समर्थक चैतन्य देव मिश्र आदि ने विचार रखे। चैतन्य देव ने बताया कि बाघ शीघ्र न पकड़े जाने पर वे बेमियादी अनशन शीघ्र शुरू करेंगे। इधर, भाकपा माले नेता अफरोज आलम ने बताया कि बाघ शीघ्र ट्रैंकुलाइज न होने पर 13 सितंबर से एसडीएम कार्यालय में बेमियादी भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।

जाम लगाकर पुलिस पर पथराव करना पड़ा मंहगा
पूरनपुर। आसाम रोड पर दो दिन पूर्व जाम लगाकर प्रदर्शन करना, पुलिस कर्मियों पर पथराव कर एक दरोगा की बाइक और कोतवाल की जीप को क्षतिग्रस्त करना प्रदर्शनकारियों को महंगा पड़ गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार रोड जामकर प्रदर्शन करने वाले 18 लोगोें के खिलाफ बलवा आदि के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई है। हालांकि इंस्पेक्टर राजा सिंह के अनुसार अभी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है लेकिन कार्रवाई अवश्य की जाएगी।

हर तरफ दहशत, चौपट हो गई खेती-किसानी
दिन का चैन और रात की नींद उड़ी, खेतों में लाठी, डंडे लेकर जाते हैं लोग
ढोल और पीपा बजाकर रात को करते हैं सुरक्षा
पूरनपुर। बाघ के हमलों की हर तरफ दहशत है। शाम होते ही गलियां सूनी हो जा रही हैं। छतों पर ढोल और पीपा बजाकर बाघ को दूर रखने का प्रयास करते हैं। खेतों में लाठी डंडा लेकर ही जाना हो रहा है। ज्यादातर लोग खेतों की ओर कम ही रुख कर रहे हैं। इस कारण फसलें चौपट हो रही हैं। पशुओं को चराने के लिए खेत में न ले जा पाने से उन्हें हरा चारा नहीं मिल रहा है।
क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों में बाघ की भारी दहशत है। इन दिनों घरों-चौपालों में बातचीत का मुख्य मुद्दा बाघ ही है। लोग इससे सुरक्षा को लेकर रणनीति पर चर्चा करते हैं। गांव जटपुरा के बुजुर्ग विश्वनाथ सिंह के अनुसार बाघ से बचने को किसान गांव से चार-पांच का समूह बनाकर ही निकल रहे है। खेतों में ऐसे काम करते हैं कि एक-दूसरे पर सभी की नजर रहे।
गांव बिलहरी के मुक्ता प्रसाद ने बताया कि गांव में अधिकांश लोगों के घर खुले हैं। बाघ कहीं रात को घर में न घुस आए, इस डर से लोग ठीक से सो नहीं पा रहे हैँ। परिवार के सदस्यों की रात में जागने को ड्यूटी लगाई जाती है। गांव गजरौला के रामचंद्र ने बताया कि बाघ तो उनके गांव के आसपास ही घूमता रहता है। बाघ के भय से लोग गांव के दूर वाले खेतोें में नहीं जा पा रहे है। पशुओें को चरने की छूट नहीं मिल पा रही है। शोर-शराबा कर पटाखे दागकर, ढपला और पीपा बजाकर लोग रात काटने को मजबूर हो रहे हैं।

हथियार साथ रखने में भी घबराते हैं लोग
पूरनपुर। जटपुरा और शेरपुर के कुछ बुजुर्गों ने बताया कि बाघ पहले भी जंगल से निकलकर गांवों की ओर आ जाते थे। तब हथियारों के बल पर उसे जंगल में खदेड़ दिया जाता था। अब लोग हथियार रखने में भी घबराते हैं क्योंकि बाघ को कुछ हो गया तो हथियार वाले निर्दोष लोग भी नप सकते हैं।

