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गुस्सा फूटा, साढ़े चार घंटा बंद रहा माधोटांडा मार्ग

Pilibhit

Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
पूरनपुर। बाघ के हमले में 36 घंटे के भीतर दो लोगों की मौत और इतने ही लोगों के घायल होने की घटना से इलाके में खौफ तारी है। बाघ को पकड़वाने में वन विभाग की नाकामी से लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। गुस्साए लोगों ने गुरुवार को माधोटांडा-पूरनपुर मार्ग साढ़े चार घंटे जाम रखा। प्रदर्शनकारियों के गुस्से के भय से चार घंटे तक वन विभाग के अफसर, कर्मचारी मौके पर पहुंचने का साहस नहीं जुटा सके। जाम के कारण बच्चे स्कूल तक नहीं जा सके।
पूरनपुर-माधोटांडा मुख्य मार्ग के पास झाड़ियों में वृद्धा सिमरता देवी का शव मिलते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। घटना के विरोध और बाघ पकड़वाने की मांग को लेकर लोग प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने पेड़ काटकर सुबह करीब सात बजे सड़क पर डाल दिए। करीब पौने नौ बजे पहुंचे इंस्पेक्टर राजा सिंह ने प्रदर्शनकारियों से बात की। प्रदर्शनकारी वन विभाग के अफसरों को बुलाने की मांग करने लगे। करीब नौ बजे एसडीएम रामप्रकाश और बाद में तहसीलदार रामसुधार मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने घटना स्थल का निरीक्षण कर देय सुविधा दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने घटना पर अफसोस जाहिर करते हुए वन विभाग के अफसरों को मौके पर पहुंचने को कहा। करीब साढ़े दस बजे शाहजहांपुर के डीएफओ एपी सिन्हा, एसडीओ आरपी सिंह, डिप्टी रेंजर एसके वर्मा मौके पर पहुंचे। प्रदर्शनकारी वन कर्मियों से बाघ को पकड़वाने या फिर मारने की स्वीकृत देने की मांग करने लगे। उन्होंने वन विभाग के अफसरों का घेराव कर खूब खरी-खोटी भी सुनाई। वन विभाग के अफसरों ने बाघ को शीघ्र पकड़वाने और मृतका के परिजनों को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। तब लोगों ने वृद्धा का शव उठने दिया। करीब साढ़े चार घंटे के जाम में तमाम लोग फंसे रहे। दर्जनों गांवों के माधोटांडा रोड से पूरनपुर आने वाले स्कूली बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाए और बैरंग घरों को लौट गए।
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आत्मरक्षा के लिए बाघ का मारना दंडनीय नहीं : डीएफओ
घेराव और प्रदर्शनकारियों के उग्र रूप को देखकर उनको सामाजिक वानिकी के शाहजहांपुर के डीएफओ एपी सिन्हा ने यह कहकर शांत किया कि आत्मरक्षा के लिए अपरिहार्य होने पर बाघ को मारा भी जा सकता है।
उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि जब तक बाघ को पकड़ नहीं लिया जाता, लोग अपने बच्चों को स्कूल न भेजें। वह प्रशासन से बाघ की सक्रियता वाले क्षेत्रों में स्कूल बंद कराने के लिए बात करेंगे। उन्होंने कहा कि गन्ने के खतों में शौच के लिए जाने की बजाय लोग खुले खेतों में जाएं। लोगों का कहना था कि बाघ अब आए दिन इंसानों पर हमले कर रहा है। बाघ को नहीं पकड़वाया जा रहा है। अगर बाघ को कुछ हो जाए तो कई गांवों के निर्दोषों को जेल जाना पड़ सकता है। तब डीएफओ ने लोगों को बताया कि आईपीसी में आत्मरक्षा को अपनी सुरक्षा को सब कुछ करने का अधिकार है। आत्मरक्षा के लिए जरूरी होने पर बाघ को भी मारा जा सकता है।
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आत्मरक्षा सिद्ध करने को है कई पेंच
डीएफओ ने आत्मरक्षा के लिए जरूरी होने पर बाघ को मारे जा सकने की बात तो कही लेकिन आत्म रक्षा के लिए ऐसा जरूरी था यह सिद्ध करने में कई पेंच हैं। मसलन, क्या बाघ ने उस पर (मारने वाले पर) ऐसा हमला किया है कि अगर वह बाघ को न मारता तब बाघ उसे मार देता।

....और सामने आ गई अधिकारियों की लापरवाही!
