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फिर बच कर निकल गया बाघ

Pilibhit

Updated Sun, 02 Sep 2012 12:00 PM IST
बकरी पर हमले के बाद घिर चुका था
किसान के विरोध पर खेत में नहीं पहुंच पाए एक्सपर्ट

पूरनपुर। एक किसान के विरोध के सबब शनिवार को बाघ विशेषज्ञों के चंगुल में आते -आते रह गया। बाघ ने जटपुरा गांव के समीप के खेत में चर रही गांव के ननकाई की बकरी पर हमला बोला तो बकरी की चीख पुकार पर लोग एकत्र हो गए । भीड़ को देख बाघ पड़ोस के एक गन्ने के खेत में छिप गया। सूचना पर ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट मौके पर पहुंचे। खेत को जाल लगाकर घेर दिया गया। हाथी भी मौके पर मंगवा लिए गए। ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट हाथी पर सवार होकर खेत मेें घुसते। इससे पहले खेत की देखरेख कर रहे किसान ने विरोध करना शुरू कर दिया। किसानों के विरोध पर बाघ को ट्रैंकुलाइज नहीं किया जा सका।
पूर्व में गांव रुदपुर नौगवां के समीप बनाए गए मचान पर बैठकर ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट बाघ आने का इंतजार करते रहे। इधर, बाघ के आतंक बढ़ने पर 25 अगस्त को ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट दुबारा बुला लिए गए। पिंजरा भी मंगवाएं गए। हाथी भी मंगवा लिए गए। तब से बाघ को ट्रैंकुलाइज के प्रयास किए जा रहे हैं। शनिवार को बाघ की लोकेशन जानने को वन विभाग की टीमें जुटी रही। हरीपुर रेंजर जगन्नाथ प्रसाद और सामाजिक वानिकी के रेंजर अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बाघ की लोकेशन को चारों ओर टीमें भेजी गई थी, लेकिन उसका सुराग नहीं लग पाया है। इधर, बाघ की लोकेशन न मिलने के बावजूद गांव रुदपुर नौगवां में बनाए गए मचान पर बैठकर ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट उसका इंतजार करते रहे। शनिवार को किसानों और अन्य लोगों के विरोध को लेकर टीम वापस लौट आई। टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कं जर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष अख्तर मियां ने बताया कि लोगों के विरोध को लेकर बाघ ट्रैंकुलाइज करने का अभियान नहीं चल सका।

इससे बढ़िया मौका मिलना मुश्किल : एक्सपर्ट
पूरनपुर। ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट डा. सौरभ सिंघवी ने बताया कि बाघ जिस गन्ने के खेत में घिरा था। वह बहुत छोटा था और चारों ओर से खाली था, लेकिन गांव वालों ने खेत में घुसने का विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि बाघ खुले मैदान में मिल जाए और उसे ट्रैंकुलाइज कर लिया जाए इसके कम चांसेज है। आज मौका बढ़िया था। चोरों ओर गन्ने के खेत होने को लेकर ऐसा मौका जल्दी मिलने की उम्मीद कम ही है।

फिर भी बनाया मचान
पूरनपुर। गांव रुदपुर नौगवां के समीप बाघ को ट्रैंकुलाइज करने को मचान बनाया गया है। ताकि बाघ मचान के नीचे बधे पड्डे का शिकार करने आए और उसे ट्रैंकुलाइज कर लिया जाए। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि गांव वालोें में बाघ के अक्सर वहां आने की सूचना दी। इस पर मचान बनाया गया है।
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