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जोखिम भरा होता है बाघ को ट्रैंकुलाइज करना
लखनऊ से आए एक्सपर्ट डा. शुक्ला से बातचीत
अमर उजाला नेटवर्क
पूरनपुर। लखनऊ से आए ट्रैंकुलाइजिंग एक्सपर्ट डॉ. उत्कर्ष शुक्ला कहते है कि बाघ को ट्रैंकुलाइज करना तकनीकी और जोखिम भरा होता है। स्पष्ट दिखाई देने पर तीस से पचास मीटर की दूरी से बाघ को ट्रैंकुलाइज किया जा सकता है।
श्री शुक्ला देश के विभिन्न हिस्सों मेें अब तक कई तेंदुओं, बाघों, गैंडों को ट्रैंकुलाइज कर चुके हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होेंने बताया कि छोटी लोकेशन में बाघ को हाथी और अधिक स्थान की लोकेशन पर बाघ को ट्रैंकुलाइज वैन से ट्रैंकुलाइज किया जाता है। बाघ को रात में ट्रैंकुलाइज करने से बचना चाहिए। ऐसे में बाघ के छिपने और हमले की आशंका बढ़ जाती है। ट्रैंकुलाइज करते वक्त भीड़ एकत्र नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाघ ऐसा प्राणी नहीं कि कान पकड़ कर उसे जंगल में छोड़ा जाए। बाघ को ट्रैंकुलाइज करना तकनीकी और जोखिम भरा होता है।


मैन किलर की पहचान तक नहीं हो सकी
अफसरों की आंखों को धोखा दे रहा ‘किलर’ बाघ
हमले के 24 घंटे में बाघ की पहचान होनी चाहिए
पहली मौत के 18 दिन बाद भी पहचान नहीं कर पाए
मॉनीटरिंग, प्रारंभिक जांच और रणनीति में भी चुप्पी
सिटी रिपोर्टर
पीलीभीत। आतंक का पर्याय बना बाघ 18 दिन में तीन लोगों को मार चुका है। वह खेतों से लेकर आबादी तक में देखा जा रहा है, लेकिन मॉनीटरिंग का दावा करने वाले वन अधिकारियों के पास अभी तक यह जानकारी नहीं है कि आखिर ‘किलर’ बाघ है कौन। बाघ को पकड़ने के लिए आए विशेषज्ञ जब किलर बाघ की पहचान बताने को कहते हैं तो वन अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं।
प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) लखनऊ रूपकडे के अनुसार जंगल से बाहर बाघ के निकलते ही उसके पंजे ट्रेस करने का प्रावधान है। उन पंजों पर वन कर्मियों की गिद्ध दृष्टि होनी चाहिए। इस तरह बाघ की मॉनीटरिंग की शुरुआत होती है। यदि बाघ किसी इंसान पर हमला कर देता है अथवा उसे निवाला बना लेता है तो उसकी पहचान 24 घंटे में हो जानी चाहिए। मुंह में इंसानी खून लगने से बाघ खतरनाक हो जाता है। ऐसे बाघ की पहचान की डीएफओ से लेकर वाचर तक को निभानी होती है।
पीलीभीत के वन अधिकारियों और कर्मचारियों की चुस्ती का आलम यह है कि एक व्यक्ति की मौत के 18 दिन बाद भी वह मारने वाले बाघ की पहचान नहीं कर पाए हैं। हाल में हुई दोनों मौतों को भी 60 और 40 घंटे बीत गए हैं, लेकिन वन अधिकारियों की आंख ‘किलर’ बाघ को नहीं पहचान सकी है।
डीएफओ सामाजिक वानिकी एके सिंह से जब बाघ की पहचान की बावत पूछा गया तो वह कहते हैं कि अभी पहचान नहीं हो सकी है। वह कढ़ेरचौरा वाले बाघ का उदाहरण जरूर देते हैं, जिसकी पहचान कर ली गई थी। उनसे यह पूछे जाने पर कि 21 अगस्त को गजरौला खास निवासी 48 वर्षीय फूलमती को मारने वाले बाघ की पहचान हुई या नहीं? बोले, समय नहीं मिला।

इनसेट........
कैसे होती है पहचान
1. हर बाघ में अलग तरह की धारियां होती हैं।
2.बाघ के पद चिन्ह भी अलग-अलग होते हैं।