बाघ दहाड़ता रहा अफसर सोते रहे
शुरू हुए इंसानी खून, तब जागी चेतना
गायब एक्सपर्ट भी लौटे, दो और आएंगे
अब रेस्क्यू वाहन भी भेजा
विकास शुक्ला
पीलीभीत। खेतों में बाघ दहाड़ता रहा। वन अधिकारी सोते रहे। लोगों ने हंगामा किया तो पंजे ट्रेस किए जाते रहे। डीएफओ लिखापढ़ी कर बजट और एक्सपर्ट मांगते रहे। न तो बजट मिला और न एक्सपर्ट। बस, खानापूरी की गई। हर कदम पर लापरवाही और अब लगातार मौतों के बाद शुरू हुई सक्रियता से पूरा महकमा सवालों में आ गया है।
जनपद में 712 वर्ग किलोमीटर में जंगल है। यहां के जंगलों की यह खासियत है कि हर कंपार्टमेंट में बाघ हैं। इसके बावजूद विभाग के पास संसाधन नहीं हैं। बाघों के संख्या अधिक होने के बाद भी यहां एक्सपर्ट की तैनाती नहीं है। उन्हें पड़ोसी जनपद लखीमपुर-खीरी से बुलाना पड़ता है, जिसमें समय और धन दोनों व्यय होता है। मानक के अनुसार यहां डब्ल्यूटीआई का कार्यालय भी होना चाहिए। क्षेत्रफल को देखते हुए कम से कम चार प्रशिक्षित हाथी होने चाहिए। गश्त के लिए पर्याप्त वाहन और अत्याधुनिक शस्त्र होने चाहिए, लेकिन यह कुछ भी नहीं। मामूली जंगल के रखवालों की तरह यहां के कर्मचारी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करते हैं।
महकमे के उच्च अधिकारियों के बाखबर होने के बाद भी इस ओर ध्यान न देने से आज स्थिति खौफनाक हो गई है। बाघ कब किसे अपना शिकार बना लें, इसको लेकर हर कोई दहशत में है। 15 दिन में तीन और 24 घंटे में दो को निवाला बनाए जाने के बाद अफसर जाग गए हैं। प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) लखनऊ रूपकडे ने एक्सपर्ट की एक टीम भेजी, जो मौके पर आ भी गई। इसके अलावा उन्होंने अपने विश्वसनीय दो एक्सपर्ट रेस्क्यू वाहन (जंगल में प्रयोग के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित गाड़ी) के साथ भेजे हैं, जो शुक्रवार सुबह से बाघ को पकड़ने का प्रयास करेंगे। और रेस्क्यू वाहन भी भेज दिया गया। लगातार दो मौतों के बाद बाघ पकड़ने के लिए यह संजीदगी अधिकारियों की अब तक की लापरवाही को उजागर कर रही है। काश, महकमे ने पहले यह सक्रियता दिखाई होती तो शायद बाघ का शिकार हुए लोगों को जान बच जाती, दर्जनों पशु निवाला नहीं बनते और लोगों को भी जख्मी होकर जिंदगी-मौत से न जूझना पड़ता।
इनसेट.............
