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बाघ चालाक, कर रहा बुजुर्गों पर हमला

Pilibhit

Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। पर्यावरण और वन्य जंतु प्रेमी टीएच खान का कहना है कि बाघ एक चालाक जंतु है। वह सदैव अपने शिकार को भलीभांति समझकर हमला करता है। उनका दावा है कि अब तक बाघ ने जिन लोगों को अपना निवाला बनाया है, वह 50 से अधिक की उम्र के हैं। बाघ जब यह समझ लेता है कि उसका शिकार उस पर हमला नहीं करेगा तभी हमलावर होता है। जिन युवाओं पर बाघ ने हमला किया, बाघ उन्हें मार नहीं सका। वह यह भी बताते हैं कि बाघ गन्ने के खेत में पहुंचकर उसे जंगल समझ लेता है और बेफिक्र होकर सोता है तथा शिकार भी कर रहा है।
विशेषज्ञ बोले, जंगल से भटक गए हैं बाघ
तराई आर्कलैंडस्केप के यूपी और उत्तराखंड हेड डॉ. हरीश गुलरिया का कहना है कि पीलीभीत में बाघों के हमले की वजह कोई बड़ी नहीं है। बाघ मॉनीटरिंग के अभाव अथवा अन्य कारणों से जंगल के बाहर आ गए हैं। चूंकि बाहरी परिवेश में गन्ना आदि फसलें खड़ी हैं, जो बाघ को जंगल जैसी दिख रही हैं। बाघ अपने शिकार को भी जंगल में ही खाना पसंद करता है, यहां गन्ने का खेत आदि मिल रहा है तो वह उसी में निवाला बनाता है। बाघ अपने शिकार का खून पीने के बाद सो जाता है और चार घंटे बाद वह नम मिट्टी की तलाश करता है। ऐसे में जंगल के बाहर लोगों के दिखाई पड़ने पर वह बिदक जाता है और फिर जंगल वापस लौटने के बजाय आबादी में ही भटकता रहता है। वन्य जंतुओं के विशेषज्ञ डॉ. मुदित गुप्ता बताते हैं कि बाघ जंगल से भटक गए है। उन्हें तत्काल जंगल में पहुंचाया जाना चाहिए। अब वक्त फसलों के कटने का आ रहा है। उसके बाद बाघों पर अपने आप नियंत्रण हो जाएगा।
बाघों और इंसान की सुरक्षा में हुई लापरवाही :वरुण
पीलीभीत। बाघों के लगातार हमले और उससे होने वाली मौतों की बाबत सांसद वरुण गांधी का कहना है कि इसमें वन महकमे ने लापरवाही बरती है। पूरा मामला समझा नहीं है, इसलिए यही कहूंगा बाघ और इंसान दोनों की सुरक्षा जरूरी है, जिसे हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि अब तक बाघों की भी मौतें हुई हैं और बाघ ने लोगों का भी शिकार किया है। दोनों मामलों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और इसमें लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
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भाकियू और भाकपा ने दी आंदोलन की चेतावनी
रेंज कार्यालय हरीपुर में भाकपा का प्रदर्शन आज
बाघ न पकड़ा तो भाकियू 15 से देगी धरना
पीलीभीत। बाघ के हमलों के खिलाफ भाकपा माले और भाकियू ने अलग-अलग आंदोलन चलाने की रणनीति बनाई है। भाकपा ने आज हरीपुर रेंज ऑफिस के बाहर प्रदर्शन का ऐलान किया है, जबकि भाकियू ने 15 से धरना शुरू करने की चेतावनी दी है।
भाकपा माले राज्य स्थायी समिति के सदस्य अफरोज आलम ने कहा कि तीन माह में बाघों के आतंक से कई लोग मारे जा चुके हैं। सरकार हमलावर बाघों को आदमखोर घोषित करे। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को हरीपुर रेंज कार्यालय पर भाकपा माले प्रदर्शन करेगी।
पूरनपुर तहसील कार्यालय में भाकियू के प्रांतीय उपाध्यक्ष कुंवर योगेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई पंचायत में बाघों के आतंक पर रोष व्यक्त किया गया। तय हुआ कि क्षेत्र में घूम रहे सभी बाघ14 सितंबर तक न पकड़े जाने पर 15 सितंबर को एसडीएम कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन कर धरना दिया जाएगा। पंचायत में योगेंद्र सिंह, मंडल सचिव रामकुमार, जिला उपाध्यक्ष मंजीत सिंह, जाहिद नूर सिद्दीकी, सुल्तान खां, नरेंद्र सिंह खैरा, डा. हरपूर सिंह, सूरत सिंह, दन्नू लाल, रामकुमार राठौर, रमेश मिश्रा, जगदेव शुक्ला, भोलाराम, किशन सिंह, दाताराम, पुष्पा अवस्थी, बालकराम आदि थे।
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कब आए एक्सपर्ट और कब वापस गए
02 जून 12 : एक्सपर्ट डॉ. सौरभ सिंघवी और डब्ल्यूटीआई के प्रेमचंद पांडेय आए, लेकिन संसाधनों का अभाव रहा। एक्सपर्ट ने मांगे हाथी।
04 जून : गायब हुए एक्सपर्ट और बाघ रहा घूमता।
13 जून : बाघ को ट्रैंकुलाइज कराने को आए हाथी।
21 जून : ट्रैंकुलाइज कर लिया गया बाघ।
15 जुलाई : एक्सपर्ट डॉ. शहनवाज आए।
04 अगस्त : बजट के अभाव में हाथी नहीं आए, टीम हुई वापस।
24 अगस्त : बाघ को ट्रैंकुलाइज कराने को पवनकली और गंगाकली आई (हथनियों के नाम)।
25 अगस्त : डॉ. सौरभ सिंघवी खाली हाथ आए।
06 अगस्त : रेंजर ट्रैंकुलाइज गन लखनऊ लेने गए और शाम को लौटे।
02 सितंबर : ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट बगैर बताए हुए गायब।
06 सितंबर : ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट और डब्ल्यूटीआई के प्रेमचंद पांडेय आए।