इंसानी खून को दुर्घटना मान रहा महकमा
18 दिनों में बाघ के हमलों से तीन जानें चली गईं, लेकिन महकमे के अधिकारी इसे दुर्घटना मान रहे हैं। डीएफओ सामाजिक वानिकी एके सिंह के अनुसार बाघ के हमले दो प्रकार के होते हैं, पहला वह शौच करते अथवा खेतों में काम करते वक्त मनुष्य पर हमला कर दे। यह दुर्घटना की श्रेणी में आता है। दूसरा उसके मुंह में इंसानी खून लग जाए। फिलहाल अभी तक हुई घटनाएं दुर्घटना प्रतीत होती हैं।


...तो बाघ नहीं घोषित होगा नरभक्षी!
इस्लामुद्दीन खां
माधोटांडा। यदि टाइगर जंगल से बाहर निकलकर मानव को शिकार बना रहा हो, तो ऐसी दशा में प्रमुख वन संरक्षक वन्य-जीव अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए उसे नरभक्षी घोषित कर मारने की अनुमति दे सकते हैं। लेकिन यहां वन विभाग ने लगातार हो रहे हमलों और मानव को शिकार बनाने के मामले में इस संभावना पर यह कहकर विराम लगा दिया है कि हमला करने वाले एक नहीं कई टाइगर हैं।
जंगल क्षेत्र में यदि टाइगर मानव को शिकार बनाता है तो ऐसी दशा में उसे नरभक्षी घोषित करने को प्रमुख वन संरक्षक वन्य-जीव को इंतजार करना पड़ता है। जब तक सात-आठ लोग शिकार न हो जाएं तथा उसके पकड़े जाने की उम्मीद समाप्त न हो जाए, टाइगर को नरभक्षी घोषित नहीं किया जा सकता है। नरभक्षी घोषित करने में जल्दबाजी करने पर इस दुर्लभ प्राणी की सुरक्षा और संवर्धन के मामले में जुटे लोग शोर मचाने लगते हैं
इसके विपरीत यदि टाइगर जंगल से बाहर निकलकर आबादी वाले इलाके में मानव को शिकार बना लेता है तो उसका आतंक बढ़ जाता है। ऐसी दशा में प्रमुख वन संरक्षक वन्य-जीव अपने विवेक से टाइगर को नरभक्षी घोषित कर मारने की अनुमति दे सकते हैं। ग्रामीणों के अनुसार पूरनपुर के खमरिया और रुरिया क्षेत्र में 24 घंटों में दो लोगों को शिकार बनाने वाला बाघ एक ही है। ये दोनों घटनाएं करीब सात किलोमीटर के दायरे में घटी हैं। दूसरी तरफ वन विभाग वाले इस नतीजे तक नहीं पहुंचे कि हमले करने वाले बाघ कितने हैं? हालांकि विभाग के मुखिया ने आबादी में घूम रहे बाघों की संख्या चार बताकर नरभक्षी घोषित किए जाने की संभावना को एक तरह से विराम लगा दिया है।