प्रमुख वन संरक्षक को दी जा रही गलत रिपोर्ट
प्रमुख वन संरक्षक रूपकडे ने अमर उजाला को बताया कि कल और आज के घटनास्थल के बीच की दूरी 17 किलोमीटर है। यह बताने पर कि दोनों स्थलों के बीच अधिकतम सात किलोमीटर का ही फासला है, वह चौंक गए और बोले, इसका मतलब गलत जानकारी दी जा रही है। उन्होंने इस बावत जांच कराने की भी बात की। फिलहाल उनके इस बयान से यह बात साफ हुई कि प्रमुख वन संरक्षक को भी जिले से गलत रिपोर्ट दी जा रही है।
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शाहजहांपुर के डीएफओ और स्टाफ को भी लगाया
शाहजहांपुर के सामाजिक वानिकी के डीएफओ एपी सिन्हा ने बताया कि चीफ ने बाघ के बढ़ते आतंक के मद्देनजर उनको भी क्षेत्र में लगने के निर्देश दिए हैं। इसलिए वह रात में ही टीम के साथ पहुंच गए। उन्होंने बताया कि खुटार रेंजर को भी स्टाफ के साथ बुलाया गया है।
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बच्चों को स्कूल से छुट्टी
जिस स्थान पर वृद्धा का अधखाया शव मिला उससे करीब पचास मीटर की दूरी पर रुरिया गुरुद्वारा में दशमेश पब्लिक स्कूल का संचालन होता है। विरोध प्रदर्शन और जाम के मद्देनजर तथा बच्चों में दहशत की आशंका को लेकर आज स्कूल में छुट्टी कर दी गई। स्कूल आए बच्चे घरों को वापस लौट गए।
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वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने दी सहायता
सामाजिक वानिकी के डिप्टी रेंजर एसके वर्मा ने बताया कि वृद्धा के अंतिम संस्कार को सामाजिक वानिकी की ओर से मृतका के परिजनों को पांच हजार रुपये तथा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से पांच हजार रुपये की सहायता दी गई।
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पुत्री-दामाद करते थे वृद्ध दंपति की देखरेख
सिमरता देवी और हरिश्चंद्र के चार पुत्रियां है। कोई पुत्र न होने से दंपति ने अपनी सबसे छोटी पुत्री लौंगश्री और उसके पति ज्ञान सिंह को अपने पास रख लिया। हरिश्चंद्र काफी बुजुर्ग हैं और बीमार चल रहे है। ज्ञान सिंह ने बताया कि उसके सास-ससुर ने अपने पास कृषि भूमि को चारोें पुत्रियों मेें आधा-आधा एकड़ बांट दी है।
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लापता छात्र की तलाश में भी खंगाले खेत
किशोर के घर पहुंचने पर लौटी रौनक
अमर उजाला नेटवर्क
पूरनपुर। गांव खमरिया पट्टी का किशोर और नगर के पंचमदास स्कूल के छात्र के तीन दिनों से लापता होने से ग्रामीणों ने अनहोनी की आशंका पर खेतों को खंगालना शुरू किया। किशोर के तीसरे दिन अपरान्ह घर लौटने पर उसके परिजनों के चेहरों की रौनक लौट आई।
गांव निवासी गजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि उसका पुत्र 12 वर्षीय ईश्मेंद्र सिंह पूरनपुर के पंचमदास स्कूल का छात्र है। वह मंगलवार को घर से चला गया था। हालांकि मंगलवार की शाम को उसके बडे़ पुत्र को वह रेलवे स्टेशन पर मिला और फिर चकमा देकर लापता हो गया। इधर, गांव के समीप गांव के लाखन का कल बुद्धवार को शव मिला। इस पर लोग लापता किशोर को लेकर अनहोनी की आशंका व्यक्त करने लगे। गुरुवार को अपरान्ह किशोर के चाचा घनेंद्र सिंह यादव के नेतृत्व में कई लोगों ने खेतों मेें किशोर की तलाश की। किशोर का सुराग न मिलने से उसके परिजनों के चेहरों की रौनक उड़ी हुई थी। गुरुवार को अपरान्ह किशोर के अचानक घर आने पर उसके परिजनों के चेहरों की रौनक लौट आई। घनेंद्र सिंह यादव ने बताया कि उसका भतीजा घर पहुंच गया है। जो नाराज होकर घर से मंगलवार को चला गया था।