पटाखे दागकर जटपुरा क्षेत्र से खदेड़ा बाघ
पूरनपुर। जटपुरा गांव के समीप खेतों में छिपे बाघ को बुधवार को देरशाम पटाखे दागकर लोगों ने भगा दिया। गुरुवार को बाघ की लोकेशन जटपुरा क्षेत्र में नहीं मिली। हालांकि बाघ की लोकेशन आदि जानने को कर्मचारी भी क्षेत्र में नहीं पहुंचे। मालूम हो कि बाघ जटपुरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से आतंक मचाए हुए थे। बुधवार को उसने गांव के छोटे शाह पर हमला कर लहूलुहान कर दिया था।
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बाघ के हमलों से नाराज हैं गांवों के जनप्रतिनिधि
पूरनपुर। गांवों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग इन हमलों से खासे खफा हैं। जिन इलाकों में बाघ की दहशत है, वहां के वर्तमान और पूर्व के प्रतिनिधियों से बात की गई तो उन्होंने वन अधिकारियों के खिलाफ रोष जताते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रस्तुत है उनसे बातचीत :-

अब तक हुई खानापूरी
बाघ की लोकेशन जानने के नाम पर अब तक खाना पूरी की गई। लोकेशन को लगाए गए कर्मचारी मात्र सूचना मिलने पर ही पहुंचे रहे। अफसरों ने भी बाघ को ट्रैंकुलाइज कराने को दिलचस्पी नहीं दिखाई।
विपिन सिंह, प्रधान जटपुरा।
दिलचस्पी होती तो आड़े न आता गन्ना
06 पीबीटीपी 33
बाघ ट्रैंकुलाइज कराने में अगर वन विभाग के अफसरों ने शुरू से दिलचस्पी दिखाई होती। तब आज आड़े आ रहा गन्ना नहीं आता। गन्ना बड़ा होने से पहले से ही बाघ क्षेत्र मेें घूम रहे है। तब बाघ ट्रैकुलाइज करने का एक्सपर्ट बुलाए गए, लेकिन हाथी नहीं बुलाए गए थे।
इजहार अली, पूर्व प्रधान टंडोला

संसाधन जुटाने में हुई लापरवाही
बाघ ट्रैंकु लाइज न होना अफसरों की लापरवाही रही। बाघ को ट्रैंकुलाइज की स्वीकृत मिलने के बाद अफसर संसाधन नहीं जुटा सके। एक बार तो बगैर ट्रैंकुलाइज गन के ही एक्सपर्ट यहां पहुंच गए।
अनवर, पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख, शेरपुर कलां।
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कभी सतर्क नहीं हुए अफसर
बाघ को लेकर अफसर खासे सतर्क कभी नहीं रहे। बाघ का हमला हुआ तब बाद में अफसरों ने सांत्वना व्यक्त की। बाघ को ट्रैंकुलाइज कराने को अफसरों के मौजूद न रहने पर कई बार मौका हाथ से निकल गया। अफसरों ने लोकेशन पर कर्मचारियों के तैनात करने का तर्क तो दिया, लेकिन ड्यूटी पर लगाए कर्मचारियों की चेकिंग कभी नहीं कराई।
दुर्गा सरन, प्रधान, अभयपुर रुदपुर
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