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मां-बेटी पर झपटा बाघ
साइकिल से लौट रहे किशोर को दौड़ाया
एक्सपर्ट पहुंचे, नहीं मिला बाघ
अमर उजाला नेटवर्क
पूरनपुर। 24 घंटे में दो लोगों को मार डालने के बाद बाघ ने शुक्रवार को खेत में गई मां-बेटी को दौड़ाया। बाघ के हमले से दोनों बाल-बाल बच गई। एक अन्य स्थान पर साइकिल से घर लौट रहे किशोर पर बाघ झपटा। बाघ के खेत में होने की जानकारी पर ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट हाथियों पर सवार होकर खेत में गए, लेकिन बाघ नहीं मिल सका।
घटना हरीपुर रेंज कार्यालय से एक फर्लांग दूर की है। शुक्रवार को दुपहर बाद करीब डेढ़ बजे हरीपुर कॉलोनी के रामभजन की पत्नी 45 वर्षीय धनदेवी और उनकी बेटी 24 वर्षीय मिथलेश गांव के समीप गन्ने के खेत में थीं। धनदेवी ने बताया कि जटपुरा-हरीपुर के गुरुमेज सिंह के गन्ने के खेत से निकले बाघ ने उन पर झपट्टा मारा। आहट पर दोनोें चीखकर अलग-अलग दिशाओं में भागीं। बाघ मिथलेश से कुछ ही कदम दूर रह गया। हालांकि आगे खतरा भांप बाघ पीछा करना छोड़ लौट गया। बाघ को पकड़वाने की मांग को लेकर रेंज कार्यालय पर प्रदर्शन के बाद एसडीएम को ज्ञापन देने गए लोग मौके पर पहुंचे। ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट भी हाथियों पर सवार होकर खेत में जा पहुंचे। खेत के चारों ओर चक्कर काटने के बाद बाघ को मौजूद न पाकर वे वापस लौट गए। ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट डॉ. सौरभ सिंघवी ने बताया कि खेत में बाघ की लोकेशन नहीं मिली। उन्होंने बताया कि खेत में घुसने को लेकर कुछ लोग विरोध भी कर रहे थे। उधर, बाघ ने गजरौला खास के एक किशोर को गांव के बाहर झुकनइया नदी के पास उस समय दौड़ा दिया, जब वह साइकिल से खेत से घर लौट रहा था। किशोर ने दौड़ लगाकर बमुश्किल अपनी जान बचाई।

खबर का इंसेट:
दहाड़ा बाघ तो महिलाओं में मची भगदड़
पूरनपुर/अमरैयाकलां। गांव अमरैयाकलां के सुरजीत सिंह की पत्नी पुष्पा देवी, ख्यालीराम की पत्नी सरला देवी, रामवहादुर की पत्नी सावित्री देवी, नोखेलाल की पत्नी कमला देवी शुक्रवार को अपरान्ह गांव के पूरब पशुओं के लिए घास काटने गई थी। गन्ने के खेत से निकले बाघ पर महिलाओं की नजर पड़ गई। पुष्पा देवी, सावित्री ने बताया कि इनसानों को देख बाघ दहाड़ उठा। भय के चलते महिलाओं में भगदड़ मच गई। घर पहुंची महिलाएं गश खाकर गिर गई। घटना की जानकारी पर तमाम लोग मौके पर पहुंचे। लोगों ने खेत के समीप बाघ के पद चिन्ह भी देखे, लेकिन बाघ नहीं मिला।
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पूरनपुर-माधोटांडा रोड पर टहलता रहा बाघ
वनकर्मियों के पहुंचने से पहले हुआ गायब, पद चिन्ह मिले
गांव खमरिया में पूरी रात बाघ की आहट पर होता रहा शोर-शराबा
अमर उजाला नेटवर्क
पूरनपुर। माधोटांडा-पूरनपुर रोड पर बाघ अपने किए गए शिकार की तलाश मेें जा पहुंचा। करीब एक घंटा तक बाघ शिकार की तलाश में घूमता रहा। खमरिया में बाघ के आने की आहट पर पूरी रात शोर-शराबा होता रहा।
रुरिया सलेमपुर की सिमरता देवी को बाघ ने एक दिन पूर्व माधोटांडा-पूरनपुर मार्ग के किनारे झाड़ियों में मार कर डाला था। मारे गए शिकार को खाने को बाघ गुरुवार की रात करीब साढ़े नौ बजे जा धमका। बताया जा रहा है कि करीब एक घंटा तक वह शिकार को ढूंढ़ता रहा। सूचना पर सामाजिक वानिकी के डिप्टी रेंजर एसके वर्मा टीम के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बाघ जा चुका था। वर्मा ने बाघ के पद चिन्ह मिलने की पुष्टि की है। रात में गांव खमरिया मेें बाघ घुस आने की आहट पर शोर-शराबा शुरू हो गया। आधी रात को शाहजहांपुर डीएफओ एपी सिन्हा, सामाजिक वानिकी के डिप्टी रेंजर एसके वर्मा टीम के साथ मौके पर पहुंचे। डिप्टी रेंजर ने बताया कि गांव में बाघ आने के शक में ही लोग शोर-शराबा करने लगे थे।
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