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दो सालों में दस लोगों को बाघ ने बनाया निवाला
पीलीभीत। पूरनपुर तहसील क्षेत्र में वर्ष 2010 से अब तक दस लोगों को बाघ ने निवाला बना लिया। अब तक इन लोगों को बाघ ने मार डाला।
रेंज तारीख नाम
दियोरिया कलां 04 मई 2010 गोकरन
दियोरिया कलां 07 जून 2010 वेदप्रकाश
दियोरिया कलां 26जून 10 हुलासीराम
दियोरिया कलां 25 जुलाई 10 श्यामलाल
दियोरिया कलां 27 जुलाई 10 जमुनाप्रसाद
दियोरिया कलां 10 अगस्त 10 रैंडा देवी
हरीपुर रेंज 13 मई 2012 जगरनाथ
पूरनपुर रेंज 21 अगस्त 2012 फूलमती
पूरनपुर रेंज 05 सितंबर 2012 लाखन
पूरनपुर रेंज 06 सितंबर 2012 सिमरता देवी
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बाघ के हमले में घायल हुए लोग
12 मई- गांव कढेरचौरा के एक युवक पर हमला, घायल।
12 जनवरी- लकड़ी बीनने गए जमुनिया के एक युवक पर हमला, घायल।
11 जून- गांव कढेरचौरा में बाग में सो रहे विकलांग चौकीदार छोटेलाल पर हमला, लहूलुहान।
13 जून- बाघ पकड़ने आयी ट्रैंकुलाइज टीम पर बाघ का हमला।
एक जुलाई- गांव सिकरहना में खेत से लौट रहे किसान सुरेश वर्मा और मेवाराम पर बाघ का हमला, लहूलुहान।
दो जुलाई- नगर की आबादी के समीप बाघ ने दो किशोरोें पर हमला।
11 जुलाई- गांव लाह के समीप खेत में काम कर रहे लाह के हरद्वारी लाल पर हमला, लहूलुहान।
25 जुलाई- गांव मुफ्फरनगर के ज्योति स्वरुप और गांव बिलहरी के सुनील पर हमला, लहूलुहान।
29 जुलाई- बाग में सो रहे गजरौला के धनीराम पर हमला, घायल।
16 अगस्त- गांव जटपुरा के किशोर दीपू पर हमला, घायल
22 अगस्त -बिलहरी छात्र अर्पित पर हमला, घायल
27 अगस्त- गांव अभयपुर नौगवां की छात्रा विमला पर हमला।
28 अगस्त- अभयपुर नौगवां के लोकेश, धर्मपाल पर हमला।
4 सितंबर- गांव बिलहारी के फलगूचरन और नीरज पर हमला, फलगूचरन लहूलुहान।

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दो दर्जन गांवों में है बाघों का आतंक
बाघों के आतंक से क्षेत्र के दो दर्जन गांव के लोग दहशत में है। क्षेत्र के गांव जटपुरा, गजरौला खास, लाह, हुसैनापुर, बिलहरी, रुदपुर, बालामनी, मुजफ्फनरगर के अलावा माधोटांडा क्षेत्र के गांव केसरपुर, उगनपुर, नौरंगावाद के अलावा खारजा नहर के किनारे के कई गांवों और घुंघचाई क्षेत्र के घुंघचाई के अलावा दिलावरपुर, सिकरहना, मटेहना, दंदौल कालोनी, मदारपुर, अभयपुर माधौपुर, शहबाजपुर, गोपालपुर, सिरसा आदि गांवों में बाघ का आतंक है। बाघ की दहशत के चलते किसान अपने खेतों में फसल की देखरेख को नहीं जा पा रहे है। पशुओं के लिए चारा लाने में भी किसान कतराते हैं। दहशत के चलते लोग रात जाग कर काट रहे हैं। स्कूली बच्चे स्कूल जाने के बाद घरों में वापस न लौटने पर अभिभावक चिंतित रहते हैं। खेतों में शौच को जाने और टहलना भी लोगों ने बंद कर दिया गया।
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किस क्षेत्र के कितने गांवों में बाघ की दहशत..........
हरीपुर रेंज : बमनगर, सबलपुर, मुजफ्फरपुर, जटपुरा, रुदपुर, बालावली, नजीरगंज, जहूरगंज, लहा।
रियोरिया रेंज : घुंघचाई, सिकरहना, मटेहना, दिलावरपुर, उदरहना, कालाबोझ, नवदिया, गरीबपुर, बिलहा, सुल्तानपुर।
पूरनपुर रेंज : कढ़ेरचौरा, गहलुइया, कुर्रैया, सबलपुर।
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